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    कुशीनगर में उपचार के दौरान मरी बालिका, आयुष्मान सारथी एप ने कर दिया जिंदा

    Updated: Wed, 03 Jun 2026 08:55 AM (IST)

    गोरखपुर में उपचार के दौरान 14 वर्षीय बालिका की मृत्यु हो गई, लेकिन दो दिन बाद आयुष्मान सारथी ऐप ने उसके सकुशल घर लौटने का संदेश भेजा। इस घटना ने आयुष् ...और पढ़ें

    पिता घर लेकर आए थे शव, दो दिन मिली बेटी के सकुशल घर पहुंचने की बधाई। जागरण

    पिता घर लेकर आए थे शव, दो दिन मिली बेटी के सकुशल घर पहुंचने की बधाई। जागरण

    HighLights

    1. गोरखपुर में 14 वर्षीय बालिका की उपचार के दौरान मृत्यु।

    2. आयुष्मान सारथी ऐप ने मृत बालिका को जिंदा बताया।

    3. अस्पताल की रिपोर्टिंग और आयुष्मान कार्ड पर सवाल।

    जागरण संवाददाता, कुशीनगर। एक गरीब पिता की 14 वर्षीय बेटी उपचार के दौरान मर गई। गम के बोझ के साथ शव लेकर घर आए बेबस पिता ने दाह संस्कार भी कर दिया। अभी घर में मातम छाया ही था कि दो दिन बाद आयुष्मान सारथी एप ने जिंदा कर संदेश भेजा कि, उपचार के बाद बेटी के सकुशल घर पहुंचने पर आपको बधाई।

    बेटी की मौत पर उसको जिंदा कर पिता को मिली इस बधाई ने एक बार फिर पूरे परिवार को दर्द बढ़ा दिया। बालिका की असामयिक मौत का मजाक उड़ा डाला। इस पूरा घटनाक्रम ने आयुष्मान कार्ड से होने वाले उपचार के खेल को खोल कर रख दिया है, क्योंकि, संदेश में बालिका को पांच दिन भर्ती दिखाया गया है, जबकि भर्ती होने के 24 घंटे के अंदर ही उसकी मौत हो गई थी। पीड़ित ने डीएम, एसपी तथा सीएमओ गोरखपुर को शिकायती पत्र देकर जांच कर कार्रवाई की मांग की है।

    कसया तहसील के गांव सुमही के रहने वाले जयप्रकाश प्रजापति ने अपनी 14 वर्षीय पुत्री राजनंदनी को पित्त के थैली में पथरी का आपरेशन कराने के लिए आयुष्मान कार्ड से गोरखपुर के शीतल केयर हास्पिटल में बीते 23 मई को भर्ती कराया था।

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    आरोप है कि 24 मई की रात्रि आपरेशन के दौरान उसकी मौत हो गई। आपरेशन के कई घंटों बाद में अस्पताल के स्टाफ से अपने बेटी का हाल जानने का प्रयास किया तो बताया गया कि आपरेशन चल रहा है। इसके बाद वह किसी तरह ओपीडी में घुसा तो देखा कि बेटी मृत पड़ी है। बेटी का शव लेकर घर चला आया और दाह संस्कार कर दिया।

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    बताया कि, 27 मई को मेरे नंबर पर आयुष्मान सारथी से मैसेज आया कि आपकी बेटी उपचार के बाद सकुशल घर पहुंच गई, इसके लिए बधाई। मैसेज में मेरी बेटी को पांच दिन अस्पताल में भर्ती होना दिखाया गया और 27 मई को डिस्चार्ज दिखाया गया था। जबकि मैं अपने बेटी के शव को भर्ती के दूसरे दिन घर ले कर आ गया था। पीड़ित ने इसकी शिकायत करते हुए जांच कर कार्रवाई की मांग की है।