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    महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने सुषमा स्वराज को बताया भाषाई विदुषी, मराठी पुस्तक के हिंदी संस्करण को सराहा

    Updated: Sat, 08 Aug 2026 01:27 PM (GMT+05:30)

    Governor Maharashtra Jishnu Dev Varma: संस्कृत भाषा का अध्ययन बचपन से विद्यालयों में कराया जाना चाहिए, क्योंकि बचपन में सीखी गई बातें जीवनभर स्मरण रहत ...और पढ़ें

    मुंबई भाजपा के उपाध्यक्ष अमरजीत मिश्र ने पुस्तक ‘अग्निशिखा सुषमा स्वराज’महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा को भेंट की।

    मुंबई भाजपा के उपाध्यक्ष अमरजीत मिश्र ने पुस्तक ‘अग्निशिखा सुषमा स्वराज’महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा को भेंट की।  

    HighLights

    1. मेधा किरीट सोमैया ने मेरठ भाषा में लिखी है सुषमा स्वराज के जीवन पर आधारित पुस्तक ‘अग्निशिखा सुषमा स्वराज’

    2. मुंबई भाजपा के उपाध्यक्ष अमरजीत मिश्र ने राज्यपाल को भेंट की हिंदी संस्करण की पहली प्रति 

    3. सुषमा स्वराज की भाषा संस्कृतनिष्ठ थी : राज्यपाल जिष्णुदेव वर्मा

    डिजिटल डेस्क, लखनऊ। देश की प्रखर राजनेता, दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री रहीं दिवंगत सुषमा स्वराज के जीवन पर आधारित मराठी भाषा में लिखी गई पुस्तक ‘अग्निशिखा सुषमा स्वराज’ का हिंदी संस्करण भी जमकर सराहा जा रहा है। मुंबई के लोक भवन में मुंबई भाजपा के उपाध्यक्ष अमरजीत मिश्र ने स्वयं अनुवाद की गई मेधा किरीट सोमैया की मराठी पुस्तक ‘अग्निशिखा सुषमा स्वराज’महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा को भेंट की।  

    महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने इस अवसर पर कहा कि स्वर्गीय सुषमा स्वराज एक अद्भुत भाषाई विदुषी थीं। उनका संपूर्ण जीवन महिला सशक्तीकरण, सेवा और समर्पण का अनुकरणीय उदाहरण है। उनकी सामाजिक सक्रियता और जनसेवा के कार्य आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरणा देती रहेंगी। 

    राज्यपाल जिष्णुदेव वर्मा ने कहा कि पूर्व केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज की भाषा अत्यंत संस्कृतनिष्ठ और प्रभावशाली थी। उन्होंने कहा कि सुषमा स्वराज ने अपनी वाक्पटुता और भाषा की समृद्धता से सार्वजनिक जीवन में अपनी अलग पहचान बनाई। 

    राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने सुषमा स्वराज के व्यक्तित्व और योगदान को याद करते हुए कहा कि वे महिला सशक्तीकरण की मजबूत प्रतीक थीं। उनकी भाषा पर पकड़, विषयों की गहरी समझ और प्रभावी अभिव्यक्ति क्षमता अद्वितीय थी। उन्होंने भारतीय राजनीति में मर्यादा, संवेदनशीलता और संस्कारों की एक नई मिसाल स्थापित की।

    राज्यपाल ने सुषमा स्वराज के संस्कृत ज्ञान का उल्लेख करते हुए कहा कि वे शिव तांडव स्तोत्र का प्रभावशाली पाठ करती थीं। यह उनके भारतीय संस्कृति और परंपराओं के प्रति गहरे लगाव को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा का अध्ययन बचपन से विद्यालयों में कराया जाना चाहिए, क्योंकि बचपन में सीखी गई बातें जीवनभर स्मरण रहती हैं।

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    उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि आज भी उन्हें बचपन में सीखे गए संस्कृत के श्लोक और स्तोत्र याद हैं। राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान अर्जित करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह संस्कार, चरित्र और व्यक्तित्व निर्माण की आधारशिला भी है। भारतीय भाषाओं और संस्कृति का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए अत्यंत आवश्यक है।

    इस अवसर पर भाजपा नेता अमरजीत मिश्र ने सुषमा स्वराज की अद्भुत भाषाई क्षमता, प्रभावशाली वक्तृत्व शैली और दूरदर्शी सोच पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सुषमा स्वराज केवल एक सफल राजनेता नहीं थीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, भाषाओं और मूल्यों की सशक्त प्रतिनिधि भी थीं।

    विभिन्न विषयों पर उनकी गहरी पकड़ और संवाद की प्रभावशाली शैली उन्हें राजनीति में विशिष्ट पहचान दिलाती थी। उन्होंने सुषमा स्वराज के नेतृत्व में मॉरीशस में हुए 11वें विश्व हिंदी सम्मेलन में हिस्सा लेने के अपने संस्मरण को भी साझा किया। 

    कार्यक्रम की शुरुआत लेखिका मेधा सोमैया ने सुषमा स्वराज के जीवन, संघर्ष, राजनीतिक यात्रा और सामाजिक योगदान को याद करते हुए की। उन्होंने सुषमा स्वराज के साथ जुड़ी अपनी भावनात्मक स्मृतियां साझा कीं और बताया कि किस तरह उन्होंने अपने व्यक्तित्व, संवेदनशील नेतृत्व और कार्यशैली से लाखों लोगों को प्रेरित किया।

    इस आयोजन को साहित्य, संस्कार, भाषा और प्रेरणा का संगम बताया गया। सुषमा स्वराज का जीवन आज भी उन सभी लोगों के लिए प्रेरणास्रोत है, जो समाजसेवा, नेतृत्व और सकारात्मक बदलाव का सपना देखते हैं। विशेष रूप से महिलाओं के लिए उनका जीवन आत्मविश्वास, संघर्ष और सफलता की नई राह दिखाता है।

    इस अवसर पर पूर्व सांसद किरीट सोमैया, महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी के पूर्व कार्याध्यक्ष डॉ. शीतला प्रसाद दुबे, पत्रकार विकास संघ के अध्यक्ष आनंद मिश्र, गायिका संजोली पांडेय, के एस मिश्र,वरिष्ठ पत्रकार शैलेंद्र श्रीवास्तव, सुनील सिंह सहित साहित्य, राजनीति, शिक्षा और पत्रकारिता जगत से जुड़े अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम में सुषमा स्वराज के जीवन मूल्यों, उनके संघर्ष, महिला सशक्तीकरण के प्रयासों और समाज के प्रति उनके योगदान पर विस्तार से चर्चा हुई।