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    बांदा में पांच साल की मासूम से पान-मसाला मंगाने के बहाने की थी दरिंदगी, दुष्कर्मी को मिली फांसी की सजा

    Updated: Tue, 06 Jan 2026 03:39 PM (IST)

    बांदा की पाक्सो कोर्ट ने कालिंजर में पांच साल की बच्ची से दुष्कर्म के दोषी को फांसी की सजा सुनाई है। 25 जुलाई को पड़ोसी अमित रैकवार ने बच्ची से दरिंदग ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. चार्जशीट के 56 दिनों में पूरी की गई कार्रवाई, मासूम के साथ की थी बर्बरता

    2. हाथ तोड़ा व जीभ काट कर फेंकी थी नाली में, मासूम के पिता ने दर्ज कराया था मुकदमा 

    जागरण संवाददाता, बांदा। पान मसाला मंगाने के बहाने अपने घर बुलाकर पांच वर्षीय मासूम के साथ दुष्कर्म करने के दोषी को अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है। दुष्कर्मी ने अमानवीयता करते हुए मासूम की जीभ काटकर नाली में फेंक दी थी। साथ ही उसका एक हाथ तोड़ते हुए उसे लहूलुहान कर दिया था। मासूम का आज भी कानपुर के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है।

    करीब 160 दिनों में ही विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट प्रदीप कुमार मिश्रा की अदालत ने मंगलवार को यह फैसला सुनाया है। उन्होंने फैसला सुनाते हुए दोषी अमित कुमार रैकवार को को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। न्यायालय ने दोषी को अन्य धाराओं में सजा के अलावा 25 हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया गया है। घटना पांच माह पुरानी है चार्जशीट दाखिल होने के बाद 56 दिन में पूरी सुनवाई की प्रक्रिया चली है।

    मामला कालिंजर कस्बे के एक मुहल्ले का है। बीते 25 जुलाई को घर के बाहर खेल रही एक मासूम को मुहल्ले के ही एक युवक ने दुकान से पान मसाला मंगाने के बहाने बुलाया था। युवक ने मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म किया था। इस दौरान उसने बच्ची के साथ बर्बरता करते हुए उसका बायां हाथ तोड़ दिया था। जीभ काटकर नाली में फेंक दी थी।

    बच्ची के स्वजन जब उसे खोजते- खोजते अमित के घर पहुंचे तो वह दीवार फांद कर मौके से भाग गया था। पीड़ित के पिता ने 26 जुलाई को कालिंजर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। मामले में विवेचक दीपेंद्र सिंह ने 12 नवंबर को अदालत में आरोप पत्र दाखिल किए थे। इसके बाद मुकदमे की सुनवाई तेजी से आगे बढ़ी।

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    मंगलवार को न्यायालय में जिला शासकीय अधिवक्ता विजय बहादुर सिंह परिहार और जिला शासकीय अधिवक्ता पाक्सो कमल सिंह गौतम ने अदालत के समक्ष अपनी दलीलें रखीं। कहा कि यह मामला समाज को झकझोर करने वाला है। इस जघन्य अपराध में दोषी को क्षमा नहीं किया जाए।

    अभियोजन पक्ष ने मेडिकल रिपोर्ट, गवाहों के बयान और विवेचक की जांच को अदालत में मजबूत साक्ष्यों के साथ पेश किया। अदालत ने अभियोजन की दलीलों से सहमति जताते हुए अपने फैसले में कहा कि इस जघन्य अपराध के लिए केवल मृत्युदंड ही उचित दंड है, जिससे समाज में भय और न्याय दोनों का संदेश जाएगा।

    अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपित अमित कुमार रैकवार को दोषी ठहराया और फांसी की सजा सुना दी। घटना के दौरान दोषी के स्वजन भी कोर्ट में मौजूद थे। फांसी की सजा होते ही उनमें सन्नाटा पसर गया। दूसरी ओर पीड़ित परिवार और गांव के लोगों ने अदालत के इस फैसले को न्याय की जीत बताया।