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लखनऊ: CJP के प्रदर्शन में शामिल छात्र को नोटिस जारी कर फंसी पुलिस, डीजीपी ने दिया मामले की जांच का निर्देश

Published: Thu, 10 Sep 2026 01:49 AM (IST)

जंतर-मंतर पर हुए सीजेपी प्रदर्शन में शामिल छात्र अक्षत त्रिपाठी को सुप्रीम कोर्ट की मनाही के बावजूद पुलिस द्वारा नोटिस ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर।

प्रतीकात्मक तस्वीर।

राज्य ब्यूरो, जागरण, लखनऊ। जंतर-मंतर पर काकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन में शामिल छात्र अक्षत त्रिपाठी को सुप्रीम कोर्ट की मनाही के बाद भी चार सितंबर को पुलिस की ओर से नोटिस जारी करने के मामले में डीजीपी राजीव कृष्ण ने जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि जंतर-मंतर पर 20 से 25 जुलाई के बीच हुए प्रदर्शन में शामिल किसी भी युवा पर कार्रवाई न की जाए।

इसके बाद भी छात्र को किस आधार पर नोटिस जारी किया गया, इसकी जांच पूरी कर दोषी के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।पेपर लीक मामले में सीजेपी के प्रदर्शन में देश भर से हजारों युवाओं ने भाग लिया था। सरकार के साथ बातचीत के बाद सीजेपी ने प्रदर्शन समाप्त कर दिया था। इसके बाद प्रदर्शन में शामिल युवाओं के खिलाफ पुलिस द्वारा विभिन्न मामलों में कार्रवाई की जा रही है।

इसी सिलसिले में चार सितंबर को एसीपी (कार्यपालक मजिस्ट्रेट-तृतीय) ग्रेटर नोएडा डॉ. रवि शंकर ने गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) के छात्र व झांसी निवासी अक्षत त्रिपाठी को शांति भंग करने सहित विभिन्न मामलों को लेकर पांच लाख रुपये के मुचलके का नोटिस भेज दिया था। इसके विरोध में सीजेपी के प्रवक्ता सौरभ दास ने जिला प्रशासन पर सवाल उठाए हैं।

हालांकि नोटिस पुलिस कमिश्नरेट के अधिकारों के तहत जारी किया गया था। जिन शहरों में पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था है, वहां पर इस प्रकार के मामलों में कार्रवाई का अधिकार जिलाधिकारी की बजाय पुलिस कमिश्नर के पास होता है। सुप्रीम कोर्ट के रुख को देखते हुए पुलिस ने चार सितंबर को जारी नोटिस पांच सितंबर को वापस ले लिया था। फिलहाल छात्र को गलत नोटिस जारी कर फंसी पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के रुख को देखते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है।

कार्यपालक मजिस्ट्रेट ने प्रदर्शनकारी छात्र को थाना इको-प्रथम के उप निरीक्षक (एसआइ) शिवा पांडेय की रिपोर्ट के आधार पर नोटिस जारी किया है। थाना प्रभारी को भेजी गई जांच रिपोर्ट में एसआइ ने लिखा है कि संबंधित छात्र अपने साथ विश्वविद्यालय के अन्य छात्रों को धरने में लेकर पहुंचा था। इस दौरान सरकार के विरोध में भ्रामक बातों को फैला कर बाकी छात्रों को उकसाया जा रहा था, जिससे अशांति भंग की आशंका बनी थी।

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