लखनऊ: टोल प्लाजा पर फर्जी सॉफ्टवेयर से वसूली का खेल, ईडी की 7 राज्यों में 14 ठिकानों पर छापेमारी
ईडी ने फर्जी टोल वसूली और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सात राज्यों के 14 टोल प्लाजा पर छापेमारी की है। ...और पढ़ें
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यह तस्वीर एआई के द्वारा बनाई गई है।
HighLights
ईडी ने 7 राज्यों के 14 टोल प्लाजा पर छापेमारी की।
फर्जी सॉफ्टवेयर और फास्टैग से टोल वसूली में घोटाला हुआ।
मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आलोक सिंह को पहले गिरफ्तार किया गया।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के लखनऊ जोनल कार्यालय ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) के विभिन्न टोल प्लाजा पर फर्जी टोल वसूली से जुड़े मनी लान्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू, मध्य प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर और कोलकाता में 14 टोल प्लाजा व उनके संचालकों के 14 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की है।
ईडी ने यह कार्रवाई 22 जनवरी 2025 को पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर की है। वाराणसी सहित विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्गों पर बने टोल प्लाजा में फर्जी साफ्टवेयर के जरिये टोल वसूली में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा का मामला पिछले वर्ष सामने आया था। पुलिस की जांच में यह बात सामने आई थी कि टोल कर्मी पांच से 10 प्रतिशत राशि ही अधिकृत खाते में जमा करते थे, बाकी की राशि दूसरे बैंक खातों में जमा की जाती थी।
वहीं फर्जी चिप व फास्ट टैग के जरिये भारी वाहनों को बिना टोल टैक्स वसूले ही निकाला जाता था। बिना फास्ट टैग या कम फास्ट टैग की रकम वाले वाहनों से वसूली गई राशि अधिकृत खाते में जमा नहीं कराई जाती थी। पुलिस ने इस मामले में आलोक सिंह नामक आरोपित को वाराणसी से गिरफ्तार किया था।
इसके बाद ईडी ने मनी लान्ड्रिंग के मामले को लेकर इस फर्जीवाड़े की जांच शुरू की है। अभी तक की जांच में यह बात सामने आई है कि कुछ टोल कर्मियों ने टोल की रसीद बनाने के लिए बिना अनुमति वाले अनधिकृत साफ्टवेयर का इस्तेमाल कर टोल टैक्स वसूला और उसे दूसरे बैंक खातों में स्थानांतरित कर दिया। इससे टोल की रकम आधिकारिक लेखा प्रणाली में शामिल नहीं की जा सकी।
ईडी के अधिकारियों ने बताया कि फारेंसिक जांच और एनएचएआई के रिकार्ड से भी ऐसे साफ्टवेयर के इस्तेमाल की पुष्टि होने की बात सामने आई है। बुधवार को ईडी की 18 से अधिक टीमों ने यह छापेमारी टोल वसूली को लेकर तैयार फर्जी दस्तावेजों को एकत्र करने के लिए की है। टोल वसूली का रिकार्ड मिलने के बाद ईडी की टीम लाभार्थियों की भी पहचान करेगी।
