IAS बनो या Teacher..सबसे पहले एक्सपर्ट मां बनो, राज्यपाल बोली, ससुराल में यूट्यूब देख खाना बनाना सीखना सही नहीं
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने सीएसजेएमयू के दीक्षा समारोह में छात्राओं से आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ 'कुशल मां' बनने की सलाह दी, ताकि वे शादी के बाद यूट्य ...और पढ़ें

एचबीटीयू स्थित सभागार में आयोजित दीक्षा समारोह को संबोधित करतीं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल। जागरण
HighLights
सीएसजेएमयू के 41वें दीक्षा समारोह में कुलाधिपति का छात्र-छात्राओं से आह्वान
1,07,713 विद्यार्थियों को मिली डिग्री, पदकों में बेटियों का रहा दबदबा
96 पदकों में 82 प्रतिशत छात्राओं के नाम, 92 शोधार्थियों को पीएचडी
जागरण संवाददाता, कानपुर। डिग्री हासिल करना मंजिल नहीं, समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी निभाने की शुरुआत है। अपने ज्ञान को समाज और देश के हित में पूरी तरह लगा दीजिए। पढ़ाई के साथ कोई हुनर अवश्य सीखिए, क्योंकि विकसित भारत का आधार आत्मनिर्भर युवा ही होंगे। छात्राएं आईएएस या टीचर बनने से पहले कुशल मां बनना सीखें। ये बातें राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदी बेन पटेल ने गुरुवार को छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के 41वें दीक्षा समारोह में कहीं।
वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई प्रेक्षागृह में आयोजित समारोह में मेधा का सबसे बड़ा सम्मान बेटियों के नाम रहा। विश्वविद्यालय ने 1,07,713 विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की, जबकि 96 पदकों में 82 प्रतिशत से अधिक छात्राओं ने अपने नाम किए। 92 शोधार्थियों को पीएचडी उपाधि दी गई।
उन्होंने छात्राओं से कहा कि वे आत्मनिर्भर जरूर बनें लेकिन उसके पहले एक्सपर्ट मां बनें। जब बेटियां शादी के बाद ससुराल जाती हैं, तो यूट्यूब से देखकर डिश बनाती हैं, ये सही नहीं है। उनको खाना बनाना आना चाहिए। समारोह में एआइसीटीई के चेयरमैन एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश कुमार सिंह मुख्य अतिथि, जबकि उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय और उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक और प्रति कुलपति प्रो. सुधीर अवस्थी ने अतिथियों का स्वागत किया।
राज्यपाल ने कहा, विश्वविद्यालय केवल डिग्री बांटने वाले संस्थान नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की प्रयोगशालाएं हैं। विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वह अपने ज्ञान का उपयोग समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए करें। उन्होंने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि बीते पांच वर्षों में परिसर में छात्र संख्या में 131.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। युवाओं को संदेश देते हुए कहा, जिस प्रकार हम कपड़ों को निचोड़कर पानी अलग करते हैं, ठीक उसी तरह समाज में जहां भी जाएं, अपने ज्ञान को देश सेवा में पूरी तरह निचोड़ दें।
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व्यक्ति के चरित्र में दिखती है असली शिक्षा : प्रो. योगेश सिंह
मुख्य अतिथि एआइसीटीई के चेयरमैन प्रो. योगेश कुमार सिंह ने कहा कि डिग्रियां शिक्षा के खर्च की रसीद हैं, असली शिक्षा व्यक्ति के चरित्र में दिखाई देती है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि जीवन में केवल दर्शक नहीं, बल्कि नेतृत्वकर्ता बनें। विदेश में शिक्षा और अनुभव लेने के बाद भारत लौटकर देश के विकास में योगदान दें, क्योंकि विकसित भारत-2047 का सपना युवाओं के हाथों से ही साकार होगा। वर्तमान चार ट्रिलियन डालर की अर्थव्यवस्था को 25 ट्रिलियन डालर तक पहुंचाने में युवाओं और विश्वविद्यालयों की अहम भूमिका होगी। प्रो. सिंह ने मार्टिन लूथर किंग जूनियर का संदेश दोहराते हुए कहा कि यदि दौड़ नहीं सकते तो चलें, यदि चल नहीं सकते तो रेंगें लेकिन हर हाल में आगे बढ़ते रहें।
माता-पिता और गुरु का ऋण कभी नहीं उतरता
उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि विद्यार्थियों की सफलता के पीछे माता-पिता का त्याग और गुरुजनों का मार्गदर्शन होता है। उन्होंने युवाओं से राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए अपनी प्रतिभा का उपयोग करने का आह्वान किया। वहीं राज्यमंत्री रजनी तिवारी ने कहा कि सफलता का कोई शार्टकट नहीं होता। कठिन परिश्रम ही हर उपलब्धि का आधार है।
कुलपति ने गिनाईं उपलब्धियां
कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने विश्वविद्यालय की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए कहा कि सीएसजेएमयू अब पारंपरिक शिक्षा से आगे बढ़कर नवाचार, अनुसंधान, स्टार्टअप, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, वैश्विक सहयोग और रोजगारपरक शिक्षा के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है।
बेटियों ने फिर मारी बाजी
इस वर्ष कुल 51 विद्यार्थियों को 96 पदक प्रदान किए गए। इनमें 42 छात्राएं और नौ छात्र रहे। कुलाधिपति, कुलपति और प्रायोजित सभी श्रेणियों के पदकों में छात्राओं का दबदबा रहा। 92 शोधार्थियों को पीएचडी उपाधि दी गई, जिनमें 50 छात्राएं और 42 छात्र रहे। 1,07,713 विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई, जिनमें 57,348 छात्राएं और 50,365 छात्र शामिल हैं।
डी.लिट से सम्मानित हुए अंचल पी. बिजलानी
समारोह में कच्छ चर्म शिल्प के संरक्षण और विकास में उल्लेखनीय योगदान के लिए शिल्पाचार्य अंचल पी. बिजलानी को डाक्टर आफ लेटर्स (डीलिट) की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। कुलाधिपति ने डिजिटल हस्ताक्षर कर विद्यार्थियों की डिग्रियां और अंकपत्र डिजीलाकर पर भी जारी किए।
नई पहल भी हुई शुरू
दीक्षा समारोह के दौरान सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए किशोरियों के निश्शुल्क टीकाकरण अभियान की शुरुआत की गई। विश्वविद्यालय की कई नई परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी हुआ। उत्कृष्ट कार्य करने वाले चार शिक्षकों को सम्मानित किया गया।