बाढ़ के कारण दुधवा से आबादी की ओर बढ़ रहे बाघ और तेंदुए, ग्रामीणों में दहशत
दुधवा टाइगर रिजर्व के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी भरने से वन्यजीव, खासकर बाघ और तेंदुए, आबादी वाले क्षेत्रों की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे ग्रामीणों में दहशत है।

दुधवा जंगल के बाहरी इलाके में चहलकदमी करता बाघ। फाइल फोटो
HighLights
दुधवा में बाढ़ से निचले इलाकों में वन्यजीवों का आवास प्रभावित।
बाघ और तेंदुए सुरक्षित ठिकानों की तलाश में गांवों की ओर।
बिशेनपुरी गांव में बाघ के हमले से महिला घायल, दहशत।
जागरण संवाददाता, पलियाकलां (लखीमपुर)। दुधवा टाइगर रिजर्व के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी भरने से वन्यजीवों के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। जंगल के भीतर जलभराव और सुरक्षित ठिकानों की तलाश में बाघ और तेंदुए आबादी वाले क्षेत्रों की ओर बढ़ने लगे हैं। बाघ और तेंदुओं की संख्या में हुई वृद्धि के बीच जंगल से सटे गांवों में इनकी दस्तक ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। शाम ढलते ही ग्रामीण घरों से बाहर निकलने में डरने लगे हैं।
बिशेनपुरी गांव में बाघ द्वारा एक महिला को घायल करने की ऐसी घटना सामने आ चुकी है जिसने ग्रामीणों को झकझोर दिया है। दुधवा टाइगर रिजर्व के निचले इलाकों में करीब 20 दिनों से पानी भरा हुआ है। जंगल में पानी भरे होने की वजह से बाघ व तेंदुओं का आवास स्थल प्रभावित हुआ है। इससे बाध इधर उधर भटकने पर मजबूर हैं।
कुछ दिन पहले एक बाघ बिशेनपुरी गांव में एक महिला के घर के सामने आकर बैठ गया था। महिला ने जैसे ही घर का दरवाजा खोला बाघ ने उस पर हमला कर दिया था। हमले में महिला घायल हो गई थी। घटना के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल है और ग्रामीण अपने घरों के आसपास विशेष सतर्कता बरत रहे हैं।
जंगल में पानी, तो आबादी की ओर बढ़ रहे वन्यजीव
दुधवा के निचले इलाकों में बारिश और जलभराव के कारण जंगल का बड़ा हिस्सा पानी से प्रभावित है। ऐसे में वन्यजीव ऊंचे और सुरक्षित स्थानों की तलाश में जंगल के किनारों तथा आबादी के आसपास पहुंच रहे हैं। बाघ और तेंदुए जैसे शिकारी वन्यजीव भोजन और सुरक्षित ठिकाने की तलाश में खेतों, गन्ने के बीच तथा गांवों के आसपास दिखाई दे रहे हैं।
ग्रामीणों की बढ़ी चिंता
बिशेनपुरी की घटना के बाद ग्रामीणों में यह डर और गहरा गया है कि पानी बढ़ने के साथ बाघ और तेंदुए आबादी की ओर और अधिक रुख कर सकते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग को ऐसे संवेदनशील गांवों में निगरानी बढ़ाने के साथ ही लोगों को सतर्क रहने के लिए जागरूक करना चाहिए।
क्या कहते है अधिकारी
दुधवा का जंगल वन्यजीवों के लिए सुरक्षित आश्रय है, लेकिन बारिश के दौरान प्राकृतिक परिस्थितियां बदलने पर जंगल और आबादी के बीच वन्यजीवों की आवाजाही बढ़ जाती है। ऐसे समय में ग्रामीणों की सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है। ग्रामीमों को सतर्क रहना चाहिए।
