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कुशीनगर: नेपाल बाढ़ के बाद नारायणी नदी में मिले शव, चेहरे और सामान से नहीं हो सकी पहचान; सुरक्षित किए गए DNA सैंपल

Published: Wed, 02 Sep 2026 04:52 AM (IST)

नारायणी नदी में नेपाल बाढ़ से बहकर आए अज्ञात शवों की पहचान चेहरे या सामान से नहीं हो पा रही ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर।

प्रतीकात्मक तस्वीर।

HighLights

  1. नेपाल बाढ़ से नारायणी में बहकर आए अज्ञात शव।

  2. चेहरे या सामान से पहचान असंभव, डीएनए सैंपल सुरक्षित।

  3. लापता परिजनों की उम्मीद, भविष्य में मिलान संभव।

अजय कुमार शुक्ल, कुशीनगर। नारायणी की उफनती धारा नेपाल की त्रासदी से सिर्फ मलबा और शव ही नहीं बहाकर लाई, अपने पीछे ऐसे परिवार भी छोड़ गई जो आज भी किसी दरवाजे पर लौटने वाले अपने की राह देख रहे हैं। नदी किनारे मिले शवों की पहचान चेहरे से नहीं हो सकी।

कपड़े और शरीर के साथ मिले सामान भी किसी परिवार तक पहुंचने का रास्ता नहीं खोल सके। अब उम्मीद का आखिरी सिरा डीएनए से जुड़ गया है। नेपाल में जल प्रलय के बाद नारायणी की धारा में बहकर कुशीनगर और महाराजगंज पहुंचे अज्ञात शवों की पहचान के लिए पोस्टमार्टम के बाद डीएनए सैंपल सुरक्षित किए जा रहे हैं।

अब इन नमूनों को महज चिकित्सकीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि उन परिवारों की उम्मीद का दस्तावेज माना जा रहा है, जो अपने लापता स्वजन की तलाश में किसी खबर का इंतजार कर रहे हैं। कुशीनगर और महाराजगंज में मिले नौ शवों का पोस्टमार्टम होने के बाद डीएनए सैंपल सुरक्षित किया जा चुका है।

इसके अलावा मिले नौ अज्ञात शवों की भी पहचान नहीं हो सकी है। भविष्य में यदि नेपाल या भारत में किसी व्यक्ति के लापता होने का दावा सामने आता है और उसके स्वजन का डीएनए सैंपल उपलब्ध कराया जाता है, तो सुरक्षित नमूनों से उसका मिलान कराया जा सकेगा।

चेहरा मिट गया, पहचान का सूत्र बचा है

नदी की बाढ़ में घंटों बहने के बाद शवों की स्थिति ऐसी हो सकती है कि सामान्य पहचान मुश्किल हो जाए। ऐसे में कपड़े, आभूषण या साथ मिले सामान से पहचान की उम्मीद भी खत्म हो जाती है।

डीएनए ऐसी स्थिति में भी व्यक्ति की जैविक पहचान का सबसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक आधार बनता है। यही वजह है कि नारायणी के किनारे मिले शवों के लिए डीएनए सैंपल अब उस कहानी का अगला अध्याय है, जिसका पहला पन्ना नेपाल की त्रासदी में किसी के लापता होने से शुरू हुआ था।

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