Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    कसमंडी कला विवाद: प्राचीन दीवारों पर नाग-कलश की आकृतियां, मंदिर होने का दावा

    By Ashish PandeyEdited By: Vivek Shukla
    Updated: Sat, 23 May 2026 09:09 AM (IST)

    लखनऊ के मलिहाबाद में मंदिर और मकबरे को लेकर विवाद गहरा गया है। पासी समाज और हिंदू संगठन इसे राजा कंस का प्राचीन शिव मंदिर बता रहे हैं, जबकि मुस्लिम पक ...और पढ़ें

    मलिहाबाद क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कसमंडी कला गांव में विवादित स्थल l जागरण

    मलिहाबाद क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कसमंडी कला गांव में विवादित स्थल l जागरण

    HighLights

    1. कसमंडी कला में मंदिर-मकबरा विवाद गहराया

    2. दीवारों पर नाग-कलश, कमल सनातन प्रतीक

    3. पासी समाज ने ASI जांच की मांग की

    आशीष पांडेय, मलिहाबाद, (लखनऊ)। ऐतिहासिक मलिहाबाद क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कसमंडी कला गांव में मंदिर और मकबरे को लेकर गहराया विवाद बेसबब नहीं है। इस प्राचीन स्थल पर हिंदू संगठनों, विशेषकर पासी समाज और मुस्लिम पक्ष के बीच ऐतिहासिक दावों को लेकर तनातनी की स्थिति है।

    पासी समाज का आरोप है कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई की मृत्यु के बाद यहां धार्मिक झंडा लगाने और परिसर के भीतर हाल ही में पक्की कब्रें बनाने की गतिविधियों से स्थानीय स्तर पर अतिक्रमण की मंशा जाहिर है। विवाद का केंद्र प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के ठीक पीछे स्थित ऐतिहासिक इमारतें हैं।

    लाखन आर्मी और पासी समाज के प्रमुख पदाधिकारियों का दृढ़ दावा है कि 980-1031 ईस्वी में इस पूरे अवध क्षेत्र पर महाप्रतापी राजपासी राजा कंस का शासन था। ऐतिहासिक "लखनऊ गजेटियर" और प्राचीन वृत्तांतों का हवाला देते हुए हिंदू पक्ष का कहना है कि कसमंडी नाम का उद्गम ही राजा कंस के नाम से जुड़ा हुआ है। जब विदेशी आक्रांता सैयद सालार मसूद गाजी ने अवध की धरती पर कदम रखा था, तब राजा कंस ने अपनी वीरता का परिचय देते हुए उससे कड़ा और ऐतिहासिक मुकाबला किया था।

    22LKC_M_44_22052026_498

    विवादित स्थल के अंदर बने नाग की आकृति और फूल-जागरण


     

    यह ढांचा वास्तव में राजा कंस का अभेद्य किला था, जिसके भीतर एक प्राचीन शिव मंदिर स्थापित था। दीवारों पर अंकित सनातन प्रतीक दे रहे गवाही हिंदू संगठनों का आरोप है कि विदेशी आक्रमण के बाद इस भव्य किले और मंदिर परिसर पर जबरन अधिकार कर उसे मस्जिद और मकबरे का रूप देने का प्रयास किया गया। हालांकि, आज भी इस इमारत की प्राचीन दीवारों पर नाग-कलश, कमल और सनातन संस्कृति से जुड़ी अन्य पौराणिक आकृतियां साफ तौर पर मौजूद हैं, जो इसके मूल रूप से मंदिर होने की गवाही दे रही हैं।

    खबरें और भी

    हिंदू पक्ष का कहना है कि परिसर के बाहर हाल ही में मुस्लिम समुदाय का बोर्ड लगाया गया है और अंदर नई मजार बनाकर पुरातन इतिहास को दबाने की कोशिश की जा रही है। दूसरी ओर, मुस्लिम पक्ष और स्थानीय मौलाना इन दावों को सिरे से खारिज कर रहे हैं। उनका तर्क है कि यह ढांचा कई पीढ़ियों पुरानी पुश्तैनी मस्जिद और मकबरा है। उनके अनुसार, सरकारी राजस्व रिकार्ड और वक्फ के दस्तावेजों में भी इस संपत्ति को धार्मिक इबादतगाह और मजार के रूप में ही दर्ज किया गया है।

    22LKC_M_46_22052026_498

     विवादित स्थल के अंदर बनी कब्र। जागरण


     

    स्थानीय नागरिकों और हिंदू संगठनों के अनुसार, इस स्थल पर पहले कभी नियमित रूप से नमाज नहीं होती थी, लेकिन पिछले दो वर्षों से यहां सुनियोजित तरीके से नमाज पढ़ना शुरू किया गया। हाल ही में खामनेई की मौत के बाद झंडा लगाने और पक्की कब्रों के निर्माण ने आग में घी का काम किया है, जिससे स्थानीय समाज में भारी आक्रोश है। पासी समाज की मांग है कि सत्यता का पता लगाने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से इसकी जांच कराई जाए।

    यह भी पढ़ें- लखनऊ के कसमंडी कला में मंदिर-मकबरा विवाद गहराया, नमाज के बाद बढ़ा तनाव

    ऐसे गरमाया मामला
    यह मामला कुछ समय पहले पूर्व डिप्टी सीएम डा दिनेश शर्मा के एक बयान के बाद गरमाया था। पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री कौशल किशोर की कसमंडी में आयोजित एक जनसभा में मुख्य अतिथि डा. दिनेश शर्मा ने मंच से ही राजा कंसा पासी के इतिहास और उनके शौर्य का जिक्र किया था। डा. शर्मा के बयान के बाद पासी समाज इस स्थान को लेकर सक्रिय हुआ था।

    पासी समाज का दावा है कि पीएचसी के पीछे बने दो पुराने ढांचे राजा कंसा के शिव मंदिर थे बाद में जिनको मकबरे में बदल दिया गया। ढांचे में नाग कलश की आकृति बनी है। इतिहासकारों के अनुसार सन 1100 के शुरुआती दौर 980-1031 ई में कसमंडी कंवलाहार में राजपासी राजा कंसा का शासन था। पासी समाज का कहना है कि ढांचे के अंदर बनी समाधि कुछ समय पहले ही बनाई गई और बाहर लगा बोर्ड भी मुस्लिम समुदाय ने हाल में ही लगाया है। एसडीएम अंकित मौर्य का कहना है कि गांव में कानून व्यवस्था बनाए रखने को कहा गया है।