ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन का एलान, विद्युत क्षेत्र में निजीकरण का विरोध करेंगे देशभर के इंजीनियर
ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने देशभर के बिजली इंजीनियरों से विद्युत क्षेत्र में निजीकरण का पुरजोर विरोध करने का आह्वान किया है। फेडरेशन ने राष्ट्रीय परिसंपत्तियों को निजी हाथों में जाने से रोकने और उपभोक्ताओं के हित में सजग रहने की अपील की।

विद्युत क्षेत्र में निजीकरण के किसी भी प्रयास का विरोध करेंगे देशभर के इंजीनियर।
HighLights
ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने निजीकरण का विरोध किया।
राष्ट्रीय परिसंपत्तियों को निजी हाथों में जाने से रोकने की अपील।
उपभोक्ता हित में सार्वजनिक विद्युत क्षेत्र के स्वरूप को बचाना।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने देशभर के बिजली इंजीनियरों से विद्युत क्षेत्र में किसी भी प्रकार के निजीकरण का पुरजोर विरोध करने का आह्वान करते हुए उपभोक्ताओं के हित में विद्युत से जुड़ी राष्ट्रीय परिसंपत्तियों को निजी हाथों से जाने से रोकने के लिए हर समय तैयार रहने की अपील की गई।
वक्ताओं ने कहा कि एक ही सार्वजनिक वितरण नेटवर्क पर अनेक वितरण लाइसेंस धारकों को कार्य करने की अनुमति देना चिंता का विषय है।
रविवार को फेडरेशन के 54वें स्थापना दिवस पर वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से हुई बैठक में फेडरेशन के अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे तथा महासचिव पी. रत्नाकर राव ने कहा कि निजीकरण से ऊर्जा क्षेत्र के बचाने के लिए हर समय सजग और तैयार रहना होगा।
विद्युत क्षेत्र के सार्वजनिक स्वरूप को कमजोर करने की किसी भी प्रयास का लोकतांत्रिक व संवैधानिक तरीकों से व्यापक विरोध किया जाएगा। ऊर्जा के क्षेत्र में देश को वास्तविक तथा उपभोक्ता केंद्रित सुधारों की आवश्यकता है, न कि सुधारों के नाम पर सार्वजनिक परिसंपत्तियों के निजीकरण की।
कहा कि देश की विद्युत व्यवस्था का निर्माण दशकों से हो रहे सार्वजनिक निवेश, सरकारी सहयोग, उपभोक्ताओं के योगदान और सार्वजनिक ऋण के माध्यम से हुआ है। ट्रांसमिशन व वितरण नेटवर्क राष्ट्रीय परिसंपत्तियां हैं, इन्हें निजी कंपनियों का व्यावसायिक माध्यम नहीं बनाया जा सकता है।

