कासगंज-एटा रेल परियोजना: 428 करोड़ की लागत, 29 KM रेल लाइन की लंबाई; 20 गांवों की जमीन होगी अधिग्रहीत
दशकों से लंबित कासगंज-एटा रेल परियोजना अगस्त से धरातल पर उतरेगी, जिसके लिए 29 किमी लंबी रेल लाइन बिछाई जाएगी और 20 गांवों की 116 हेक्टेयर भूमि अधिग्रह ...और पढ़ें

कासगंज जंक्शन।
HighLights
लगभग 29 किमी लंबी रेल लाइन, 428 करोड़ रुपये लागत।
20 गांवों की 116 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण शुरू।
अगस्त माह से निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद।
जागरण संवाददाता, कासगंज। दशकों से लंबित कासगंज-एटा रेल लाइन परियोजना अब धरातल पर उतरती दिखाई दे रही है। जिला प्रशासन की ओर से गजट प्रकाशित किया जा चुका है। गजट प्रकाशित होते ही भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो गई। रेलवे और प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार अगस्त माह से निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है।
आजादी के बाद से कासगंज और एटा के लोगों की रेल विस्तार बहुप्रतीक्षित मांग रही। यह परियोजना क्षेत्र के विकास में मील का पत्थर साबित होगी।
428 करोड़ रुपये की लागत से बिछेगी लगभग 29 किलोमीटर लंबी रेल लाइन
रेल लाइन बनने के बाद एटा से कासगंज के माध्यम से बरेली, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर दिशा के रेल नेटवर्क से बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। 29 किलोमीटर लंबी इस नई रेल लाइन के निर्माण के लिए दोनों जिलों के 20 गांवों की लगभग 116 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहीत की जाएगी। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद किसानों को मुआवजे की राशि पारदर्शी डिजिटल व्यवस्था के तहत सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाएगी।
20 गांवों की 116 हेक्टेयर भूमि होगी अधिग्रहीत, बनेंगे तीन नए रेलवे स्टेशन
कासगंज में अधिग्रहण के लिए गजट प्रकाशित हो गया है। एटा का होने वाला है। यह रेल मार्ग एटा रेलवे स्टेशन से शुरू होकर नदरई के निकट मथुरा-कासगंज-बरेली रेलखंड से जुड़ेगा। इस मार्ग पर तीन नए रेलवे स्टेशन विकसित किए जाएंगे। इनमें रसूलपुर गढ़ा स्टेशन कासगंज जिले में न्यौराई और अचलपुर स्टेशन एटा जिले में प्रस्तावित हैं।
वर्ष 2025 में परियोजना को स्वीकृति मिलने के बाद अब इसकी अनुमानित लागत बढ़कर 428 करोड़ रुपये पहुंच गई है। इसमें रेलवे ट्रैक, पुल, विद्युत व्यवस्था और अन्य आधारभूत संरचनाओं का निर्माण किया जाएगा।
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परियोजना से बेहतर होगी कासगंज-एटा कनेक्टिविटी
कासगंज के लोगों के लिए एटा तक रेल सुविधा मिल जाएगी। कासगंज के लोगों को एटा होते हुए आगरा तक रूट मिलेगा। बरेली की ओर से आगरा जाने के लिए यह रेल विस्तार बेहतर विकल्प साबित होगा।रेल लाइन बनने के बाद सबसे ज्यादा फायदा एटा जिले के यात्रियों को होगा। उन्हें कासगंज के रास्ते बरेली और उत्तराखंड की दिशा में बेहतर रेल सुविधा मिलेगी।
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व्यापार और उद्योग को मिलेगा बढ़ावा
रेल संपर्क मजबूत होने से कृषि उत्पादों और औद्योगिक सामान के परिवहन में सुविधा होगी। इससे व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलेगी। नई रेल लाइन से समय और खर्च दोनों की बचत होगी। निर्माण कार्य के दौरान प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। नए स्टेशन विकसित होने के बाद स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेगा।
कासगंज-एटा जिले के इन गांवों में होगा भूमि अधिग्रहण
कासगंज जिले के बांकनेर, नसरतपुर, बरेला और कुरामई, एटा जिले के एटा देहात, नगला फरीद, न्यौराई, हिम्मतनगर बझेड़ा, अचलपुर, मोहम्मदपुर, गोबरा, रसूलपुर गढ़ौली, नगला किसिया, रारपट्टी, बीरपुर, श्योराई, बुरहानाबाद, नगला श्याम, बढ़ौली और यादगारपुर।
जल्द दौड़ेगी उम्मीदों की रेल
कासगंज- एटा रेल लाइन परियोजना केवल एक रेलवे ट्रैक नहीं, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इस क्षेत्र के विकास का नया अध्याय मानी जा रही है। वर्षों से अधूरी पड़ी इस योजना में निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद ने जिले के लोगों में नई आशा जगा दी है। प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होते ही अगस्त से मशीनों की आवाज सुनाई देने की उम्मीद है।
'कासगंज-एटा रेल लाइन परियोजना का काफी समय से इंतजार था। दोनों जिलों के बीच रेल सेवा शुरू हो जाने के बाद व्यापारिक दृष्टिकोण से दोनों जिलों के व्यापारी लाभांवित होंगे। व्यापारिक गतिविधिया बढेंगी। इस परियोजना के लिए केंद्र सरकार के प्रति आभार प्रकट करते हैं। - योगेश चंद्र गौड़, व्यापारी'
'क्षेत्रीय विकास की दिशा में कासगंज-एटा का रेल यात्रा से जुड़ाव महती आवश्यकता थी। रेल परिवहन की सेवाओं का लाभ मिलेगा। इसके साथ ही दोनों जिलों का क्षेत्रीय विकास होगा। यहीं नहीं व्यवसायिक दृष्टिकोण से भी विकास की तमाम राह खुलेंगी। सभी को लाभ होगा। रमेश चंद्र अग्रवाल, व्यापारी'
एटा-कासगंज रेल लाइन के लिए सारी प्रक्रिया लगभग पूर्ण हो चुकी है। इसके लिए 100 करोड़ रुपये का बजट कासगंज-एटा जिला प्रशासन को दिया जा चुका है। इस बजट से किसानों को अधिग्रहीत भूमि का मुआवजा दिया जाएगा।
पंकज कुमार सिंह, वरिष्ठ मंडल इंजीनियर लखनऊ मंडल