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    भाजपा प्रदेश इकाई 11 जुलाई को बनाएगी चुनावी रूपरेखा, यूपी के नए पदाधिकारियों की होगी पहली बैठक

    Updated: Thu, 09 Jul 2026 09:32 PM (IST)

    भाजपा की उत्तर प्रदेश इकाई 11 जुलाई को चुनावी रूपरेखा तय करने के लिए अहम बैठक करेगी। इसमें नए पदाधिकारियों को जिम्मेदारियां सौंपने और क्षेत्रीय प्रभार ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. 11 जुलाई को भाजपा यूपी इकाई की अहम बैठक।

    2. चुनावी रूपरेखा तय होगी, नए पदाधिकारियों को होमवर्क।

    3. क्षेत्रीय एवं मोर्चा प्रभारियों के नामों पर लगेगी मुहर।

    राज्य ब्यूरो, लखनऊ। 25 जून को प्रदेश इकाई घोषित की गई। चार जुलाई को राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने लखनऊ में डेरा डाल दिया। अब 11 जुलाई को प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह प्रदेश पदाधिकारियों के साथ मुख्यालय पर अहम बैठक करने जा रहे हैं, जहां टीम एवं मोर्चों को नया होमवर्क दिया जाएगा। चुनावी रूपरेखा तय की जाएगी। क्षेत्रीय एवं मोर्चा प्रभारियों के नामों पर मुहर लग सकती है।

    पंकज चौधरी की टीम में आठ महामंत्री एवं 19-19 उपाध्यक्ष एवं मंत्री हैं, जिसमें कई नए एवं चौंकाने वाले चेहरे हैं। इसी टीम को विधान सभा चुनाव का जिम्मा संभालना है, ऐसे में उन्हें रणनीतिक गुणा गणित भी समझना होगा। प्रदेश पदाधिकारियों के साथ ही छह मोर्चों एवं क्षेत्रीय अध्यक्षों को भी बैठक में बुलाया गया है। पार्टी के नए अभियानों को लेकर पदाधिकारियों में चर्चा है।

    माना जा रहा है कि दिल्ली की रायशुमारी से बनाए गए अभियानों को लेकर भाजपा आगे बढ़ेगी। नए पदाधिकारियों को प्रदेश के राजनीतिक भूगोल एवं जातीय समीकरण बताए जाएंगे। पार्टी ऐसे पुराने एवं अनुभवी कार्यकर्ताओं को मोर्चों का प्रभारी बनाने का निर्णय ले सकती है जिन्हें प्रदेश की टीम में स्थान नहीं मिल सका।

    पूर्व महामंत्री अनूप गुप्ता को लेकर क्या है चर्चा?

    चर्चा है कि पूर्व महामंत्री अनूप गुप्ता को चुनाव प्रबंधन के काम में लगाया जा सकता है, वहीं गोविंद नारायण शुक्ल, संतोष सिंह, विजय बहादुर पाठक, पंकज सिंह समेत अन्य को मोर्चों का प्रदेश प्रभारी बनाया जाएगा। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन पांच जुलाई को पूर्व प्रदेश अध्यक्षों की बैठक में कह चुके हैं कि वो अनुभवी चेहरों का सटीक जगहों पर उपयोग करेंगे।

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    बैठक में अनुशासन का मंत्र सबसे पहले बताया जाएगा, जिस पर राष्ट्रीय नेतृत्व का सबसे ज्यादा जोर रहा है। प्रदेश अध्यक्ष भी कहह चुके हैं कि ‘इस खेमे बनाम उस खेमे’ की लड़ाई में कार्यकर्ता न फंसें, वो पार्टी की अपेक्षाओं को समझें। शनिवार की बैठक में प्रदेश नेतृत्व संबंधित मोर्चों के साथ क्षेत्रीय टीमों में लिए जाने वाले पदाधिकारियों पर चर्चा करेगी।

    क्षेत्रीय टीमें बननी हैं, जिस पर राजनीतिक चेहरों का भारी दबाव होगा। यहां भी नए और होनहार पदाधिकारियों के चयन की चुनौती है। प्रदेश पदाधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में कई चुनाव हैं, ऐसे में संगठन पर बड़ी जिम्मेदारी होगी।