मझगईं वन रेंज में बाघिन की मौत की जांच करेगी SIT, रिपोर्ट के आधार पर होगी कार्रवाई
लखीमपुर खीरी के मझगईं वन रेंज में ट्रेंकुलाइजेशन के बाद बाघिन की मौत के मामले में नया मोड़ आया है। वन मंत्री अरुण कुमार सक्सेना ने घटना की गहन जांच के ...और पढ़ें

ट्रेंकुलाइजेशन के बाद बाघिन की हो गई थी मौत।

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जागरण संवाददाता, लखीमपुर। मझगईं वन रेंज में 23 जून को ट्रेंकुलाइज किए जाने के बाद हुई बाघिन की मौत के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए वन मंत्री अरुण कुमार सक्सेना ने पूरे प्रकरण की जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) से कराने के निर्देश दिए हैं।
बाघिन की मौत के कारणों को लेकर उठ रहे सवालों के बीच गठित एसआईटी घटनास्थल का निरीक्षण कर सभी तथ्यों की गहन पड़ताल करेगी।
वन विभाग के अनुसार एसआईटी में दुधवा टाइगर रिजर्व के पूर्व फील्ड डायरेक्टर एवं वर्तमान में कार्य योजना, अनुसंधान एवं प्रशिक्षण उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष ललित कुमार वर्मा, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (परियोजना) ए.पी. सिंह तथा नवाब वाजिद अली शाह प्राणी उद्यान, लखनऊ के वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. उत्कर्ष शुक्ला को शामिल किया गया है।
टीम घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ रेस्क्यू अभियान में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ करेगी। इसके अलावा ट्रेंकुलाइजेशन की पूरी प्रक्रिया, उपलब्ध दस्तावेज, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, चिकित्सकीय अभिलेख और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों का परीक्षण कर अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेगी।
मझगईं रेंज में लगातार मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं के बीच बाघिन को ट्रेंकुलाइज कर रेस्क्यू किया गया था, लेकिन कुछ ही समय बाद उसकी मौत हो गई। घटना के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली और रेस्क्यू प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठने लगे थे। इसी को देखते हुए वन मंत्रालय ने स्वतंत्र जांच कराने का निर्णय लिया है।
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दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर डॉ. एच. राजमोहन ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बाघिन के बीमार होने के संकेत मिले हैं, लेकिन अभी तक बिसरा जांच (विसरा रिपोर्ट) प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि मौत के वास्तविक कारणों का निष्कर्ष एसआईटी की जांच और बिसरा रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा।
वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि एसआईटी की जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि बाघिन की मौत प्राकृतिक बीमारी, ट्रेंकुलाइजेशन की जटिलताओं या किसी अन्य कारण से हुई। जांच रिपोर्ट के आधार पर यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ आगे की कार्रवाई भी की जा सकती है।