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    'एस्मा लगाया, फिर गुजरात में कभी नहीं हुआ आंदोलन...'; जंतर-मंतर प्रदर्शन पर बोलीं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल

    Updated: Sat, 01 Aug 2026 06:30 AM (IST)

    राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने गुजरात में 1998 के शिक्षक आंदोलन को एस्मा लगाकर समाप्त करने का अनुभव साझा किया और कहा कि तब से वहां कोई आंदोलन नहीं हुआ। ...और पढ़ें

    राज्यपाल आनंदीबेन पटेल

    राज्यपाल आनंदीबेन पटेल

    HighLights

    1. राज्यपाल ने गुजरात में 1998 के शिक्षक आंदोलन का जिक्र किया।

    2. एस्मा लगाने से गुजरात में आंदोलन समाप्त हुए, तब से नहीं हुए।

    3. नशे, दहेज, दुष्कर्म पर चिंता, 'नशा मुक्त युवा' अभियान पर जोर।

    जागरण संवाददाता, लखनऊ। राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने जंतर-मंतर पर आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि 1998 में वह गुजरात में शिक्षा मंत्री बनी थीं। तब शिक्षकों का आंदोलन हो रहा था। उन्होंने 'नो वर्क नो पे' के साथ अत्यावश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम (एस्मा) लगाया और तिथि बता दी कि इस दिन उपस्थित नहीं हुए तो नौकरी चली जाएगी। तब से आज तक गुजरात में एक भी आंदोलन नहीं हुआ।

    राज्यपाल ने कहा कि जंतर-मंतर के आंदोलन ने हमारी आंखें खोल दी हैं। हिम्मत से उन सब को आजादी मिल गई थी। प्रधानमंत्री को भी गालियां दी गईं। क्या परिणाम आया। नोटिस लग रही है न...। क्या यही उनका शिक्षा और संस्कार था? कई आंदोलन हुए हैं इस तरह। गुजरात में अध्यापकों का आंदोलन भुगत कर आई हूं। जब फरवरी का महीना आता तो 'हमारी मांगें पूरी करो' आंदोलन शुरू हो जाता था।

    इस तरह के आंदोलन में सरकारें चली जाती थीं, लेकिन जब उनके सामने ये विषय आया तो उन्होंने पहले ही मीटिंग कर ली। वे लोग 25 मांगें लेकर आए थे। उसमें से चार-पांच मांगों को अनुमति दे दी। फिर एस्मा लगाया तो आंदोलन खत्म हो गया। जिनकी समस्या है वे बैठें कुलपति-कुलसचिव, अधिकारियों व मंत्रियों के साथ और बात करें। हमारा का काम है देश को आगे ले जाने का। इसमें सबको सहयोग करना चाहिए।

    राज्यपाल ने समाज में बढ़ रही नशे की प्रवृत्ति, दहेज कुप्रथा व दुष्कर्म की घटनाओं पर चिंता जताई। कहा, इसके विरुद्ध जागरुकता अभियान चलाना चाहिए। बेटियों को उन परिवारों को विवाह से मना कर देना चाहिए, जो दहेज मांगते हैं। युवा दहेज न मांगें और न ही स्वीकार करें। नई पीढ़ी को समानता, सम्मान और सामाजिक न्याय के मूल्यों को अपनाकर इस कुप्रथा का अंत करना चाहिए।

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    राज्यपाल ने कहा कि छोटी-छोटी बच्चियों को पकड़कर एक साथ चार-पांच लोग दुष्कर्म करते हैं। क्या हो गया है समाज को? महिलाओं और बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना परिवार, शिक्षण संस्थानों और समाज की साझा जिम्मेदारी है।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दो अगस्त से 'नशा मुक्त युवा फार विकसित भारत संकल्प अभियान' शुरू कर रहे हैं। इसमें युवाओं को सक्रिय भागीदारी करनी चाहिए। 100 सप्ताह तक चलने वाला जनभागीदारी अभियान जागरुकता, सामुदायिक सहभागिता और युवाओं के नेतृत्व के माध्यम से नशामुक्त भारत के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।

    राज्यपाल ने एक बार फिर पात्रों को आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का लाभ दिलाने की अपील की। कहा कि प्रधानमंत्री चाहते हैं कि सभी को इस योजना का लाभ मिले। इसके लिए अभियान चलाना चाहिए। जिन पात्रों को इस योजना का लाभ नहीं मिला, उन्हें अवश्य योजना से जोड़ें।

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