शरीर पर बनवाया टैटू तो सरकारी नौकरी का सपना रह जाएगा अधूरा? देखें क्या हैं नियम
टैटू बनवाने का बढ़ता चलन अब युवाओं के एनसीसी और सरकारी नौकरियों में प्रवेश में बाधा बन रहा है। ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर
HighLights
टैटू के कारण एनसीसी में हजारों छात्रों का दाखिला रुका।
सेना और सरकारी नौकरियों में टैटू पर सख्त नियम लागू।
दृश्यमान टैटू पेशेवर छवि के लिए अस्वीकार्य माने जाते हैं।
जागरण संवाददाता, कानपुर। शरीर पर टैटू एनसीसी या सेना में जाने में बाधक बन सकता है। युवाओं और किशोरों में टैटू बनवाने का बढ़ता चलन अब उनके भविष्य पर भारी पड़ने लगा है। कानपुर समेत प्रदेश के कई शहरों में एक हजार से ज्यादा उन बच्चों को एनसीसी में दाखिले के समय स्क्रीनिंग में बाहर कर दिया गया, जिन्होंने टैटू बनवा रखा था।
सेना के अलावा अन्य फोर्सों में जाने की तैयारी कर रहे युवाओं को इस बात का ध्यान रखना होगा कि उन्हें टैटू बनवा लिया तो उनकी आगे की राह मुश्किल हो सकती है। टैटू या गुदना लगवाना भारी पड़ सकता है।
सरकारी नौकरियों में इस तरह की दिक्कतें आने लगी हैं। दयानंद कॉलेज की एएनओ कैप्टन शुभ्रा राजपूत ने बताया कि उनके पास दो कैंडिडेट आए थे, जिन्हें फिजिकल में टैटू होने पर बाहर का रास्ता दिखाया गया। अब दाखिले के समय ही ओरिएंटेशन कार्यक्रम के जरिये पहले ही बता दिया जाता है कि शरीर में अगर टैटू गुदवाया है तो ऐसे लोग अप्लाई ही न करें। इस वजह से अब ऐसे युवा आवेदन नहीं कर रहे हैं।
टैटू बनवाने से पहले जान लें नियम
टैटू होने पर सरकारी नौकरी में पूरी तरह से मना नहीं है। कुछ जरूरी नियम और शर्तें जरूर हैं, जिन्हें नजरअंदाज किया तो परेशान हो सकते हैं। भारतीय सेना में भर्ती के दौरान भी टैटू को लेकर सख्त नियम हैं। एनसीसी से जुड़े अधिकारियों की मानें तो प्रदेश में करीब एक हजार बच्चों को एनसीसी में दाखिले के समय स्क्रीनिंग में ही बाहर कर दिया गया।
खबरें और भी
विगत दो वर्षों की बात करें तो यह आंकड़ा दो हजार से पार हो गया। जानकारी के अभाव में भी कई युवाओं ने ऐसा कर लिया। एनसीसी में दाखिले के समय बहुत से युवाओं को बाहर किया गया तो उन्हें यह समझ में आया कि एनसीसी और सेना में टैटू गुदवाने पर इंट्री नहीं मिलती।
क्यों नहीं लेते सरकारी नौकरियों में टैटू वाले लोग
सरकारी नौकरी करने वाला कर्मचारी सरकार और सिस्टम का चेहरा माना जाता है, इसलिए उनसे एक अनुशासित, संतुलित और प्रोफेशनल छवि की उम्मीद की जाती है। खुले में दिखने वाले टैटू कई बार गलत मतलब निकालने की वजह बन सकते हैं।
खासतौर पर ऐसे टैटू जिनमें धार्मिक, राजनीतिक या आपत्तिजनक चिन्ह या शब्द हों, उन्हें सख्ती से रोका जाता है। हालांकि, हर विभाग के अपने नियम हैं। टीचिंग और क्लेरिकल नौकरी के पदों पर टैटू आमतौर पर तब स्वीकार किया जाता है, जब वह कपड़ों के अंदर ढका रहता हो।
आर्मी, नेवी और एयरफोर्स
सेना में नियम सबसे ज्यादा सख्त हैं। टैटू सिर्फ हाथ के अंदरूनी हिस्से में, कोहनी से नीचे या हथेली के पीछे तक सीमित होना चाहिए। चेहरा, गर्दन या आपत्तिजनक टैटू होने पर सीधी अयोग्यता हो सकती है। पुलिस और सीएपीएफ (बीएसएफ, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी) में छोटे और सामान्य टैटू की इजाजत है लेकिन वे यूनिफॉर्म पहनने पर दिखना नहीं चाहिए।
यह भी पढ़ें- 2047 तक यूपी के 20% हिस्से पर होगी हरियाली, योगी सरकार ने बनाया मास्टर प्लान
कलकत्ता हाईकोर्ट का फैसला
जीडी कांस्टेबल भर्ती से जुड़ा एक मामला चर्चा में रहा था। उम्मीदवार झोंटू सरकार को टैटू की वजह से मेडिकल में अनफिट करार दिया गया था। बाद में उन्होंने टैटू रिमूवल सर्जरी करवाई और कोर्ट पहुंचे। सुनवाई में सामने आया कि टैटू हटवाने की प्रक्रिया उन्होंने डिटेल्ड मेडिकल के बाद और रिव्यू मेडिकल से पहले करवाई थी। इस पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने साफ कहा कि ऐसा करना नियमों के खिलाफ है, इसलिए उम्मीदवार को राहत नहीं दी गई।
जो छात्र भविष्य में सेना में करियर बनाना चाहते हैं, उन्हें टैटू बनवाने से बचना चाहिए। टैटू बनवाने का बढ़ता शौक सेना में भर्ती की राह में बड़ी बाधा बनता है। युवा फैशन के चलते हाथ, गर्दन, बाजू, कंधे या अन्य हिस्सों पर टैटू बनवा लेते हैं। बाद में जब वे सेना भर्ती की तैयारी करते हैं, तब उन्हें पता चलता है कि टैटू उनके चयन में बाधा बनते हैं।
कैप्टन शुभ्रा सक्सेना, एएनओ, दयानंद गर्ल्स पीजी कॉलेज