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    यमुना नदी किनारे 5 किलोमीटर तक बिछीं हजारों मृत मछलियां, ग्रामीणों में फैली दहशत

    Updated: Wed, 22 Jul 2026 10:19 AM (GMT+05:30)

    कानपुर देहात में यमुना नदी के करीब पांच किलोमीटर लंबे हिस्से में हजारों मछलियां मृत मिलीं, जिससे पानी की गुणवत्ता पर गंभीर चिंता बढ़ गई है। ...और पढ़ें

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    जागरण संवाददाता, कानपुर देहात। यमुना नदी के करीब पांच किलोमीटर लंबे हिस्से में मंगलवार की सुबह हजारों मछलियां मृत मिली। नयापुरवा से लेकर मनकी पक्के घाट, क्योटरा और आसपास के क्षेत्रों तक नदी के किनारों पर बड़ी संख्या में मरी हुई मछलियां पड़ी मिलीं। 

    कई मछलियां पानी में तड़पती भी दिखाई दीं। घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण नदी किनारे पहुंच गए। कुछ लोग मृत मछलियां अपने घर भी ले गए। घटना के बाद यमुना के पानी की गुणवत्ता को लेकर लोगों में चिंता बढ़ गई है।

    प्रारंभिक तौर पर बारिश के साथ ऊपरी क्षेत्रों से प्रदूषित या रसायनयुक्त पानी आने तथा पानी में बीओडी (बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड) बढ़ने को इसकी वजह माना जा रहा है। हालांकि मत्स्य विभाग और प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने जांच रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट होने की बात कही है।

    मंगलवार सुबह यमुना किनारे बसे गांवों के लोग जब नदी की ओर पहुंचे तो नदी किनारे बड़ी संख्या में मृत मछलियां देखकर हैरान रह गए। शुरुआत में लोगों को लगा कि यह घटना केवल उनके गांव तक सीमित है, लेकिन बाद में पता चला कि नयापुरवा, मनकी पक्के घाट, क्योटरा और आसपास के कई गांवों के सामने भी यही स्थिति है।

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    करीब पांच किलोमीटर लंबे क्षेत्र में अलग-अलग स्थानों पर हजारों मछलियां मृत अवस्था में पड़ी थी। ग्रामीण सुरेश कुमार, अवधेश कुमार, वीरेंद्र निषाद, भीकम निषाद और प्रहलाद निषाद ने बताया कि उन्होंने पहले कभी इतनी बड़ी संख्या में मछलियों की मौत नहीं देखी।

    उनका कहना है कि बरसात के दिनों में जब नदी में गंदा पानी आता था तो ऑक्सीजन की कमी के कारण मछलियां तड़पते हुए किनारे आ जाती थी और लोग उन्हें पकड़ लेते थे, लेकिन इस बार मछलियां सीधे मरकर किनारे लग रही हैं।

    नदी का पानी सामान्य दिखाई दे रहा है, फिर भी लगातार मछलियों के मरने से लोग चिंतित हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से पानी की जांच कराकर वास्तविक कारण सार्वजनिक करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।

    जिला कार्यकारी अधिकारी (मत्स्य) रमाकांत निरंजन ने बताया कि यमुना के ऊपरी क्षेत्रों से प्रदूषित अथवा केमिकलयुक्त पानी आने की आशंका है। इससे पानी में बीओडी का स्तर बढ़ सकता है, जिसके कारण घुलित ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है और मछलियों की मौत हो सकती है।

    उन्होंने कहा कि विभाग ने मामले की जानकारी लेकर जांच शुरू कर दी है और रिपोर्ट मिलने के बाद ही कारण की पुष्टि की जाएगी। वहीं क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी मनोज चौरसिया ने बताया कि बारिश के दौरान नदी में सिल्ट और विभिन्न प्रकार के अपशिष्ट पदार्थ भी बहकर आ जाते हैं, जिससे जलीय जीव प्रभावित होते हैं।

    उन्होंने कहा कि जहां मछलियां मरी हैं, वहां आसपास कोई औद्योगिक इकाई नहीं है। ऐसे में संभावना है कि ऊपरी क्षेत्रों से प्रदूषित पानी बहकर आया हो और नदी के किनारों पर कम जलस्तर व पानी के ठहराव के कारण हानिकारक तत्वों का प्रभाव बढ़ गया हो।

    उन्होंने बताया कि पानी के नमूनों की जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मछलियों की मौत का वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेगा। तब तक विभाग पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।

    क्या होता है बीओडी

    बीओडी यह बताता है कि पानी में मौजूद जैविक (सड़ने-गलने वाले) पदार्थों को विघटित करने में सूक्ष्मजीवों को कितनी ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। बीओडी जितना अधिक होगा, पानी में ऑक्सीजन की खपत उतनी ही ज्यादा होगी, इससे घुलित ऑक्सीजन का स्तर घट जाता है।

    ऐसे में मछलियों और अन्य जलीय जीवों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिससे वे तड़पने लगते हैं और बड़ी संख्या में उनकी मौत हो सकती है। स्वच्छ नदी के पानी में बीओडी तीन एमएल लीटर से कम होना अच्छा माना जाता है। इससे अधिक होने पर जल गुणवत्ता प्रभावित होने लगती है।

    मछली खाने में बरतें सावधानी

    प्रदूषित पानी या किसी रसायन के कारण मछलियां मरीं हैं, तो उनके शरीर में विषैले पदार्थ हो सकते हैं। इन्हें खाने से उल्टी, दस्त, पेट दर्द, चक्कर या गंभीर विषाक्तता हो सकती है। ऐसे में ग्रामीणों को परहेज करना चाहिए।

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