यूपी के किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार ने तैयार किया प्लान, परियोजना को लेकर CM योगी ने दिया बड़ा अपडेट
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में यूपीडीएएसपी ने गूगल, आईटीसी और एक्वाब्रिज के साथ तीन अहम समझौता ज्ञापन (एमओयू) किए हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।
HighLights
यूपीडीएएसपी ने गूगल, आईटीसी, एक्वाब्रिज संग किए एमओयू।
ओएनए प्लेटफॉर्म से किसानों को मिलेगी मौसम, मंडी भाव सलाह।
जलवायु-स्मार्ट खेती, मत्स्य पालन से बढ़ेगी किसानों की आय।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। पूर्वी उत्तर प्रदेश के 21 और बुंदेलखंड के सात जिलों में कृषि उत्पादकता और किसानों की आय में बढ़ाने के लिए उत्तर प्रदेश विविधकृत कृषि सहायता परियोजना (यूपीडीएएसपी) ने गूगल एवं ग्लोबल एंड नेटवर्क फार ह्यूमैनिटी, आइटीसी और एक्वाब्रिज के साथ तीन अहम समझौता ज्ञापन (एमओयू) किए हैं।
बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में इन समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये एमओयू कृषि उत्पादन, किसान की आय और यूपी में कृषि के भविष्य को नई दिशा देने का संकल्प हैं।
उत्तर प्रदेश एग्रीकल्चर ग्रोथ एंड रूरल एंटरप्राइज इकोसिस्टम स्ट्रेंथनिंग (यूपीएग्रीज) परियोजना प्रदेश की कृषि को उत्पादन से समृद्धि व भविष्य की अर्थव्यवस्था की ओर ले जाने की महत्वपूर्ण पहल है। इसका लक्ष्य उत्पादन बढ़ाने के साथ किसान की आय, खेती की जलवायु अनुकूलन क्षमता को मूल्य वर्धन और रूरल एंटरप्रेन्योरशिप के साथ मजबूत करना है।
पूर्वी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड पर फोकस
मुख्यमंत्री के सरकारी आवास पर हुए कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि चार हजार करोड़ रुपये की विश्व बैंक समर्थित यूपीएग्रीज परियोजना का फोकस पूर्वी उत्तर प्रदेश व बुंदेलखंड है। हम पूर्वी उप्र व बुंदेलखंड के 28 जिलों के 123 विकास खंडों में इस परियोजना को लागू कर रहे हैं।
इसका लक्ष्य छह लाख हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करते 10 लाख किसानों, 35 हजार मत्स्य उत्पादक किसानों व तीन लाख महिलाओं को लाभ पहुंचाना है। परियोजना के तहत इस खरीफ सीजन में 1.75 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को आच्छादित किया गया है। रबी फसल (2026-27) में भी 1.75 लाख हेक्टेयर में गेहूं, मटर, चना, मसूर व सरसों आदि की उत्पादकता बढ़ाने का लक्ष्य है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गूगल एवं नेटवर्क फार ह्यूमैनिटी के साथ साझेदारी में ओपन नेटवर्क फार एग्रीकल्चर (ओएनए) विकसित किया जाएगा। इसका कान्सेप्ट यूपीआइ और ओएनडीसी जैसे ओपन डिजिटल नेटवर्क माडल से प्रेरित है। इससे किसानों को अलग-अलग सेवाओं के लिए अलग एप व प्लेटफार्म की आवश्यकता नहीं होगी। एक ही इंटरफेस से मौसम, बाजार-मूल्य, मृदा, कृषि सलाह और विभिन्न एग्रीटेक सेवाओं तक पहुंच होगी। एग्रीटेक स्टार्टअप व कंपनियां भी इसका लाभ ले सकेंगी।
श्रम सिंचाई में 25-30 प्रतिशत की बचत का लक्ष्य
हमारा लक्ष्य लागत को कम करना, कम संसाधन व अधिक आय के साथ वैश्विक बाजार के अनुरूप गुणवत्ता उपलब्ध कराना है। आइटीसी के साथ हुए एमओयू के तहत दो लाख एकड़ में धान और गेहूं के जलवायु-अनुकूल कमोडिटी क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। इसमें शून्य जुताई, डायरेक्ट सीडेड राइस, जलवायु अनुकूल उन्नत बीज, डिसिजन न्यूट्रेंट मैनेजमेंट सम्मिलित होगा।
बहराइच में 1500 एकड़ का निर्यात-अनुरूप धान क्लस्टर भी विकसित किया जाएगा। किसान की प्रति एकड़ आय में 20-30 प्रतिशत वृद्धि, यूरिया के उपयोग को 25 प्रतिशत कम करने, श्रम व सिंचाई में 25-30 प्रतिशत की बचत का भी लक्ष्य रखा गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक्वाब्रिज के साथ एमओयू के तहत मत्स्य किसानों, सहकारिता समितियों व उद्यमियों को आधुनिक तकनीक व प्रशिक्षण से जोड़ा जाएगा। इसमें एआइ आधारित एक्वाकल्चर मैनेजमेंट, आटोमैटिक फीडिंग टेक्नोलाजी, आधुनिक प्रशिक्षण व क्षमता निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
साथ ही उन्नाव में आइएमसी इंडस्ट्रियल कारिडोर के तहत 60 एकड़ क्षेत्र में इंटीग्रेटेड एक्वाकल्चर परियोजना विकसित की जा रही है। इसमें हेचरी, फीड मैन्यूफेक्चरिंग, प्रसंस्करण सुविधा, समर्पित प्रशिक्षण केंद्र भी प्रस्तावित है।
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इस दौरान श्रम व सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर, उप्र ट्रांसफार्मेशन कमीशन के सीईओ मनोज कुमार सिंह, कृषि उत्पादन आयुक्त दीपक कुमार, प्रमुख सचिव (कृषि) रविंद्र, प्रमुख सचिव पंधारी यादव, विश्व बैंक के अनूप जगवानी, गूगल के सिद्धार्थ प्रकाश, एक्वाब्रिज से मो. ताबिश, नेटवर्क फार ह्यूमैनिटी से राधा किझनट्टम, आइटीसी के सचिन शर्मा, सीआइपी के निदेशक डा. सुधांशु सिंह, सिद्धि नायक एग्रो. लि. के हेमंत गौर आदि मौजूद रहे।
