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    आयुध अधिकारियों की विदेश यात्राएं CBI के निशाने पर, करोड़ों के टेंडर घोटाले के बाद मांगा जा सकता है ये ब्योरा

    Updated: Sat, 11 Jul 2026 05:14 AM (IST)

    हजरतपुर आयुध उपस्कर निर्माणी में करोड़ों के टेंडर घोटाले के बाद, सीबीआई अब पिछले चार वर्षों में विदेश यात्रा करने वाले आयुध अधिकारियों पर शिकंजा कस रह ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. हजरतपुर आयुध निर्माणी में करोड़ों के टेंडर घोटाले का खुलासा

    2. सीबीआई चार साल की विदेश यात्राओं के खर्च का ब्योरा मांगेगी

    3. ब्योरा न देने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी

    जागरण संवाददाता, कानपुर। आयुध उपस्कर निर्माणी, हजरतपुर में करोड़ों के टेंडर में खेल खुलने के बाद अब रक्षा कंपनी के अफसर परेशान हैं। क्योंकि हजरतपुर के प्रकरण में दलालों और ठेकेदारों ने अफसरों के लिए दक्षिण कोरिया की हवाई यात्रा के हवाई टिकट बुक कराए और उनकी पत्नियों के बैंक खातों में मोटी रकम ट्रांसफर करने की बात सीबीआइ की जांच में आई है। ऐसे में अब सीबीआइ के अधिकारी पिछले चार वर्षों में विदेश यात्रा करने वाले टीसीएल कंपनी मुख्यालय, कानपुर और आयुध उपस्कर निर्माणी कानपुर और हजरतपुर, आयुध वस्त्र निर्माणी अवाडी चेन्नई और शाहजहांपुर के अधिकारियों को राडार पर लेने की तैयारी है।

    सीबीआइ की पूछताछ में अफसरों को विदेश यात्रा में खर्च का ब्योरा और किस मद से भुगतान हुआ, इसका ब्योरा देना पड़ सकता है। यदि कोई भी अफसर ब्योरा नहीं दे पाया, तो उसका नपना तय है। एक अधिकारी ने बताया कि सैन्य रक्षा उत्पादों के निर्यात आर्डर लेने के लिए कंपनी ही दूसरे देशों में भेजती रही है। ऐसे में इस बिंदु को जांच के दायरे में रखना उचित नहीं होगा। उन्होंने बताया कि फिलहाल, पिछले तीन दिन में सीबीआइ की टीम शहर में नहीं आई है।


    वर्तमान में अर्मापुर के टीसीएल ट्रेनिंग एकेडमी में महाप्रबंधक अमित सिंह पर पहले से आय से अधिक संपत्ति का मुकदमा दर्ज है। अब 12 करोड़ रुपये से फर्जी टेंडर होने के प्रकरण में मुकदमा दर्ज होने के बाद उनकी मुश्किलें और बढ़ती जा रही हैं। विभागीय जानकार बताते हैं कि रक्षा मंत्रालय ने भी पूरे घटनाक्रम का संज्ञान लिया है। मंत्रालय जल्द ही उच्चस्तरीय कमेटी गठित करके पूरे प्रकरण की रिपोर्ट मंगवा सकता है।

    इधर, आयुध निर्माणियों में हलचल, प्राइवेट फर्मों को दिए गए टेंडरों की होगी जांच

    हजरतपुर स्थित आयुध उपस्कर निर्माणी (ओईएफ) में भ्रष्टाचार की सीबीआइ जांच पूरी होने के बाद सीबीआइ (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) की एंटी करप्शन ब्रांच ने गाजियाबाद में चार मुकदमे दर्ज कराए हैं। इसमें ओईएफ के तत्कालीन मुख्य महाप्रबंधक (सीजीएम) और जनवरी से अब तक टीसीएल ट्रेनिंग अकादमी में महाप्रबंधक पद पर तैनात अमित सिंह का भी नाम शामिल है।

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    टीसीएल मुख्यालय में पूरे दिन हुईं बैठक

    सीबीआइ ने फरवरी में आय से अधिक संपत्ति की रिपोर्ट दर्ज की थी। इसके बाद अब भ्रष्टाचार के प्रकरण में मुकदमा दर्ज किया गया है। गुरुवार को मुकदमा दर्ज किए जाने का प्रकरण चर्चा में आने के बाद ट्रूप कंफर्ट्स लिमिटेड यानी टीसीएल मुख्यालय में पूरे दिन बैठकों का सिलसिला चला। एक अधिकारी ने बताया कि टीसीएल के अधीन ओईएफ कानपुर और हजरतपुर व ओसीएफ शाहजहांपुर और अवाडी चेन्नई में प्राइवेट फर्मों को दिए गए टेंडरों की जांच शुरू हो सकती है।

    सीबीआइ बढ़ा सकती है जांच का दायरा

    जल्द ही सीबीआइ की टीम जांच का दायरा बढ़ाते हुए टीसीएल मुख्यालय और कंपनी के अधीन चार आयुध निर्माणियों में जांच करने जा सकती है। हालांकि इस प्रकरण में टीसीएल कंपनी के अधिकारी बात करने से बचते रहे। ओईएफ हजरतपुर में कई फर्मों को गलत तरीके से करोड़ों के टेंडर देने और प्रतिबंधित क्षेत्र में दीवार खड़ी करवाने के मामलों में रिश्वत लेने के आरोप में पूर्व मुख्य महाप्रबंधक समेत अन्य अधिकारी, कर्मचारियों, फर्म मालिकों को नामजद किया है।