अब हर तीन महीने में होगी परिषदीय स्कूलों के बच्चों की परख, शिक्षा विभाग ने लागू की नई त्रैमासिक टेस्ट व्यवस्था
कौशांबी में परिषदीय विद्यालयों के छात्रों की शैक्षिक गुणवत्ता सुधारने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने हर तीन माह में त्रैमासिक टेस्ट की नई व्यवस्था लागू ...और पढ़ें

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HighLights
हर तीन माह में छात्रों का त्रैमासिक टेस्ट होगा।
शैक्षिक गुणवत्ता सुधारने को बेसिक शिक्षा विभाग की पहल।
कमजोर छात्रों के लिए सुधारात्मक शिक्षण योजना बनेगी।
जागरण संवाददाता, कौशांबी। परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले नौनिहालों की शैक्षिक गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने नई व्यवस्था लागू की है। अब विद्यार्थियों का हर तीन माह में त्रैमासिक टेस्ट लिया जाएगा। इसकी शुरुआत इसी माह से होगी। इस परीक्षा के माध्यम से बच्चों के सीखने के स्तर का आकलन किया जाएगा और उसी के आधार पर आगे की शैक्षणिक रणनीति तय होगी।
परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले नौनिहालों की शैक्षिक गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने वार्षिक कैलेंडर के साथ नई कार्ययोजना तैयार की है। इस पहल का उद्देश्य केवल परीक्षा कराना नहीं, बल्कि प्रत्येक विद्यार्थी की सीखने की क्षमता का वास्तविक मूल्यांकन करना है।
टेस्ट के परिणामों का विश्लेषण कर यह पता लगाया जाएगा कि किन विषयों और किन दक्षताओं में बच्चों को अतिरिक्त सहयोग की आवश्यकता है। इसके आधार पर शिक्षकों को सुधारात्मक शिक्षण (रिमेडियल टीचिंग) की योजना तैयार करनी होगी, ताकि कमजोर विद्यार्थियों को समय रहते आवश्यक सहायता मिल सके।
नई व्यवस्था के तहत शैक्षणिक सत्र में नियमित अंतराल पर होने वाले त्रैमासिक आकलन से विद्यार्थियों की प्रगति पर लगातार नजर रखी जाएगी। इससे शिक्षकों को भी अपनी शिक्षण पद्धति में आवश्यक बदलाव करने का अवसर मिलेगा।
विभाग का मानना है कि केवल वार्षिक परीक्षा के आधार पर बच्चों की शैक्षिक प्रगति का सही आकलन संभव नहीं है, इसलिए निरंतर मूल्यांकन की व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जा रहा है।
विद्यालयवार तैयार की जाएगी रिपोर्ट
अगस्त में होने वाले पहले त्रैमासिक टेस्ट के बाद विद्यालयवार और छात्रवार रिपोर्ट तैयार की जाएगी। परीक्षा परिणामों के आधार पर यह तय किया जाएगा कि किस विद्यालय, कक्षा अथवा विद्यार्थी को किस विषय में अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।
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इसके बाद शिक्षक विषयवार और छात्रवार सुधारात्मक शिक्षण योजना तैयार करेंगे। इसके आधार पर आगामी तीन माह के लिए विषयवार सुधार योजना बनाई जाएगी। इससे परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की सीखने की गुणवत्ता में सुधार होगा और बुनियादी भाषा एवं गणितीय दक्षताओं को भी मजबूती मिलेगी।
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40 प्रतिशत पठन-पाठन पर तैयार होगा प्रश्न पत्र
पहली त्रैमासिक परीक्षा का प्रश्नपत्र अब तक कराए गए लगभग 40 प्रतिशत पठन-पाठन के आधार पर तैयार कराया जाएगा। प्रश्न ऐसे होंगे, जिनसे बच्चों की विषयगत समझ, लेखन क्षमता और सीखने की प्रगति का सही मूल्यांकन हो सके।
यह प्रश्नपत्र विद्यालय स्तर पर तैयार कराए जाएंगे। नियमित मूल्यांकन से विद्यार्थियों की कमजोरियों की समय रहते पहचान हो सकेगी और उनमें आवश्यक सुधार कराया जा सकेगा।
अगस्त में होने वाले पहले त्रैमासिक टेस्ट के बाद प्रत्येक विद्यालय की रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके आधार पर आगामी तीन माह की शैक्षणिक रणनीति बनाई जाएगी। जिन विद्यार्थियों का प्रदर्शन अपेक्षा से कम रहेगा, उनके लिए विशेष कक्षाएं और सुधारात्मक गतिविधियां संचालित की जाएंगी। शिक्षकों को समयबद्ध ढंग से पाठ्यक्रम पूरा कराने के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षण पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं।
डॉ. कमलेंद्र कुशवाहा, बीएसए