2 बार फेल, फिर भी नहीं मानी हार… तीसरी बार में अक्षांश बने ARTO, PCS सफलता की कहानी कर देगी मोटिवेट
बिल्हौर के बीबीपुर गांव के अक्षांश कटियार ने यूपीपीसीएस परीक्षा में तीसरी बार में सफलता हासिल कर एआरटीओ पद पर 11वीं रैंक प्राप्त की है। उनकी इस उपलब्ध ...और पढ़ें

अक्षांश कटियार। स्वजन
HighLights
अक्षांश कटियार ने यूपीपीसीएस में एआरटीओ पद पर 11वीं रैंक पाई।
दो बार असफल होने के बाद तीसरे प्रयास में मिली सफलता।
कड़ी मेहनत, अनुशासन और स्पष्ट लक्ष्य से मिली कामयाबी।
संवाद सहयोगी, बिल्हौर। बीबीपुर गांव के होनहार युवक अक्षांश कटियार ने यूपीपीसीएस परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर न सिर्फ अपने परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। उन्हें एआरटीओ (सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी) पद पर 11वीं रैंक प्राप्त हुई है। इस उपलब्धि की खबर मिलते ही गांव में खुशी की लहर दौड़ गई और परिजनों के साथ-साथ शुभचिंतकों ने घर पहुंचकर बधाई दी।
अक्षांश के पिता राजेश कुमार कटियार, जो किसान होने के साथ-साथ ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े हैं, ने बताया कि बेटे की इस सफलता के पीछे उसकी कड़ी मेहनत, अनुशासन और लगन है। उन्होंने कहा कि अक्षांश शुरू से ही पढ़ाई में मेधावी रहा है और उसने हमेशा अपने लक्ष्य को लेकर गंभीरता दिखाई। माता राम किशोरी ने कहा कि बेटे की सफलता उनके लिए गर्व का क्षण है और उसकी मेहनत रंग लाई है।
अक्षांश के बड़े भाई सचिन कटियार, जो लोक निर्माण विभाग में लेखाधिकारी के पद पर कार्यरत हैं, ने बताया कि अक्षांश ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा बिल्हौर इंटर कालेज से प्राप्त की, जहां उसने इंटरमीडिएट प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण किया। इसके बाद उसने कानपुर स्थित पीपीएन कालेज से वर्ष 2020 में बीए की डिग्री हासिल की। उच्च शिक्षा के लिए वह दिल्ली गया, जहां उसने जेएनयू से अंतरराष्ट्रीय संबंध विषय में एमए किया।
स्वजन के अनुसार, दिल्ली में रहते हुए अक्षांश ने यूपीपीसीएस परीक्षा की तैयारी पूरे समर्पण के साथ की। उसने सीमित संसाधनों के बावजूद कभी हिम्मत नहीं हारी और लगातार तीन प्रयासों में मेहनत जारी रखी। तीसरे प्रयास में उसे यह सफलता मिली, जो उसके धैर्य और आत्मविश्वास का परिणाम है।
अक्षांश ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, भाई-बहन और शिक्षकों को दिया। उसने कहा कि परिवार का सहयोग और मार्गदर्शन उसके लिए सबसे बड़ी प्रेरणा रहा। उसने युवाओं को संदेश दिया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो सफलता जरूर मिलती है। गांव के लोगों ने भी अक्षांश की इस उपलब्धि पर गर्व जताया है। ग्रामीणों का कहना है कि उसकी सफलता से क्षेत्र के अन्य युवाओं को भी प्रेरणा मिलेगी।