बसपा मुखिया मायावती छात्रों के मुद्दे का राजनीतिकरण होने से चिंतित, पक्ष और विपक्ष के बीच बाजार गर्म
BSP President Mayawati: बसपा के लोग इस राजनीतिक हालात में उग्र व निराश न हों। बसपा के लोग अपने मिशन के प्रति डटे रहें। उन्होंने इसके साथ ही कहा कि पेप ...और पढ़ें

बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती

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डिजिटल डेस्क, लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र-छात्राओं के आंदोलन के राजनीतिकरण पर चिंता जताई है। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री ने शनिवार को एक्स पर पोस्ट से अपनी पार्टी के लोगों को इस प्रकरण से सचेत व सजह रहने की सलाह भी दी है।
उन्होंने कहा कि बसपा के लोग इस राजनीतिक हालात में उग्र व निराश न हों। बसपा के लोग अपने मिशन के प्रति डटे रहें। उन्होंने इसके साथ ही कहा कि पेपर लीक पर धरने को लोगों का व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है। मायावती ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आंदोलन को लोगों की जनसहानुभूति वाला बताने के साथ ही केन्द्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को जिद्दी मांग की संज्ञा दी।
मायावती ने कहा कि सरकार व विपक्ष के बीच टकराव की स्थिति के कारण वर्तमान संसद सत्र सुचारू रूप से नहीं चल पा रहा है और महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार की जवाबदेही रुकी है। उन्होंने कहा कि विपक्ष व सरकार के बीच राजनीति का बाजार भले ही गर्म हैं, लेकिन इससे शिक्षा व्यवस्था सुधार का असली मुद्दा लुप्त ना हो जाये। विरोधी पार्टियों में मुद्दे को भुनाने की होड़ लगी है।
मायावती ने पांच बिंदुओं को पोस्ट किया
1. देश में नीट-यूजी सहित विभिन्न परीक्षाओं के पेपरलीक व उसके उपरान्त परीक्षार्थियों द्वारा होने वाली आत्महत्याओं से उपजे छात्र-छात्राओं/युवाओं के ’कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) आन्दोलन के नई दिल्ली जंतर-मंतर में लगातार जारी शांतिपूर्ण धरना को हालांकि लोगों की व्यापक सहानुभूति हासिल है, किन्तु सरकारी जवाबदेही के रूप में केन्द्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की उनकी जिद्दी मांग को लेकर विपक्ष व सरकार दोनों के बीच जबरदस्त राजनीति का बाजार काफी गर्म है, जिससे शिक्षा व्यवस्था में ज़रूरी व्यापक सुधार का असली मुद्दा ही कहीं लुप्त ना हो जाये।
2. वैसे इस गर्म मुद्दे को भुनाने के लिए विशेषकर विरोधी पार्टियों में सड़क से लेकर संसद तक में ज़बरदस्त होड़ लगी हुई है, उससे भी सरकार व विपक्ष के बीच तनाव व टकराव की भी परिस्थिति हिंसक होकर किसी न किसी रूप में राज्यों में भी फैल रही है, जिससे अपनी पार्टी के लोगों को सचेत व सजग रहने की सलाह।
3. इस प्रकार इस मुद्दे का पूरी तरह से राजनीतिकरण हो जाने के साथ ही जंतर-मंतर में आंदोलनकारियों के विरुद्ध पुलिस की कार्रवाईयों ने स्थिति को और अधिक गर्म व गंभीर बना दिया है।
4. इस भारी तनाव व टकरावपूर्ण स्थिति के कारण संसद का वर्तमान मानसून सत्र अभी तक एक दिन भी सही व सुचारू रूप से नहीं चल पाया है, जिससे देश व जनहित के और भी अनेकों महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार की जवाबदेही एक प्रकार से रुक सी गयी है।
5. इसके साथ ही सरकार सीजेपी के आंदोलन से निपटने के जो उपाय ढूंढने का प्रयास कर रही है वह भ्रष्टाचार एवं अयोग्यता आदि के कारण होने वाले पेपरलीक होने के बाद की सख्त कार्रवाई के द्योतक हैं, जबकि पेपरलीक के जघन्य अपराध ना हों इसके नियंत्रण के लिए उचित उपाय नहीं होता दिखने से भी लोगों में असंतोष बढ़ रहा है।
6. इसलिए वर्तमान राजनीतिक हालात में उग्र व निराश होने के बजाय अपने लागों को अपने मिशन के प्रति पूरी लगन व तन, मन, धन से लगातार डटे रहना है, यही अपील।