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    आपसी संघर्ष या कुछ और? लखीमपुर में बाघ की मौत की गुत्थी उलझी, जांच टीम की पड़ताल जारी

    Updated: Sun, 05 Jul 2026 12:57 PM (IST)

    लखीमपुर खीरी की महेशपुर रेंज में मिले बाघ के शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण सेप्टीसीमिया बताया गया है, लेकिन उसके अगले पैरों में गंभीर चोटो ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. महेशपुर रेंज में मिले बाघ के शव पर जांच जारी।

    2. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण सेप्टीसीमिया बताया गया।

    3. बाघ के अगले पैरों में गंभीर चोटों की वजह तलाशी जा रही है।

    संवाद सूत्र, लखीमपुर। महेशपुर रेंज में 29 जून को मिले बाघ के शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद भी उसकी मौत को लेकर कई सवाल अनुत्तरित हैं। रिपोर्ट में मौत का कारण सेप्टीसीमिया बताया गया है, लेकिन बाघ के अगले दोनों पैरों में मिली गंभीर चोटों ने वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है।

    सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर ये चोटें कैसे लगीं। क्या बाघ किसी दूसरे बाघ से हुए क्षेत्रीय संघर्ष में घायल हुआ था या फिर इसके पीछे कोई अन्य कारण था? इसी रहस्यसे पर्दा उठाने के लिए तीन वरिष्ठ आईएफएस अधिकारियों की जांच समिति गठित की गई है।

    बाघ का शव महेशपुर रेंज के गांव उदयपुर के पास गन्ने के खेतों के बीच चक मार्ग पर मिला था। पोस्टमार्टम के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि बाघ की मौत सेप्टीसीमिया के कारण हुई, यानी शरीर में संक्रमण फैल जाने से उसकी जान गई। हालांकि जांच में यह भी सामने आया कि बाघ के अगले दोनों पैरों में चोट के निशान थे। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी बाघ को समय पर उपचार न मिले तो चोटों में संक्रमण फैलने से सेप्टीसीमिया हो सकता है। ऐसे में यह जानना जरूरी हो गया है कि इन चोटों की वास्तविक वजह क्या थी।

    इस मामले में अभी किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी

    हालांकि मामले की गंभीरता को देखते हुए अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक डॉ. रेनू सिंह के निर्देश पर तीन आईएफएस अधिकारियों की जांच समिति बनाई गई है। समिति में दक्षिण खीरी वन प्रभाग के पूर्व प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) समीर कुमार, दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के पूर्व डीएफओ नवीन खंडेलवाल तथा डीएफओ तापस मिहिर को शामिल किया गया है।

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    समिति घटनास्थल, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, उपलब्ध साक्ष्यों और अन्य तथ्यों का परीक्षण कर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी। अधिकारियों का कहना है कि दुधवा परिक्षेत्र में बाघों के बीच क्षेत्रीय वर्चस्व को लेकर संघर्ष की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। कई बार ऐसे संघर्ष में बाघ गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं।

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    हालांकि इस मामले में अभी किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बाघ के पैरों में चोटें आपसी संघर्ष का परिणाम थीं या किसी अन्य वजह से लगी थीं। फिलहाल पूरे मामले पर वन विभाग की नजर बनी हुई है और सभी को जांच रिपोर्ट का इंतजार है, जिससे बाघ की मौत के पीछे की असली वजह सामने आ सके।

    पोस्टमार्टम रिपोर्ट से या स्पष्ट हो गया है कि बाघ की मौत सेफ्टी सीमिया से हुई है, लेकिन उसके अगले पैरों में चोट कैसे आई यह अभी जांच का विषय है। जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक कुछ भी कहना उचित नहीं है।

                                                                                तापस मिहिर, डीएफओ दक्षिण खीरी