लखीमपुर में शारदा ने पसारे पांव, 12 बीघा धान की फसल नदी में समाई, अब घरों और स्कूल पर मंडरा रहा खतरा
लखीमपुर के फूलबेहड़ क्षेत्र में शारदा नदी का कटान भयावह हो गया है, जिससे 12 बीघा धान की फसल बह गई है और कई घर व प्राथमिक विद्यालय खतरे में हैं। ग्रामी ...और पढ़ें

लखीमपुर में नदी के पानी से खतरे में स्कूल।
HighLights
लखीमपुर के फूलबेहड़ में शारदा नदी का कटान भयावह।
12 बीघा धान की खड़ी फसल नदी में समाई।
कई घर और प्राथमिक विद्यालय पर भी खतरा।
संवाद सूत्र, फूलबेहड़ (लखीमपुर)। निघासन तहसील के फूलबेहड़ क्षेत्र स्थित ग्रंट नंबर-12 गांव में शारदा नदी का कटान लगातार भयावह होता जा रहा है। नदी अब किसानों की मेहनत ही नहीं, बल्कि उनके भविष्य को भी निगल रही है। अब तक करीब 12 बीघा धान की खड़ी फसल नदी में समा चुकी है, जबकि कई मकानों और गांव के प्राथमिक विद्यालय पर भी खतरा मंडरा रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि यदि समय रहते कटान रोकने के इंतजाम किए गए होते तो आज यह नौबत नहीं आती। कटान में मंगल, कमलेश, रामपाल और श्रवण की लगभग डेढ़-डेढ़ बीघा धान की फसल बह गई है। वहीं अमर सिंह और रामलाडिले की दो-दो बीघा तथा राकेश और दिलीप की एक-एक बीघा धान की फसल भी शारदा की भेंट चढ़ गई।
कटान की रफ्तार इतनी तेज है कि अब गांव के घर भी नदी के निशाने पर आ गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि हर दिन नदी खेतों के साथ आबादी की ओर बढ़ रही है, जिससे पलायन जैसी स्थिति बनने लगी है।
सबसे चिंताजनक स्थिति गांव के सरकारी विद्यालय की है। नदी का कटान विद्यालय तक पहुंच चुका है। विद्यालय परिसर में लगे कई पेड़ पहले ही नदी में समा चुके हैं, जबकि स्कूल का किचन और परिसर का लगभग एक-तिहाई हिस्सा भी कटकर नदी में गिर गया है। यदि कटान नहीं रुका तो विद्यालय भवन पर भी खतरा गहरा सकता है।
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पलियाकलां बनबसा बैराज से शारदा नदी में पानी का डिस्चार्ज कम होने के चलते शारदा नदी का जलस्तर घट गया है। नदी खतरे के निशान से 30 सेमी नीचे पहुंच गई है। हालांकि बाढ़ के कारण जिन खेतों में पानी भर गया था वहां पर बाढ़ का पानी जमा हुआ है। शारदा नदी का जलस्तर लगातार घट रहा है।
शुक्रवार को नदी में पानी का डिस्चार्ज लगभग 50 हजार क्यूसिक था जिससे जलस्तर घटकर काफी नीचे पहुंच गया है। शारदा पुल पर नदी का लेबल आज दिन में 154.290 सेमी दर्ज किया गया है जो खतरे के निशान से 30 सेमी नीचे हैं। कल नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 12 सेमी नीचे था। उधर बाढ़ का पानी जिन गांवों के खेतों में भर गया था वहीं पर जमा हुआ है। गन्ने की फसल बाढ़ के पानी से प्रभावित होने लगा है।