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कौशांबी पटाखा फैक्ट्री में धमाके के बाद मलबे में जिंदगी की तलाश, देर रात तक गरजती रहीं मशीनें

Updated: Tue, 01 Sep 2026 12:33 AM (IST)

कौशांबी के मनौरी में अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट से कई घर जमींदोज हो गए, जिसमें कई लोगों ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर।

प्रतीकात्मक तस्वीर।

HighLights

  1. कौशांबी के मनौरी में अवैध पटाखा फैक्ट्री में भीषण धमाका

  2. कई घर जमींदोज, कई लोगों की मौत व घायल

  3. राहत कार्य जारी, सुरक्षा एजेंसियां कर रहीं जांच

आदर्श श्रीवास्तव, कौशांबी। मनौरी की आबादी में अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट के बाद सोमवार को जिंदगी और मौत के बीच जंग मलबे के ढेर पर लड़ी गई। कुछ घंटे पहले तक जिन घरों में बच्चों की आवाजें गूंज रही थीं, जहां चूल्हे जल रहे थे और परिवार त्योहार की तैयारियों में जुटे थे, वहां अब ईंट, सरिया और टिनशेड के टुकड़े बिखरे थे।

धमाका इतना भयावह था कि दो फैक्ट्रियों समेत कई मकान पलभर में जमींदोज हो गए। मलबे के नीचे अपनों के दबे होने की आशंका ने स्वजन की सांसें रोक दीं। धमाके की सूचना मिलते ही डीएम डा. अमित पाल और एसपी सत्यनारायण प्रजापत, पुलिस, फायर ब्रिगेड व स्वास्थ्य टीम के साथ मौके पर पहुंचे।

चारों तरफ चीख-पुकार और धुएं के बीच यह तय करना भी मुश्किल था कि रेस्क्यू कहां से शुरू किया जाए। भीड़ से बार-बार आवाज उठती रही-‘साहब, इस घर का मलबा हटवाइए, दो मंजिला मकान था, इसमें लोग दबे हैं।’ इसके बाद राहत और बचाव दल ने एक-एक मलबे को हटाना शुरू किया।

विभिन्न नगर पंचायतों से 10 बैकहो लोडर मौके पर बुलाए गए। मशीनों की गरज के बीच मजदूर और राहतकर्मी ईंट-सरिया हटाते रहे। मलबे का ढेर थोड़ा भी कम होता तो वहां खड़े स्वजन की निगाहें उसी जगह टिक जातीं, शायद कोई अपना जिंदा मिल जाए। हर बार मलबे के नीचे से कोई शरीर या घायल निकलता तो एंबुलेंस का सायरन उम्मीद और मातम दोनों को साथ लेकर दौड़ पड़ता।

गया प्रसाद साहू का घर भी इस तबाही की चपेट में आया। वह मौके पर पहुंचे तो माथा पीटते हुए फफक पड़े। बोले, ‘पूरा परिवार खत्म हो गया।’ उनके घर का मलबा हटाया गया तो पत्नी घायल हालत में मिलीं, लेकिन चार बच्चों की जिंदगी नहीं बचाई जा सकी। रेलकर्मी विक्रम भी भोजन करने घर आए थे।

धमाके में विक्रम, उनकी पत्नी अंजू, बेटी अंशू और चार वर्षीय बेटे की मौत हो गई। बड़ी बेटी संजना सामान लेने किराना दुकान गई थी, इसलिए सुरक्षित बच गई।

त्योहार मनाने मायके आई थीं
पनतरवा निवासी रूपा पंचायती राज विभाग में सफाई कर्मी हैं। मनौरी निवासी मंजीत सिंह का घर उनका मायका है। रक्षाबंधन पर वह बेटी पीहू और उर्वशी के साथ भाई के घर आई थीं। सोमवार सुबह ड्यूटी जाने के लिए सड़क पर साधन का इंतजार कर रही थीं कि तभी विस्फोट हो गया।

पीहू और उर्वशी जिंदगी के लिए जूझ रही हैं, जबकि रूपा के भाई मंजीत के दो बच्चों की मौत ने त्योहार की खुशियों को मातम में बदल दिया।

लोग दबे थे, मदद के लिए पुलिस का इंतजार
बमरौली निवासी अरविंद कुमार ने आरोप लगाया कि हादसे के करीब एक घंटे बाद भी कुछ लोग मलबे में तड़प रहे थे। वह सूचना मिलने के करीब 20 मिनट में मनौरी पहुंचे। उनका कहना है कि पुलिस और एंबुलेंस मौके पर थी, लेकिन ग्रामीण खुद मलबे से लोगों को निकाल रहे थे।

मदद मांगने पर पुलिसकर्मी आदेश आने का इंतजार करते रहे। एसआरएन अस्पताल में अरविंद की आंखों से आंसू थम नहीं रहे थे। उनके ननिहाल का घर भी इस हादसे में तबाह हो गया।

घायलों से मिले डिप्टी सीएम
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय पहुंचकर घायलों का हाल जाना। उन्होंने प्राचार्य डॉ. एके वर्मा को घायलों का बेहतर उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। हादसे पर दुख जताते हुए उन्होंने कहा कि जनहानि अत्यंत पीड़ादायक है और उनकी संवेदनाएं शोक संतप्त परिवारों के साथ हैं।

सिर्फ पटाखे का विस्फोट या कुछ और?
अवैध पटाखा फैक्ट्री की तीव्रता व भयावहता देख ग्रामीणों को यकीन नहीं हो रहा कि यह सिर्फ पटाखे का विस्फोट है या कुछ और? गांव वाले ही नहीं अस्पताल पहुंचे कुछ घायलों के रिश्तेदारों ने भी सवाल उठाए। पुलिस के साथ ही सुरक्षा एजेंसियां भी अपने-अपने स्तर पर जांच कर रही हैं।

घटना स्थल से एकत्र किए गए अवशेष को फारेंसिक लैब भेजकर जांच कराई जाएगी, ताकि कोई नया तथ्य सामने आने पर जांच का दायरा बढ़ाया जा सके। मनौरी निवासी मदन ने कहा कि एक साल पहले दूसरी पटाखा फैक्ट्री में धमाका हुआ था, लेकिन तब की स्थिति इतनी विकराल नहीं थी।

ग्रामीणों ने आशंका जताई कि पटाखा फैक्ट्री में किसी और तरह का भी विस्फोटक पदार्थ हो सकता है। घटनास्थल पर मौजूद किसी ने फैक्ट्री में कई क्विंटल बारुद का ढेर लगाने तो किसी ने आरडीएक्स रखने तक की चर्चा कर डाली। एक महिला ने कहा कि आदिल उसके परिवार से जुड़े लोग कई बार चोरी-छिपे भी सामान लाते थे।

हालांकि, पुलिस अधिकारी प्रारंभिक छानबीन के आधार पर पटाखा विस्फोट ही मान रहे हैं। जबकि आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस), इंटेलिजेंस ब्यूरो (आइबी), स्थानीय अभिसूचना इकाई (एलआइयू) और दूसरी सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े अधिकारी, कर्मचारी घटनास्थल पर पहुंचकर अपने-अपने स्तर पर इनपुट जुटाए।

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