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    यूपी विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने कसी कमर, धर्म और राष्ट्रवाद की गूंज से साधेगी चुनावी सुर

    Updated: Sun, 02 Aug 2026 10:48 PM (IST)

    भाजपा उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों के लिए धर्म और राष्ट्रवाद को मुख्य आधार बना रही है। पार्टी हर घर तिरंगा अभियान, कांवड़ यात्रा और विभाजन विभीषिका ...और पढ़ें

    प्रतीकात्मक तस्वीर

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    HighLights

    1. भाजपा धर्म और राष्ट्रवाद से चुनावी समीकरण साध रही है।

    2. हर घर तिरंगा और कांवड़ यात्रा प्रमुख अभियान हैं।

    3. विभाजन विभीषिका दिवस पर कांग्रेस को घेरेगी पार्टी।

    राज्य ब्यूरो, लखनऊ। भाजपा जानती है कि राष्ट्रवाद और धर्म की तरंग छेड़कर जातीय परिधि तोड़ा भी जा सकता है। वर्ष 2014 से लेकर 2022 तक के चुनाव में यह प्रयोग सफल रहा है, ऐसे में पार्टी सावन के माह में धर्म और राष्ट्रवाद के सुरों से चुनावी बादल सजाने में जुट गई है।

    पार्टी 11 से 15 अगस्त तक हर घर तिरंगा लहराने के साथ ही स्वतंत्रता संग्राम और इमरजेंसी के बहाने कांग्रेस पर निशाना साधेगी। बच्चों के हाथों से ध्वजारोहरण कराकर एवं युवाओं एवं महिलाओं को तिरंगा यात्रा में विशेष महत्व देकर नया संदेश दिया जाएगा। उधर, कांवड़ यात्रा में बुल्डोजर, अयोध्या, काशी, मथुरा, कुंभ एवं अन्य धार्मिक प्रतीकों के जरिए राजनीति में धर्म का रंग गाढ़ा नजर आएगा। बड़ी संख्या में शिविर लगाकर भाजपाई चुनावी साधना में उतर गए हैं।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का सबसे ज्यादा प्रयोग उत्तर प्रदेश में किया। पार्टी ने चुनावों में धर्म, राष्ट्र एवं विकास की त्रिवेणी प्रस्तुत करने का प्रयास किया। यह प्रयोग 2014, 2017 एवं 2022 के चुनावों में काफी असरकारक रहा।

    उत्तर प्रदेश में 2027 विधान सभा ज्यादा दूर नहीं है, ऐसे में भाजपा हर कदम चुनावी गुणागणित को समझकर उठा रही है। संगठन से लेकर सरकार तक जातीय समीकरणों का तानाबाना कसा जा रहा है। अगस्त माह में प्रदेश के हर मंडल में व्यवस्थित और रणनीतिक रूप से तिरंगा यात्रा निकालकर पार्टी चुनावी लक्ष्य साधने की तरफ बढ़ी है।

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    राष्ट्रवाद के तापमान को चुनाव तक बनाकर रखने का प्रयास होगा। 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाते हुए पार्टी मौन जुलूस निकालेगी, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी शामिल होंगे। भाजपाई इस बात को सामने लाने का प्रयास करते रहे हैं कि कांग्रेस की गलत नीतियों की वजह से देश ने विभाजन का दंश झेला।

    इस विषय पर संगोष्ठी जिला स्तर पर भी होगी। छोटे बच्चों से लेकर स्कूलों एवं महाविद्यालयों तक पहुंचकर युवाओं को तिरंगा यात्रा में शामिल करने की रणनीति है जिसके बड़े संदेश हैं। वहीं, 30 जुलाई से शुरू हो चुकी कांवड़ यात्रा 11 अगस्त तक चलेगी, जहां सीएम योगी आदित्यनाथ स्वयं श्रद्धालुओं पर पुष्पवर्षा कर स्पष्ट करेंगे कि पार्टी धर्म का धागा कमजोर नहीं होने देगी।

    इस दौरान कांवड़ यात्रा में वाहनों पर कई प्रतीक ऐसे नजर आएंगे, जिसका संबंध भाजपा से जोड़ा जाता रहा है। कांवड़ शिविरों में प्रदेशभर में योगी सरकार के पहुंचकर प्रसाद ग्रहण करते हैं, जबकि कई शिविरों का आयोजन संगठन के पदाधिकारियों की ओर से किया जाता है।

    यहां जात-पात का अंतर नहीं रह जाता, जिसे भाजपा सामाजिक एकता एवं समरसता का यज्ञ भी कहती है। भाजपा शिवभक्ति की महागूंज से अपने चुनावी स्वर साधेगी।

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