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    बाराबंकी में बिना अनुमति शिक्षक की बहाली पर हाई कोर्ट सख्त, डीजी एसटीएफ जांच के आदेश

    Updated: Sat, 25 Apr 2026 04:00 AM (IST)

    इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने बाराबंकी के सिटी इंटरमीडिएट कॉलेज में एक शिक्षक की अवैध बहाली पर डीजी एसटीएफ को जांच के आदेश दिए हैं। ...और पढ़ें

    बिना अनुमति शिक्षक की बहाली पर हाई कोर्ट सख्त, एसटीएफ जांच के आदेश

    बिना अनुमति शिक्षक की बहाली पर हाई कोर्ट सख्त, एसटीएफ जांच के आदेश

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    विधि संवाददाता, जागरण, लखनऊ। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने बाराबंकी स्थित सिटी इंटरमीडिएट कॉलेज में शिक्षक की अवैध पुनः बहाली के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए डीजी एसटीएफ को जांच के आदेश दिए हैं।

    अदालत ने अवैध रूप से दिए गए वेतन की वसूली के भी निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकलपीठ ने यह आदेश कॉलेज की प्रबंध समिति की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। कोर्ट ने मामले में बाराबंकी के जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस), कॉलेज के प्रधानाचार्य और संबंधित शिक्षक की भूमिका पर प्रथमदृष्टया संदेह जताया है।

    अदालत ने पाया कि डीआईओएस ने रिकॉर्ड में हेरफेर कर भ्रामक जानकारी प्रस्तुत करने का प्रयास किया, जिससे निष्पक्ष जांच प्रभावित हो सकती थी। इस पर कोर्ट ने डीआईओएस के तत्काल स्थानांतरण के आदेश दिए।

    साथ ही अयोध्या मंडल के तत्कालीन संयुक्त शिक्षा निदेशक के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। शिक्षक अभय कुमार वर्ष 2018 में सहायक शिक्षक के पद पर नियुक्त हुए थे। जून 2024 में उन्होंने छत्तीसगढ़ के एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में प्रवक्ता पद पर नियुक्ति ले ली, लेकिन इसके लिए कॉलेज की प्रबंध समिति से अनुमति नहीं ली।

    बाद में लियन बनाए रखने का अनुरोध भी किया गया, जिसे समिति ने अस्वीकार कर दिया। इसके बावजूद संयुक्त शिक्षा निदेशक और डीआईओएस के निर्देश पर सितंबर 2025 में अभय कुमार को पुनः कॉलेज में कार्यभार ग्रहण करा दिया गया और अक्टूबर 2025 का वेतन भी दे दिया गया।

    कोर्ट ने इसे पूरी तरह अवैध करार देते हुए कहा कि ऐसी पुनः नियुक्ति का कोई विधिक आधार नहीं है। अदालत ने शिक्षा विभाग में आदेशों के संप्रेषण में लापरवाही पर भी चिंता जताई।

    मुख्य सचिव को निर्देश दिया गया कि भविष्य में सभी आदेश ईमेल और व्हाट्सएप जैसे माध्यमों से भी भेजे जाएं, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और विवाद की स्थिति न उत्पन्न हो। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 28 मई 2026 तय करते हुए अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

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