अमेरिका के नए टैरिफ से कानपुर के निर्यातकों को झटका, अब यूरोप और अन्य बाजारों की ओर रुख
अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर 10% अतिरिक्त सेक्शन-301 टैरिफ लगाने से कानपुर के निर्यातकों की चिंता बढ़ गई है, जिससे उत्पादों की लागत और प्रतिस्पर् ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
HighLights
अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाया।
कानपुर के निर्यातकों की लागत बढ़ी, प्रतिस्पर्धा कमजोर हुई।
निर्यातक अब यूरोपीय और अन्य बाजारों की तलाश में।
जागरण संवाददाता, कानपुर। अमेरिका द्वारा 24 जुलाई से भारतीय उत्पादों पर अतिरिक्त 10 प्रतिशत सेक्शन-301 टैरिफ (अनुचित व्यापारिक प्रथाओं या जबरन श्रम उत्पादों के खिलाफ अतिरिक्त शुल्क ) लागू किए जाने के बाद कानपुर के निर्यातकों की चिंता और बढ़ गई है।
यह अतिरिक्त शुल्क अधिकांश भारतीय उत्पादों पर पहले से लागू आयात शुल्क के ऊपर लगाया जाएगा। ऐसे में यदि किसी लेदर उत्पाद पर पहले 12.5 प्रतिशत आयात शुल्क लगता था तो अब अमेरिकी आयातक को करीब 22.5 प्रतिशत शुल्क चुकाना होगा। इसका सीधा असर भारतीय उत्पादों की कीमत और प्रतिस्पर्धा पर पड़ना तय है।
कानपुर के लेदर, सैडलरी, फुटवियर, स्पोर्ट्स गुड्स, इंजीनियरिंग उत्पाद, होजरी, रेडीमेड गारमेंट, रसायन और खाद्य उत्पादों के निर्यातकों का कहना है कि पिछले एक वर्ष से अमेरिकी बाजार में लगातार बढ़ते शुल्क के कारण कारोबार पहले ही दबाव में है।
अब नए टैरिफ से आर्डर प्रभावित होने और मुनाफा घटने की आशंका बढ़ गई है। अमेरिकी खरीदार बढ़ी हुई लागत का बोझ भारतीय कंपनियों पर डाल रहे हैं। कई मामलों में कीमत कम करने का दबाव बनाया जा रहा है, जिससे लाभांश घट रहा है।
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यही वजह है कि अब शहर के कई निर्यातक यूरोप, ब्रिटेन, आस्ट्रेलिया, खाड़ी देशों और लैटिन अमेरिकी बाजारों में नए ग्राहकों की तलाश तेज कर रहे हैं, ताकि अमेरिकी बाजार पर निर्भरता कम की जा सके।
कानपुर के लेदर उद्योग से जुड़े उद्यमियों का मानना है कि भारत और ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) तथा यूरोपीय संघ के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौता ऐसे समय में राहत का माध्यम बन सकते हैं। यदि इन बाजारों में शुल्क रियायत मिलती है तो अमेरिकी बाजार में होने वाले नुकसान की कुछ भरपाई संभव होगी।
पिछले एक वर्ष में अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर लगाए गए प्रमुख टैरिफ
अवधि अमेरिकी कदम प्रभाव
| अवधि | अमेरिकी कदम | प्रभाव |
| मार्च 2026 | कई भारतीय उत्पादों पर 25 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ | लेदर, इंजीनियरिंग व अन्य क्षेत्रों पर असर |
| जून 2026 | कुछ श्रेणियों में शुल्क बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया गया | अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पाद महंगे हुए |
| 24 जुलाई 2026 | अधिकांश भारतीय उत्पादों पर अतिरिक्त 10 प्रतिशत टैरिफ | लगभग सभी प्रमुख निर्यात क्षेत्रों पर नया दबाव |
अमेरिका की ओर से अतिरिक्त टैरिफ लगाए जाने का असर लेदर उत्पादों पर पड़ना तय है। इससे अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की कीमत बढ़ेगी और निर्यात बढ़ने की संभावनाएं कमजोर होंगी।
-आलोक श्रीवास्तव , सहायक निदेशक फियो
खरीदारों की ओर से कीमत घटाने का दबाव पिछले साल से ही बनाया जा रहा है। सस्ता उत्पाद बेचने के लिए उद्यमियों को श्रम लागत घटाने का दबाव बढ़ेगा। अमेरिका को चाहिए था कि वह श्रम कानूनों का पालन करने के लिए अतिरिक्त छूट देता।-असद के इराकी, पूर्व क्षेत्रीय अध्यक्ष सीएलई