लखनऊ के एक ही थाना में 422 वकीलों के खिलाफ दर्ज हैं 236 आपराधिक मामले, हाई कोर्ट ने दिया जांच का आदेश
FIR Against Laywers in Lucknow: बार कौंसिल आफ यूपी सचिव को निर्देश दिया गया कि सभी 105 फर्जी डिग्रीधारक वकीलों के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी की एफआइआर ...और पढ़ें

लखनऊ में वकीलों पर लाठीचार्ज करती पुलिस, वकीलों ने सहयोगियों को बांटी लाठियां
HighLights
इलाहाबाद हाई कोर्ट में न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकलपीठ ने दिया आदेश
लखनऊ के वजीरगंज थाना में वकीलों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज
डिजिटल डेस्क, लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 4,157 वकीलों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं, जबकि 105 की डिग्री फर्जी मिली है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रदेश में वकीलों की आपराधिक पृष्ठभूमि से जुड़े गंभीर मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लेते हुए व्यापक जांच के आदेश दिए हैं और कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है। अनुपालन रिपोर्ट के लिए अगली सुनवाई तिथि 20 अगस्त तय की गई है।
राजधानी लखनऊ में 905 वकीलों के खिलाफ 575 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें अकेले वजीरगंज थाना में 422 वकीलों के खिलाफ 236 केस दर्ज हैं। कोर्ट ने कहा कि पुलिस महानिदेशक, अभियोजन निदेशालय और उत्तर प्रदेश बार कौंसिल की रिपोर्टों के अनुसार कुल 5,14,439 सक्रिय पंजीकृत वकीलों में 4,157 के खिलाफ 5,056 आपराधिक मामले दर्ज हैं। 418 वकील तीन या उससे अधिक आपराधिक मामलों में आरोपित हैं और 28 वकीलों पर 11 या उससे अधिक एफआइआर हैं। एक वकील के खिलाफ तो 46 प्राथमिकी मिली। सबसे ज्यादा प्रभावित लखनऊ का वजीरगंज थाना है, जहां 422 वकीलों के खिलाफ 236 एफआईआर हैं।
जिला न्यायालयों में लॉ ग्रैजुएट्स के संगठित गिरोह
कोर्ट ने कहा कि कई जिला न्यायालयों में लॉ ग्रैजुएट्स के संगठित गिरोह बन गए है, जो कोर्ट के फैसलों को जबरन लागू करवाने, अवैध रूप से कब्जे खाली करवाने और गवाहों व वादियों को डराने-धमकाने का काम कर रहे हैं। स्थानीय स्तर पर अपने प्रभाव के कारण ये निष्पक्ष सुनवाई में बाधा डालते हैं, इसलिए इनके मुकदमों को दूसरे जिले में ट्रांसफर करना अनिवार्य हो गया है। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर हुई सत्यापन प्रक्रिया में 105 वकीलों की डिग्री फर्जी मिली। 65 ने एलएलबी की डिग्री फर्जी बनवाई थी।
वकीलों के खिलाफ हाई कोर्ट के कड़े निर्देश
- गंभीर अपराधों (सात वर्ष से अधिक सजा वाले, वैवाहिक विवादों को छोड़कर) में आरोपित वकीलों के खिलाफ दर्ज मामले उनके गृह जिले से हटाकर सौ किलोमीटर के दायरे में स्थित किसी अन्य जिले में स्थानांतरित किए जाएंगे। जैसे आगरा के मथुरा में। यह व्यवस्था पहले पांच साल पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू होगी।
- बार कौंसिल आफ यूपी सचिव को निर्देश दिया गया कि सभी 105 फर्जी डिग्रीधारक वकीलों के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी की एफआइआर दर्ज कराएं। कोर्ट ने कहा है कि प्रवेश के समय वकीलों का कोई पुलिस सत्यापन नहीं किया जाता, जबकि डाक्टर, शिक्षक जैसे अन्य पेशों में अनिवार्य है।
- गंभीर अपराधों में आरोपित वकीलों की प्रैक्टिस, अनुशासनात्मक कार्यवाही/मुकदमे के निष्कर्ष तक स्थगित रहेगी। कहा, यह निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने का उपाय है।
- एफआइआर दर्ज होते या चार्जशीट दाखिल होते ही, संबंधित पुलिस अधिकारी को जिला जज, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट और बार कौंसिल सचिव को तुरंत सूचित करना होगा।
- हर जिले में डीएम, एसएसपी और जिला जज महीने में एक बार बैठक कर अनुपालन की समीक्षा करेंगे।
- यदि किसी वकील को निलंबित किया जाता है तो पक्षकार को नया वकील नियुक्त करने का उचित अवसर मिलेगा। जरूरत पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मुफ्त कानूनी सहायता देगा।
- विश्वविद्यालयों के साथ डिजिटल लिंकेज बनाकर डिग्री का रियल-टाइम सत्यापन, हर वकील से आपराधिक मामलों की वार्षिक शपथपत्र में जानकारी अनिवार्य करने तथा चुनावी प्रभाव से मुक्त स्थायी अनुशासन ट्रिब्यूनल के गठन का बार कौंसिल को सुझाव भी दिया गया है।