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ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में जुड़वां बहनें दिखाएंगी जलवा, समापन समारोह में देंगी भरतनाट्यम की प्रस्तुति

Published: Sat, 01 Aug 2026 11:47 PM (IST)Updated: Sun, 02 Aug 2026 12:50 AM (IST)

लखीमपुर खीरी की चिन्मोयी और शची बिस्वास ग्लासगो में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के समापन समारोह में भरतनाट्यम प्रस्तुत करेंगी।

संशोधित:: ग्लासगो में भारतीय संस्कृति का मान बढ़ाएंगी खीरी की दो बेटियां

संशोधित:: ग्लासगो में भारतीय संस्कृति का मान बढ़ाएंगी खीरी की दो बेटियां

HighLights

  1. ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 समापन समारोह में प्रस्तुति।

  2. लखीमपुर खीरी की चिन्मोयी और शची बिस्वास करेंगी भरतनाट्यम।

  3. श्यामक डावर की टीम के साथ अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय संस्कृति।

हरविंद सिंह, लखीमपुर। खीरी जिले की दो बेटियां अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय संस्कृति की छटा बिखेरने जा रही हैं। वह भी कॉमनवेन्थ जैसे खेलों के समापन समारोह में।

मोहम्मदी के ग्राम रवींद्रनगर निवासी डाॅ. चितरंजन बिस्वास की प्रतिभाशाली बेटियां चिन्मोयी बिस्वास और शची बिस्वास दो अगस्त को स्काटलैंड के ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के भव्य समापन समारोह में भरतनाट्यम की प्रस्तुति देंगी।

दोनों कलाकार देश के प्रसिद्ध कोरियोग्राफर श्यामक डावर और उनकी टीम के निर्देशन में विश्वभर के दर्शकों के सामने भारतीय शास्त्रीय नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति देंगी।

कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे वैश्विक आयोजन के समापन समारोह में प्रस्तुति का अवसर मिलना किसी भी कलाकार के लिए बड़ी उपलब्धि माना जाता है। ऐसे में लखीमपुर खीरी के एक छोटे से गांव की दो बेटियों का इस मंच तक पहुंचना पूरे जिले ही नहीं, उत्तर प्रदेश और देश के लिए एक गर्व का विषय बन गया है।

चिन्मोयी और शची अपनी प्रस्तुति के माध्यम से भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, शास्त्रीय नृत्य परंपरा और भारतीय सभ्यता की विविधता को दुनिया के सामने प्रस्तुत करेंगी। उनकी प्रस्तुति करोड़ों दर्शकों तक पहुंचेगी, जिससे भारतीय संस्कृति की वैश्विक पहचान और मजबूत होगी। दोनों बेटियों की इस उपलब्धि से परिवार में उत्साह का माहौल है।

उनके पिता डॉ. चितरंजन बिस्वास ने दैनिक जागरण से बातचीत में कहा कि बेटियों का कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे प्रतिष्ठित आयोजन तक पहुंचना उनके लिए किसी बड़े सपने के सच होने जैसा है।

उन्होंने कहा कि वर्षों की मेहनत, अनुशासन और कला के प्रति समर्पण का यह परिणाम है। देश और विदेश से लगातार बधाइयों के संदेश मिल रहे हैं, जिससे पूरा परिवार भावुक और गौरवान्वित महसूस कर रहा है। रवींद्रनगर सहित पूरे मोहम्मदी क्षेत्र में भी इस उपलब्धि को लेकर खुशी का माहौल है।

प्रतिभा बड़े शहर की मोहताज नहीं 

स्थानीय लोगों का कहना है कि गांव की बेटियों ने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर की मोहताज नहीं होती। सही मार्गदर्शन, निरंतर अभ्यास और दृढ़ संकल्प के दम पर गांव की बेटियां भी विश्व मंच तक अपनी पहचान बना सकती हैं।

चिन्मोयी और शची की यह उपलब्धि जिले के उभरते कलाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी और आने वाली पीढ़ी को अपने सपनों को साकार करने का विश्वास भी देगी।

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