मिट्टी का घर... दो वक्त की रोटी के लिए भी संघर्ष; मजदूर के बेटे उमाशंकर ने यूपी बोर्ड परीक्षा में रचा इतिहास
लखीमपुर खीरी के धौरहरा में एक मजदूर के बेटे उमाशंकर ने इंटरमीडिएट परीक्षा में जिले में टॉप कर गरीबी के मिथक को तोड़ा है। ...और पढ़ें

इंटर के जिला टॉपर उमाशंकर ने तोड़ा मिथक, गांजर का नाम किया रोशन।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
दीपेंद्र मिश्र, धौरहरा (लखीमपुर)। जिस घर में दो वक्त की रोटी के लिए पसीना बहाना मजबूरी हो, जहां नदी हर साल जमीन और सपनों को काट ले जाती हो… वहां से भी सपने उड़ान भर सकते हैं, अगर हौसला जिंदा हो। रामनगर बगहा गांव के उमाशंकर ने यह साबित कर दिया है।
मजदूरी कर परिवार चलाने वाले पिता भगौती और मां कामना ने हालात के आगे घुटने टेकने के बजाय बेटे की पढ़ाई को चुना। न ट्यूशन, न कोचिंग, न कोई संसाधन… फिर भी उमाशंकर ने इंटरमीडिएट परीक्षा में पांचों विषयों में विशेष योग्यता के साथ जिले में टॉप कर दिया।
परिवार की कहानी संघर्ष से भरी है। एक बीघा जमीन नदी में समा चुकी है, कच्चा घर भी कटान के खतरे में है। पेट पालने के लिए मां-बाप खेतों में मजदूरी करते हैं और उसी कमाई से बेटे की फीस भरते हैं। उमाशंकर भी पढ़ाई के साथ खेतों में हाथ बंटाता रहा। उसकी प्रतिभा को पहचानते हुए नैनापुर के चेतना मेमोरियल इंटर कॉलेज के प्रबंधक इंजीनियर धनीराम मौर्य ने उसे हर संभव सहारा दिया। जरूरत पड़ने पर आर्थिक मदद की, यहां तक कि मोबाइल फोन भी दिलाया, ताकि पढ़ाई में कोई बाधा न आए।
जब आया रिजल्ट… खेत में दरांती चला रहे थे माता-पिता
गुरुवार को जब यूपी बोर्ड का रिजल्ट आया, उस वक्त भगौती और कामना अपने गांव से 30 किलोमीटर दूर सुजईकुंडा में गेहूं काट रहे थे। उन्हें बेटे की कामयाबी की भनक तक नहीं थी। मीडिया के लोग जब उन्हें खोजते हुए खेत तक पहुंचे और बेटे के जिला टॉप करने की खबर दी, तब जाकर उन्हें अहसास हुआ कि उनके बेटे ने कुछ बड़ा कर दिखाया है।
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प्रधानी के दावेदार ओमनारायण शुक्ल मिठाई लेकर आए, तब माहौल खुशियों में बदल गया। भगौती की आंखों में चमक थी, लेकिन शब्द कम बस इतना ही कह पाए, सब भगवान की कृपा है। यह कहानी सिर्फ एक टापर की नहीं, बल्कि उस विश्वास की है, जो कहता है कि अगर हौसले मजबूत हों, तो गरीबी भी रास्ता नहीं रोक सकती।