कानपुर ज्योति हत्याकांड पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, पति समेत पांच की उम्रकैद बरकरार
सुप्रीम कोर्ट ने कानपुर के चर्चित ज्योति हत्याकांड में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। पति समेत पांच दोषियों की उम्रकैद की सजा कायम रहेगी ...और पढ़ें

ज्योति की फाइल फोटो। स्वजन
HighLights
सुप्रीम कोर्ट ने ज्योति हत्याकांड में फैसला सुनाया।
पांच दोषियों की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी गई।
मनीषा मखीजा को संदेह का लाभ देकर बरी किया।
जागरण संवाददाता, कानपुर। कानपुर के चर्चित ज्योति हत्याकांड में सजायाफ्ता पीयूष श्यामदासानी समेत तीन अन्य की अपीलों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए चारों अपीलों को खारिज कर दिया। इससे पीयूष, रेनू और सोनू की उम्रकैद की सजा यथावत रहेगी। वहीं, मनीषा मखीजा को हाई कोर्ट से मिली दोषमुक्ति को सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा है।
पांडुनगर निवासी बिस्किट कारोबारी का पुत्र पीयूष श्यामदासानी पत्नी ज्योति उर्फ पूजा के साथ 27 जुलाई 2014 की रात स्वरूप नगर के वरांडा होटल गया था। रात 11:30 बजे उसने पुलिस को सूचना दी कि कुछ लोगों ने उसकी कार को बाइक अड़ाकर रोक लिया। गाड़ी से नीचे उतारकर उसे पीटा और कार लेकर फरार हो गए। ज्योति भी उसी में थी। पुलिस ने कल्याणपुर पनकी रोड से कार में ज्योति का शव बरामद किया था। चाकू से गोदकर उसकी हत्या की गई थी।
पुलिस ने इस मामले में पीयूष श्यामदसानी, पान मसाला कारोबारी की बेटी मनीषा मखीजा, ड्राइवर अवधेश, रेनू उर्फ अखिलेश, सोनू और आशीष कश्यप को गिरफ्तार किया था। कानपुर के सत्र न्यायालय ने इस मामले में 20 अक्टूबर 2022 पीयूष समेत अन्य अभियुक्तों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
सत्र न्यायालय के आदेश को सभी छह दोषियों ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। 29 नवंबर 2024 को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पांच दोषियों की सजा बरकरार रखी थी और मनीषा को संदेह का लाभ देते हुए बेकसूर करार दिया था। तीन अभियुक्तों पीयूष, रेनू उर्फ अखिलेश, सोनू ने हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। वहीं, मनीषा को दोषमुक्त किए जाने के हाई कोर्ट के आदेश को प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
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सुप्रीम कोर्ट ने इन चारों अपीलों का एक साथ निस्तारण कर दिया। पीयूष समेत तीनों की सजा बरकरार रखी है और मनीषा को पर्याप्त सबूत न होने के आधार पर उसकी दोषमुक्ति को भी बरकरार रखा है।
सुनवाई में रखी गईं दलीलें
अभियोजन की तरफ से सुनवाई में कहा गया कि विवाह को अक्सर किसी व्यक्ति के जीवन के सबसे महत्वपूर्ण निर्णयों में से एक माना जाता है। वैवाहिक कलह के परिणाम गंभीर और घातक भी हो सकते हैं। यह मामला एक ऐसी चरम स्थिति को दर्शाता है। आरोप था कि ज्योति की हत्या की साजिश रची गई, उसमें सबकी एक मंशा थी और वह उसमें सफल भी हुए। वहीं, अपीलकर्ताओं का तर्क था कि उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं हैं। काल रिकार्डिंग के आधार पर उन्हें साजिशकर्ता बनाया गया है जबकि जिन काल रिकार्डिंग का जिक्र किया जा रहा है उनसे संबंधित मोबाइल फोन के सिम उनके नहीं है। सभी पक्षों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने माना कि हाई कोर्ट ने सबूतों को परखने में कोई गलती नहीं की है।