बेहद चर्चित लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर अब दौड़ा घोड़ा, वाहन सवारों में मची अफरा-तफरी
Lucknow-Kanpur Expressway: खनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर अचानक आए घोड़े को नियंत्रण में लेने के लिए पेट्रोलिंग कर्मियों के पसीने छूटे गए। घोड़े के एक्सप्रेसवे पर आने की सूचना मिलते ही पेट्रोलिंग कर्मियों के हाथ-पांव फूल गए।
HighLights
कई किलोमीटर तक तेज रफ्तार वाहनों के बीच दौड़ता रहा घोड़ा
घोड़े को दौड़ लगाते देख एक्सप्रेसवे पेट्रोलिंग कर्मी हैरान, छूटे पसीने
पेट्रोलिंग टीम ने कई किलोमीटर किया पीछा, बड़ी मुश्किल से एक्सप्रेसवे से उतरा घोड़ा
आशीष कुमार सिंह, लखनऊ। उद्घाटन के बाद एक हफ्ते में जगह-जगह पर सड़क धंसने को लेकर बेहद चर्चा में आ चुके लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर लोगों ने रविवार को बेहद हैरान कर देने वाला नजारा देखा। इस एक्सप्रेसवे पर दो पहिया के संचालन पर भले ही रोक है, लेकिन लोग इस पर तेज रफ्तार से दौड़ते घोड़ा को देखकर हैरान हो गए।
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर रविवार को घोड़ा दौड़ते देख वाहन सवारों में अफरा-तफरी मच गई। उन्नाव के आस पास एक घोड़ा अचानक एक्सप्रेसवे पर चढ़ गया। यह घोड़ा कई किलोमीटर तक तेज रफ्तार वाहनों के बीच दौड़ता रहा। कई जगह पर अचानक सामने आए घोड़े से बचने के लिए वाहन सवारों को अपने वाहनों की गति नियंत्रित करनी पड़ी।
ग्रीन फील्ड पर यह घोड़ा कई किलोमीटर तक दौड़ता रहा। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग मार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) की टीम ने जब घोड़े को देखा तो उन्नाव से पहले इसका पीछा करना शुरू किया। घोड़ा कभी बाएं तरफ भागता तो कभी दाएं तरफ। पेट्रोलिंग करने वाली टीम डंडे से उसे मारने का प्रयास करती रही, इससे घोड़ा और तेज भागने लगा।
करीब सात से आठ किमी. तक पेट्रोलिंग करने वाली टीम इसके पीछे भागती रही। लालगंज बाइपास से दो किलोमीटर पहले, किसी तरह से एक्सप्रेसवे से नीचे घोड़े को उतारा गया। गनीमत रही कि इससे कोई हादसा नहीं हुआ।
गनीमत रही कि इस दौरान कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। एक्सप्रेसवे पर घोड़े के दौड़ने से कुछ समय के लिए वाहन चालकों में दहशत का माहौल रहा। लोगों ने एक्सप्रेसवे की सुरक्षा व्यवस्था और आवारा पशुओं की रोकथाम को लेकर भी सवाल उठाए।
जगह-जगह टूट गई हैं जालियां
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर कोई पशु न आ सके, इसके लिए 45 किलोमीटर ग्रीन फील्ड के बाएं व दाएं छह-छह फीट की लोहे की मजबूत जालियां लगाई गई है। जगह-जगह लोहे के गेट लगाए गए हैं। सवाल खड़ा होता है कि इतनी सुरक्षा होने के बाद भी कभी घोड़ा एक्सप्रेसवे तक पहुंच रहा है तो कभी गाय व कुत्ता तक आ जा रहे हैं। कहने को पेट्रोलिंग टीम राउंड द क्लाक निरीक्षण करती है लेकिन बैरिकेडिंग के बाद यह कैसे हो रहा है? इस पर एनएचएआइ का तर्क है कि कुछ जगह जालियां जो टूटी गई थी, उनकी मरम्मत जल्द शुरू होगी। इसके बाद कोई पशु एक्सप्रेसवे पर नहीं आ सकेगा।
