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जौहर यूनिवर्सिटी मामला: सरकारी ठेकों की रकम डाइवर्ट कर विश्वविद्यालय तक पहुंचने के मिले सबूत, ED की जांच तेज

Published: Wed, 19 Aug 2026 10:13 PM (IST)Updated: Wed, 19 Aug 2026 10:27 PM (IST)

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जौहर ट्रस्ट मामले में सरकारी ठेकों की रकम को विश्वविद्यालय तक पहुंचाने की प्रक्रिया की जांच कर ...और पढ़ें

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HighLights

  1. ईडी जौहर ट्रस्ट में सरकारी ठेका रकम डायवर्जन की जांच कर रही है।

  2. ठेकेदारों ने सरकारी फंड ट्रस्ट/विश्वविद्यालय के कार्यों पर खर्च किया।

  3. जांच में 2012-2017 के वित्तीय लेनदेन के महत्वपूर्ण सबूत मिले।

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच अब सरकारी ठेकों से जुड़ी रकम के डायवर्जन और उसके जौहर ट्रस्ट, जौहर विश्वविद्यालय तक पहुंचने की प्रक्रिया पर केंद्रित हो गई है। एजेंसी को ऐसे साक्ष्य मिले हैं, जिसमें सरकारी काम हासिल करने वाले निजी ठेकेदारों ने रकम का बड़ा हिस्सा ट्रस्ट या विश्वविद्यालय से जुड़े निर्माण और अन्य कार्यों पर खर्च किया। कुछ राशि चेक और आरटीजीएस से भेजी गयी।

बुधवार को दिल्ली, रामपुर, सहारनपुर के 10 ठिकानों पर तलाशी के दौरान चार्टेड एकाउंटेट के यहां से मिले बैंक रिकार्ड, लेखा दस्तावेज, संपत्ति से जुड़े कागजात और डिजिटल सामग्री की प्रारंभिक जांच में वर्ष 2012 से 2017 के दौरान कई विभागों के ठेकेदारों, उनके सहयोगियों और ट्रस्ट-यूनिवर्सिटी से जुड़े लोगों के साथ वित्तीय लेन किया है।

ईडी अधिकारियों के मुताबिक, जांच का अहम पहलू यह पता लगाना है कि ठेकेदारों ने जौहर ट्रस्ट या यूनिवर्सिटी से जुड़े कार्यों के नाम पर दान, भुगतान या अन्य लेनदेन के जरिए कथित तौर पर रकम किस मार्ग से होती हुई जौहर ट्रस्ट, यूनिवसिर्टी पहुंची थी। एजेंसी इन लेनदेन के स्रोत और अंतिम गंतव्य का पता लगाने में जुटी

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है।

ईडी अधिकारियों का कहना है कि यह भी देखा जा रहा है कि ठेकेदारों की ओर से ट्रस्ट को किए गए भुगतान या कथित दान वास्तविक कारोबारी अथवा धर्मार्थ लेनदेन थे या फिर अपराध से अर्जित रकम छिपाने और स्थानांतरित करने के लिए उनका इस्तेमाल किया गया। ईडी पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही है।

जांच का एक प्रमुख बिंदु यह भी है कि कथित अवैध रकम का इस्तेमाल संपत्तियों के निर्माण, खरीद या वित्तपोषण में हुआ था या उसका किसी कंपनी के लिए इस्तेमाल किया गया है। ईडी के मुताबिक, दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की विस्तृत जांच के बाद मामले में तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों का कहना है कि कई ठेकेदारों के साथ उन दिनों विभिन्न विभागों में सरकारी पदों पर तैनात किये गये कई प्राइवेट व्यक्ति भी जांच के घेरे में हैं। कुछ लोगों के देश से बाहर होने की जानकारी भी आ रही है। ऐसे लोगों पर पृथक कार्रवाई की तैयारी है।