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कमजोर इम्यूनिटी वालों को स्वाइन फ्लू का खतरा ज्यादा, लक्षणों को पहचानें, तुरंत डॉक्टर से मिलें

Published: Sat, 05 Sep 2026 09:07 PM (IST)

कानपुर में स्वाइन फ्लू, वायरल बुखार और डेंगू-मलेरिया के बढ़ते मामलों में लक्षणों की अनदेखी जानलेवा हो सकती है। प्रो. ...और पढ़ें

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HighLights

  1. स्वाइन फ्लू, वायरल बुखार, डेंगू के लक्षणों को अनदेखा न करें।

  2. कमजोर प्रतिरक्षा वाले मरीजों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

  3. भीड़ से बचें, मास्क लगाएं, डॉक्टर की सलाह लें।

जागरण संवाददाता, कानपुर। स्वाइन फ्लू, वायरल बुखार, डेंगू-मलेरिया के बढ़ते मामलों में लक्षणों की अनदेखी जानलेवा साबित हो सकती है। बदलते मौसम में खांसी, बुखार, जुकाम, गले में खरास और संक्रमण होने पर डाक्टर की सलाह पर इलाज कराएं।कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीजों में स्वाइन फ्लू वायरस का खतरा सर्वाधिक रहता है।

गंभीर बीमारी हृदय, किडनी, लिवर, बीपी व शुगर के मरीजों में भी वायरल बुखार की अनदेखी गंभीरता को बढ़ा सकती है। यह बातें दैनिक जागरण के हेलो डाक्टर में जीएसवीएम मेडिकल कालेज के प्रो. जेएस कुशवाहा ने पाठकों के सवालों का उत्तर देते हुए कही। पढ़ें पाठकों से बातचीत के मुख्य अंश...

 

बलगम आने के साथ सीने में जकड़न की समस्या रहती है। अब सांस लेने में दिक्कत हो रही है? - उमेश गुप्ता, यशोदा नगर। आशुतोष शर्मा, बर्रा।
सांस के रोगियों में इस प्रकार की समस्या वायरल के कारण बढ़ जाती है। मौसम में बदलाव में इस प्रकार की समस्या हो सकती है। बचाव के लिए मास्क लगाए और भीड़-भाड़ वाले स्थान पर जाने से बचें। वायरल बुखार के लक्षण दिखने पर डाक्टर की सलाह दवाएं लें। बलगम अधिक आने पर भाप लें। इस समय सड़कों पर धूल अधिक उड़ने से भी गले व सीने का संक्रमण हो सकता है।


40 वर्ष की बेटी को बुखार आ रहा है, पैरासिटामाल देने के बाद भी बुखार व गले का दर्द सही नहीं हो रहा है? - वेद प्रकाश गुप्ता, बारासिरोही।
वायरस के बदलते रूप के कारण ऐसा हो सकता है। आप एक बार एलएलआर के मेडिसिन विभाग में दिखा लें। जहां पर जांच के बाद उचित दवाएं दी जाएगी। जांच के बाद ही सही दवा व सही इलाज मिलेगी। तब तक संक्रमण से बचे, भीड़भाड़ वाले स्थान पर जाने से बचें, मास्क लगाएं और घर में बना भोजन ही करें।


जोड़ों में दर्द, जुकाम, खांसी व बुखार आ रहा है। क्या यह वायरल है? - इंद्रदेव सोनकर, सचेंडी। राजेंद्रर सिंह खनूजा
जी हां, यह वायरल बुखार के कारण हैं, इसमें घर पर ही आराम करें। डाक्टर की सलाह पर पैरासिटामाल लें। बलगम आने पर भाप लें। अधिक तेल व मसालेदार खाने से बचें। वायरस के कारण ही जोड़ों में दर्द व पेट से जुड़ी समस्याएं हो सकती है। एक बार आप एलएलआर अस्पताल की मेडिसिन ओपीडी में दिखा लें।

बुखार के साथ कमजोरी अधिक हो रही है। कुछ भी काम नहीं कर पा रही हूं? - अलका द्विवेदी, पी रोड। राम प्रकाश।
वायरल बुखार में इस प्रकार की समस्या होती है। आप डाइट बेहतर करें। खाने में सलाद, दही का प्रयोग करें। जोड़ों में दर्द होने पर हल्की मालिश कर सकते हैं। पेन किलर खाने से बचें। डाक्टर की सलाह पर ही दवाएं लें। खुद से किसी भी प्रकार की दवाएं नहीं लें। स्वाइन फ्लू, डेंगू-मलेरिया का खतरा इन दिनों तेजी से बढ़ रहा है। बचाव के लिए सतर्क रहें। मच्छरों से बचाव करें। पूरी बांह के कपड़े पहनें, मच्छरदानी लगाएं। स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए जुकाम, बुखार व खांसी वाले मरीजों से दूरी बनाएं। अगर किसी को समस्या है, तो उसे तत्काल डाक्टर की सलाह पर आइसोलेट हो जाना चाहिए।

वायरल का खतरा किसको सबसे ज्यादा हो सकता है? - भुवन जोशी, विश्व बैंक। उत्तम शर्मा, चौबेपुर।
कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीज, कैंसर, बीपी, शुगर, हार्ट व किडनी रोगियों में वायरल का खतरा सबसे ज्यादा हो सकता है। बच्चों में भी वायरल का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। खान-पान को बेहतर करें, पर्याप्त नींद लें, बाहर बाजार में बिकने वाले खान-पान से बचें। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होगी और आप वायरल के घेरे में आने से बचेंगे।

