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    5 साल से केजीएमयू में सक्रिय था फर्जी डॉक्‍टर हस्साम, 2023 में हुई थी पिटाई; पूछताछ में हुए चौंकाने वाले खुलासे

    Updated: Wed, 22 Apr 2026 07:06 PM (IST)

    किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में पांच साल से सक्रिय फर्जी डॉक्टर हस्साम अहमद को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पूछताछ में उसने मरीजों से ठगी, फर्जी नोटिस ...और पढ़ें

    सांकेत‍िक तस्‍वीर।

    सांकेत‍िक तस्‍वीर।

    HighLights

    1. फर्जी डॉक्टर हस्साम अहमद 5 साल से केजीएमयू में सक्रिय।

    2. मरीजों से ठगी और फर्जी नोटिस जारी करने का आरोप।

    3. पुलिस जांच में कई एनजीओ और चैटिंग के राजफाश।

    जागरण संवाददाता, लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) से पकड़े गए खुद को एमबीबीएस डॉक्टर बताने वाले हस्साम अहमद से पुलिस की पूछताछ में कई राजफाश हुए हैं। पूछताछ में उसने बताया कि वह 2021 से संस्थान परिसर में सक्रिय था। वह इसी बैच का एमबीबीएस पास आउट होने का दावा करता था। मरीजों को चिकित्सकों से ओपीडी में दिखाने के नाम पर दो हजार रुपये तक वसूल लेता था। 2023 में उसे कुछ लोगों ने पीटा था। उसके पास से पुलिस को एक मोबाइल फोन, एक आईपैड मिला है। पुलिस अब सीडीआर की मदद से जांच कर रही है।

    सिद्धार्थ नगर के मोहाना स्थित ककरावा निवासी मोहम्मद हस्साम मड़ियांव के अजीज नगर में अपनी चचेरी अप्पी के घर में रहता था। 13 अप्रैल 2026 को उसने सर्जरी विभाग के प्रोफेसर व डीन पैरामेडिकल डॉ. केके सिंह के फर्जी हस्ताक्षर से एक नोटिस जारी की थी। इसमें एमबीबीएस 2023 बैच के विद्यार्थियों को 29 अप्रैल को एम्स दिल्ली में होने वाली एक कान्फ्रेंस में शामिल होने का निर्देश दिया गया था।

    जांच में नोटिस फर्जी पाया गया तो उसकी गतिविधियों पर शक गया। इसी के बाद फर्जीवाड़ा सामने आया। बुधवार को चौक पुलिस ने लंबी पूछताछ के बाद आरोपित को जेल भेज दिया। पूछताछ में उसने बताया कि 2021 से वह संस्थान में डॉक्टर बनकर घूमता था। सफेद एप्रन, आला पहनकर वह संस्थान के किसी भी विभाग में पहुंचता फिर उन मरीजों को निशाना बनाता जो गंभीर होते थे।

    डॉक्टर को दिखाने के नाम पर वह प्रत्येक मरीज से पांच सौ से दो हजार रुपये तक वसूलता। 2023 में शक होने पर केजीएमयू परिसर में उसकी पिटाई हुई थी। उसे संस्थान से भगा दिया गया, लेकिन कुछ दिनों बाद दोबारा उसने वही काम शुरू कर दिया। लंबे समय से संस्थान में गैर कानूनी रूप से घूमने के बावजूद उसके बारे में किसी को कुछ पता नहीं चला, इससे संस्थान की आंतरिक सुरक्षा और चौकसी पर भी सवाल उठ रहा है।

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    पुलिस को उसके पास से मिले मोबाइल और आईपैड से कई जानकारियां मिली है। जांच में कई चिकित्सकों से उसकी चैटिंग मिली है। हस्साम के मोबाइल नंबर की सीडीआर भी निकलवाई जा रही है। पुलिस उपायुक्त पश्चिम कमलेश दीक्षित ने बताया कि आरोपित को जेल भेजा गया है। अन्य बिंदुओं पर जांच जारी है।

    बनाई थी कई एनजीओ, हर विभाग में था दखल

    हस्साम ने कई एनजीओ बनाई थी और इन की आड़ में मरीजों से संपर्क साधता था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में उसकी चार एनजीओ होने की बात पता चली है। एनजीओ को विदेशी फंडिंग की भी आशंका है। केजीएमयू के हर विभाग में उसका दखल था। एक विभाग के तकनीनिशियन की मिलीभगत की आशंका भी जताई जा रही है। उधर, मंगलवार रात पुलिस ने उसे हिरासत में लिया था। बैरक में उसने खाना खाने से इंकार किया।

    डॉ. रमीजुद्दीन से भी हुई थी मुलाकातें

    पुलिस सूत्रों का कहना है कि केजीएमयू में दुष्कर्म, मतांतरण के प्रयास समेत अन्य आरोपों में जेल भेजे जा चुके डॉ. रमीजुद्दीन से भी उसने कई मुलाकातें की थी। आशंका है कि डॉ. रमीजुद्दीन के साथ हस्साम मतांतरण का बड़ा नेटवर्क खड़ा करने की फिराक में था। रमीज के जेल जाने के बाद से वह गुपचुप तरीके से अपना जाल फैला रहा था। दिल्ली में होने वाली कांफ्रेंस के बहाने वह जिन छात्राओं को साथ ले जाने वाला था, उस सूची में भी अधिकांश छात्राएं हिंदू ही थी।

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