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    लखीमपुर में यूरिया के लिए फूटा किसानों का गुस्सा, समिति पर हंगामा; हाईवे पर लगाया जाम

    Updated: Mon, 13 Jul 2026 02:00 PM (IST)

    लखीमपुर खीरी में किसानों ने यूरिया वितरण में देरी को लेकर पुरवा सांवल सिंह साधन सहकारी समिति पर हंगामा किया और हाईवे जाम कर दिया। ...और पढ़ें

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    जागरण संवाददाता, लखीमपुर। पुरवा सांवल सिंह साधन सहकारी समिति पर सोमवार को यूरिया वितरण शुरू होने की उम्मीद लेकर पहुंचे किसानों का सब्र जवाब दे गया। समिति खुलते ही बड़ी संख्या में किसान पहुंच गए, लेकिन वितरण शुरू होने के बजाय कर्मचारी कार्यालय बंद कर अंदर बैठ गए।

    इससे नाराज किसानों ने हंगामा करते हुए लखीमपुर-सीतापुर हाईवे की एक लेन पर जाम लगा दिया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और किसानों को समझाकर जाम खुलवाया। इसके बाद टोकन व्यवस्था के तहत यूरिया वितरण शुरू कराया गया।

    किसानों का कहना था कि समिति पर गुरुवार को ही यूरिया की खेप पहुंच चुकी थी। इसी सूचना के आधार पर सोमवार सुबह से ही किसान खाद लेने के लिए पहुंच गए थे।

    आरोप है कि समिति का ताला खुलने के बाद कर्मचारियों ने वितरण शुरू करने के बजाय कार्यालय बंद कर लिया और बताया कि एमडी के आने के बाद ही खाद दी जाएगी। इससे नाराज किसानों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया और कुछ ही देर में हाईवे की एक लेन पर जाम लगा दिया। देखते ही देखते सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग गई।

    जाम की सूचना मिलते ही चौकी प्रभारी डिम्पल सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने पहले हाईवे से किसानों को हटाकर यातायात बहाल कराया, फिर सभी किसानों को समिति परिसर में भेजकर लाइन लगवाई। इसके बाद नए टोकन बांटे गए और वितरण प्रक्रिया शुरू कराई गई।

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    समिति के एमडी सचिन चौधरी ने बताया कि समिति पर यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता है और खाद का कोई संकट नहीं है। उन्होंने बताया कि सोमवार सुबह फिंगर लगाने वाली बायोमेट्रिक मशीन खराब हो गई थी, जिसे ठीक कराने कर्मचारी लखीमपुर गया था। मशीन ठीक होने के बाद ही वितरण शुरू कराया जा सका।

    उन्होंने बताया कि पिछले सप्ताह बुधवार तक यूरिया का वितरण हुआ था और गुरुवार को नई खेप समिति पर पहुंच गई थी। मशीन में तकनीकी खराबी के कारण कुछ समय के लिए वितरण प्रभावित हुआ, लेकिन बाद में पहले पुराने टोकन धारकों को और फिर नए टोकन जारी कर किसानों को यूरिया उपलब्ध कराई गई।

    घटना के दौरान समिति परिसर और हाईवे पर काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। किसानों का कहना था कि यदि समय पर सही जानकारी दी जाती और वितरण व्यवस्था पारदर्शी रहती तो जाम और हंगामे जैसी स्थिति पैदा नहीं होती।

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