वायरल बुखार से बचाव के लिए क्या करें, ताकि इससे सुरक्षित रहें? - अजय सिंह, भैरमपुर।
वायरल बुखार अगर परिवार में किसी को हुई है तो बाकी सदस्यों से अलग हो जाना चाहिए। सामान्य रूप से वायरल सात दिनों में मल और मूत्र के जरिये निकल जाता है। अगर सात दिनों में आराम नहीं मिल रहा है तो डाक्टर को दिखाएं। सांस लेने में दिक्कत व सीने में दर्द की समस्या होने पर तुरंत डाक्टर को दिखाएं। रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर करने के लिए खान-पान करें। बचाव के लिए आप वैक्सीनेशन करा सकते हैं।

गले में कई दिन से खरास है, कुछ अटका जैसा प्रतीत होता है। खाने में स्वाद नहीं आ रहा है? - प्रियंका, गांधी नगर।
जी, वायरल की चपेट में आने वालों में इस प्रकार की समस्या मिल रही है। आप दर्द में पैरासिटामाल व खरास में एंटी एलर्जिक का सेवन करें। सोते समय भाप लें। अधिक दिक्कत होने पर जांच कराकर डाक्टर को जरूर दिखा लें।

वायरल बुखार, डेंगू से कैसे बचाव करें? - जय प्रकाश तिवारी, बर्रा एक। गोपू यादव, पनकी।
डेंगू से बचाव के लिए घर में पानी एकत्र होने से बचें। कूलर, गमला, छतों पर पानी में लार्वा न पनपने दें। विटामिन सी के लिए फल का सेवन करें। सोते समय पूरी बांह के कपड़े पहनें। स्वाइन फ्लू के लक्षण बुखार, गले में दर्द, कमजोरी, खांसी आना, मांसपेशियों में दर्द, स्वाद नहीं आना शामिल है। ऐसे लक्षण दिखने पर डाक्टर की सलाह लें। बिना डाक्टर को दिखाए इलाज कराने से बचें।

क्या वायरल बुखार दोबारा लौटकर आ सकता है। ऐसा क्यों? - अविनाश मिश्रा, श्याम नगर।
कमजोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता के कारण ऐसा हो सकता है। वायरल बुखार का अटैक गंभीर मरीज, बुजुर्ग व बच्चों में ज्यादा दिख रहा है। ऐसे में उनका बचाव करें। भीड़-भाड़ वाले स्थान पर जाने से बचें। अस्पताल में जाते समय मास्क लगाए। अस्पताल से लौटने पर अच्छे हाथ और मुंह धोएं। गुनगुने पानी का सेवन करें।

इन्होंने किए प्रश्न 

आरबी सैनी, गुरुदेव। रवि प्रताप सिंह चौहान, स्वरूप नगर। श्याम शुक्ला, जरौली। पुष्पेंद्र यादव, गुजैनी। पूजा अग्रवाल कल्याणपुर। संजय सिंह, लालबंगला। राधेश्याम अग्रवाल, बिरहाना रोड। पिंकी, दिलीपपुर। ज्ञानेंद्र अवस्थी, सरायमीता।


ऐसे फैलता संक्रमण

इसका संक्रमण संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने, बोलने व सांस लेने के दौरान निकलने वाली श्वसन बूंदों एवं सूक्ष्म कणों के माध्यम से होता है। संक्रमित व्यक्ति के निकट रहने, बंद एवं भीड़-भाड़ वाले स्थानों में लंबे समय तक संपर्क तथा दूषित हाथों से आंख, नाक, व मुंह छूने से भी संक्रमण फैल सकता है।

शुरुआती लक्षण

इसके लक्षण सामान्य फ्लू जैसे होते हैं। वायरस के संपर्क में आने के लगभग तीन से पांच दिनों के भीतर एचवन एनवन के लक्षण दिखते हैं। अधिक थकान, बुखार, मांसपेशियों में दर्द, ठंड लगना, सिरदर्द, गले में खरास, खांसी के साथ दिखते हैं। जिसका सबसे ज्यादा खतरा पांच वर्ष से छोटे बच्चे, कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले, डायबिटीक, गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग में बना रहता है।

ऐसे करें बचाव

  • भीड़भाड़ वाले स्थान में जाने बचना चाहिए।
  • खांसते-छींकते समय मुंह और नाक को रुमाल से ढक लेना चाहिए।
  • इसकी जांच के लिए रैपिड इंफ्लूएंजा डायग्नोस्टिक टेस्ट, वायरल कल्चर की जांच से स्वाइन फ्लू की जांच की जाती है।
  • बचाव के लिए पर्याप्त आराम, शरीर में पर्याप्त तरल की मात्रा, बुखार में डाक्टर की सलाह पर दवा व गंभीर लक्षण दिखने पर अस्पताल में भर्ती होना चाहिए।

खान-पान में इन्हें शामिल करें

  • खाने में प्रोबायोटिक दही लें।
  • मौसमी फल व सब्जियों लें।
  • सूप व तरल पदार्थ अधिक लें।
  • हल्का और सुपाच्य भोजन करें।
  • विटामिन सी यानी खट्टे फल व नींबू का सेवन करें।

 

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