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IAS अधिकारी रिंकू सिंह राही फिर विवादों में, स्वतंत्रता संग्राम के नायक शहीद भगत सिंह को बताया बेवकूफ लड़का

Published: Sat, 15 Aug 2026 06:37 PM (IST)

Rinku Singh Rahi:  रिंकू सिंह राही ने डीएम और एसडीएम की मौजूदगी में कहा कि भगत सिंह आज के हिसाब से बेवकूफ-बेकार थे।

जालौन में स्वतंत्रता दिवस पर कार्यक्रम में अपने संबोधन में रिंकू सिंह राही

जालौन में स्वतंत्रता दिवस पर कार्यक्रम में अपने संबोधन में रिंकू सिंह राही 

HighLights

  1. जालौन में कलेक्ट्रेट के सभागार में आयोजित कार्यक्रम के दौरान विवादित बयान

  2. जालौन में उरई में एसडीएम न्यायिक के पद पर कार्यरत हैं रिंकू सिंह राही

डिजिटल डेस्क, लखनऊ। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के बाद लोक सेवा आयोग की परीक्षा में सफल होने वाले अधिकारी रिंकू सिंह राही के विचार से देश के स्वतंत्रता संग्राम के नायक रहे शहीद भगत सिंह बेवकूफ थे। आईएएस अधिकारी का शहीद भगत सिंह को बेवकूफ बोलने का मामला तूल भी पकड़ सकता है।

देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर जहां चारों ओर आजादी दिलाने वाले नायकों की जय-जयकार हो रही है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शहीद भगत सिंह व चंद्रशेखर को जहां नमन कर रहे हैं, वहीं उरई में एसडीएम न्यायिक के पद पर कार्यरत आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही उनको बेवकूफ बता रहे हैं।

जालौन में स्वतंत्रता दिवस पर कार्यक्रम में अपने संबोधन में रिंकू सिंह राही ने डीएम और एसडीएम की मौजूदगी में कहा कि भगत सिंह आज के हिसाब से बेवकूफ-बेकार थे। राही ने स्वतंत्रता आंदोलन और उसमें शामिल क्रांतिकारियों को लेकर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि भगत सिंह आज के हिसाब से बेवकूफ और बेकार बच्चे थे। वो घर के हिसाब से बागी थे।

उरई के कलेक्ट्रेट सभागार में शनिवार स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम को रिंकू सिंह राही ने संबोधित किया। इस दौरान डीएम राजेश कुमार पांडेय, एडीएम वित्त एवं राजस्व राजीव राज, एडीएम नमामि गंगे प्रेमचंद मौर्य, डीपीआरओ राम अयोध्या प्रसाद और ईडीएम पुष्पेंद्र सिंह भी मौजूद थे।

उन्होंने कहा कि जब मैं इतिहास पढ़ता हूं तो मन में सवाल उठता है कि किसानों का शोषण अंग्रेजों ने किया या फिर हमारे ही देश के पटवारी ने। शुरुआत में स्वतंत्रता आंदोलन में सिर्फ एक प्रतिशत लोगों ने हिस्सा लिया था। बाकी लोग अपने धर्म के अनुसार कर्मकांड और परिवार में ही लगे हुए थे। अंग्रेजों के दौर में प्रशासनिक और न्यायिक व्यवस्था लागू की गई थी। जब मैं इतिहास पढ़ता हूं तो लगता है कि किसानों का शोषण आखिर किसने कियाष क्या अंग्रेजों ने या हमारे ही देश के पटवारी ने। पटवारी इसी देश का आदमी था। क्या उस समय अंग्रेज कलेक्टर ने पटवारी से कहा था कि किसानों का शोषण करो या फिर अपने अंग्रेज अधिकारी के सामने अच्छा कर्मचारी साबित होने और कागजी लक्ष्य पूरा करने के लिए पटवारी किसानों को पकड़कर ले आए।

शुरुआत में एक प्रतिशत लोग भी आजादी की लड़ाई में नहीं उतरे

रिंकू सिंह राही ने कहा कि आजादी की लड़ाई का सही आकलन किया जाए तो शायद शुरुआत में एक प्रतिशत लोग भी प्रत्यक्ष रूप से लड़ाई में शामिल नहीं हुए थे। लोग अपनी सामान्य दिनचर्या में लगे हुए थे। सुबह उठते, अपने धर्म के अनुसार कर्मकांड करते, काम पर जाते और परिवार के साथ समय बिताते थे। उन्हें इस बात का एहसास तक नहीं था कि कोई देश भी है या हम गुलाम हैं। कुछ लोगों के मन में यह विचार आया और धीरे-धीरे आंदोलन की धारा आगे बढ़ी। उन्हें समझ में आया कि देश के लिए कुछ करना है। इसके बाद कुछ लोग अपने घरों से निकलकर देश की आजादी की लड़ाई में शामिल हुए। हमारी पारंपरिक सोच रही है कि ‘हम और हमारा परिवार’, लेकिन कुछ लोगों ने इससे आगे बढ़कर सोचा। उन्होंने माना कि भले ही उन्हें उनके माता-पिता ने जन्म दिया हो, लेकिन मानव जाति और देश के प्रति भी उनकी जिम्मेदारी है। ऐसे लोग अपनी पत्नी-बच्चों और माता-पिता को छोड़कर देश के लिए आगे आए और कुर्बानी दी।

‘भगत सिंह बेवकूफ और बेकार बच्चे थे’

देश की आजादी की लड़ाई में लोगों के शामिल होने पर रिंकू सिंह राही ने कहा कि क्या भगत सिंह के घरवाले नहीं थे। क्या चंद्रशेखर आजाद के घरवाले नहीं थे। अगर आज के समय के हिसाब से तुलना करूं तो लगता है कि भगत सिंह सबसे बेवकूफ और बिल्कुल बेकार बच्चे थे। वे घर के हिसाब से बागी थे। यही बागी लोग थे, जिन्होंने खुद को देश के साथ खड़ा किया और अपने परिवार की परवाह किए बिना देश के लिए आगे आए। आजादी एक ऐसा विचार था, जिसे लोगों ने समझा और उसके लिए लड़ाई लड़ी। आज के समय में हमें शायद उस भावना की और भी ज्यादा जरूरत है, जो भगत सिंह के मन में रही होगी। उन्होंने सवाल किया कि जब भगत सिंह देश के लिए काम कर रहे थे, तब क्या उन्होंने कभी सोचा होगा कि आगे चलकर उनके जीवन पर कोई बायोग्राफिकल स्केच बनाया जाएगा?

हाथरस में सासनी के गांव ऊसवा के रिंकू सिंह को अच्छे नंबरों से 12वीं पास करने पर उन्हें स्कॉलरशिप मिली थी। इसके बाद उन्होंने जमशेदपुर के टाटा इंस्टीट्यूट से बीटेक किया था। 2004 में रिंकू सिंह ने पीसीएस परीक्षा पास की थी। नौकरी के दौरान उन्होंने दिव्यांग कोटे से यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा दी। 2021 में उन्हें 683वीं रैंक मिली और आईएएस अफसर बने थे।

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