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    जालौन में भी सुर्खियों में आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही, शासन को भेजा पत्र; आधे काम का आधा वेतन दें

    By Digital Desk Edited By: Dharmendra Pandey
    Updated: Sun, 19 Jul 2026 04:22 PM (IST)

    IAS Officer Rinku Singh Rahi: कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के नाम से अवैध कब्जे की जांच को लेकर ब्लॉक प्रमुख रामराजा निरंजन ने साजिश करके विवाद कि ...और पढ़ें

    पीसीएस से आईएएस अफसर बने रिंकू सिंह राही

    पीसीएस से आईएएस अफसर बने रिंकू सिंह राही

    HighLights

    1. चार घंटे के काम का अधिक वेतन मिलने पर ‍उठाया सवाल

    2. ऐसी जगह पोस्टिंग मांगी, जहां वे नियमों के मुताबिक कर सकें काम

    डिजिटल डेस्क, लखनऊ। पीसीएस से आईएएस अफसर बने रिंकू सिंह राही जालौन में तैनाती के दौरान भी चर्चा में हैं। भाजपा नेता के ब्लॉक प्रमुख रामराजा निरंजन के कोल्ड स्टोरेज पर एक्शन के बाद उनको उरई सदर से हटाया गया।

    आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही का पांच पन्नों का प्रमुख सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक को लिखा गया पत्र सुर्खियों में हैं। बेहद हिम्मत वाले अधिकारी रिंकू सिंह राही ने लिखा है कि मेरा काम चार घंटे का है तो आधी सैलरी दीजिए। इसके साथ ही लिखा है कि जहां नियम से काम हो, वहां भेज दीजिए। पांच पन्नों के इस लेटर में उन्होंने लिखा है कि मौजूदा तैनाती पर उन्हें दिन में सिर्फ चार घंटे काम मिलता है, इसलिए चाहें तो सरकार उनकी आधी सैलरी कर दे। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें ऐसी जगह पोस्टिंग दी जाए, जहां वे नियमों के मुताबिक काम कर सकें। अगर मैं पूरे दिन का काम नहीं कर रहा, तो मुझे आधी तनख्वाह दे दीजिए। या फिर ऐसी जगह भेज दीजिए, जहां कानून के मुताबिक काम कर सकूं।

    उत्तर प्रदेश कैडर के 2023 बैच के IAS अधिकारी रिंकू सिंह राही ने सरकार को लिखे अपने पांच पन्नों के पत्र में अपनी पोस्टिंग, कामकाज के तरीके और प्रशासनिक फैसलों को लेकर कई सवाल उठाए हैं। इससे पहले भी वह शाहजहांपुर और राजस्व परिषद उत्तर प्रदेश लखनऊ में तैनाती के दौरान चर्चित हुए थे। राष्ट्रपति को शर्तों के साथ आईएएस पद से इस्तीफा देने वाले रिंकू सिंह राही को मई में ही जालौन में तैनाती मिली है।

    आईएएस रिंकू सिंह राही जालौन में एसडीएम न्यायिक के पद पर तैनात हैं। पहले उरई एसडीएम के पद पर थे। उन्होंने शासन को भेजे पत्र में लिखा है कि यहां आम जनता के हित और सरकारी कामों की निरंतरता के लिए मैंने कई मौकों पर व्यक्तिगत मान्यताओं और अंतरात्मा के प्रतिकूल व्यावहारिक संतुलन अपनाने का प्रयास किया। विधायक गौरी शंकर वर्मा के सामने डीएम ने आदेश दिया की तहसील क्षेत्र में अवैध कब्जों और अतिक्रमण के मामले में कोई कार्रवाई न की जाए। इस आदेश की उपेक्षा की जगह मैंने बीच का रास्ता निकालते हुए सिर्फ प्राप्त शिकायतों पर ही नियमानुसार कार्रवाई शुरू की। नतीजा ये हुआ कि शिकायतें बढ़ने लगीं और शिकायतों का फर्जी निस्तारण होने लगा।

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    रिंकू सिंह राही ने लिखा कि जनपद की रैंक ऊपर रखने के लिए आईजीआरएस और एंटी भू माफिया के मामलों का फर्जी निस्तारण स्वीकार करने के लिए मजबूर किया गया। इसका भी रास्ता मैंने निकाला, लेकिन मना कर दिया गया। कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के नाम से अवैध कब्जे की जांच को लेकर ब्लॉक प्रमुख रामराजा निरंजन ने साजिश करके विवाद किया जिसके चलते मेरा तबादला कर दिया गया। उन्होंने लिखा, ईमानदार पृष्ठभूमि वाले अधिकारी को जब ऐसे परिणाम का सामना करना पड़ सकता है तो अन्य अधिकारी और कर्मचारियों की स्थिति तो और भी चुनौती पूर्ण हो सकती है।

    रिंकू सिंह ने पहले भी कहा था, काम नहीं तो वेतन नहीं। अपने पत्र में उन्होंने लिखा, एसडीएम न्यायिक के तौर पर कोर्ट में उन्हें दो घंटे काम करना होता है। कोर्ट के बाहर फाइल्स को समझने और कानूनी कार्य करने के लिए चार घंटे और लग जाते हैं। अगर रोज काम के आठ घंटे माने जाए तो भी यह 50 फीसदी ही है। उन्होंने लिखा कि अभी वो आधा ही काम कर रहे हैं इसलिए उन्हें वेतन भी आधा ही दिया जाए।

    डीएम के जनता दर्शन की भी पोल-पट्टी खोली

    रिंकू सिंह राही ने डीएम के जनता दर्शन की भी पोल-पट्टी खोली है। उन्होंने लिखा कि जनता दर्शन में डीएम साहब के साथ बैठना होता है, हालांकि डीएम साहब शिकायतों के निस्तारण का दिखावा ही करते हैं जिससे अंतर्मन को ठेस पहुंचती है। डीएम साहब के साथ जनता दर्शन में समय गुजारना खुद को धोखा देना है।
    उन्होंने पत्र में लिखा है कि जब नौकरी के शुरुआती दौर में ही एक तहसील जैसे छोटे से प्रशासनिक क्षेत्र में नियमित एसडीएम के रूप में काम करने का मौका नहीं मिल रहा है तो आगे क्या मौके मिलेंगे। वर्तमान हालात ऐसे है कि भविष्य में सीडीओ, नगर आयुक्त, डीएम जैसे पदों के लिए मेरी उपयोगिता के मूल्यांकन को प्रभावित कर सकते हैं।

    उन्होंने लिखा कि डीएम साहब ने मुझे एसडीएम न्यायिक के पद पर तैनात किया है। अगर मुझसे कोई गलती हुई हो.. जिसके लिए मैं जिम्मेदार हूं तो मुझे नियमानुसार दंडित किया जाए और दंड की कार्रवाई पूरी होने के बाद अगर संभव हो तो उन्हें सीखने के लिए कैपेसिटी बिल्डिंग के समान और पर्याप्त मौके उपलब्ध कराने के लिए जालौन की किसी तहसील में नियमानुसार एसडीएम के पद पर तैनाती के निर्देश दें। अगर कोई तैनाती संभव न हो तो मेरा कैडर बदलने के लिए अनुमति और संस्तुति प्रदान करें। उन्होंने चिट्ठी में लिखा कि जब तक इस पर अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक 22 जुलाई 2026 से उन्हें आधा वेतन ही दिया जाए।

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