वंदे भारत एक्सप्रेस पकड़वाने के नाम पर लूट, 1 KM के लिए वसूले 3000; RPF ने लखनऊ में दबोचे 2 ऑटो चालक
लखनऊ स्टेशन पर ऑटो चालक यात्रियों से मनमानी वसूली कर रहे हैं, खासकर उन्हें वंदे भारत जैसी ट्रेनों में आउटर ...और पढ़ें
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HighLights
लखनऊ में ऑटो चालक यात्रियों से कर रहे मनमानी वसूली।
वंदे भारत एक्सप्रेस में आउटर से चढ़ाने के लिए ₹3000 वसूले।
आरपीएफ ने दो ऑटो चालकों को गिरफ्तार कर गिरोह का भंडाफोड़ किया।
जागरण संवाददाता, लखनऊ। जीआरपी, आरपीएफ और रेलवे अफसरों की नाक के नीचे यात्रियों से लखनऊ स्टेशन पर आटो चालक मनमानी वसूली के सारे रिकार्ड तोड़ रहे हैं। पिछले साल 24 अगस्त को जहां केजीएमयू के डाक्टर सनी चौधरी से लखनऊ स्टेशन (चारबाग) से लखनऊ जंक्शन (छोटी लाइन) तक जाने के लिए आटो चालक ने दो हजार रुपये वसूल लिया था, इस बार एक यात्री से तीन हजार रुपये वसूलने का मामला सामने आया।
आरपीएफ ने दो आटो चालकों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में पता चला कि यह चालक उस गिरोह का हिस्सा हैं जो पिछले कई दिनों से लखनऊ स्टेशन से यात्रियों को आटो में बैठाकर एक किलोमीटर दूर मवैया यार्ड तक ले जाते हैं। यहां आउटर पर रोकी गई वंदे भारत एक्सप्रेस का आटोमेटिक गेट खुलवाकर यात्रियों को चढ़ा देते हैं।
दरअसल पिछले दिनों यात्री रणवीर को लखनऊ जंक्शन से देहरादून वंदे भारत एक्सप्रेस से यात्रा करना था। बोगी सी-14 में उनका आरक्षण था। गलती से रणवीर लखनऊ स्टेशन (चारबाग) पहुंच गए। यहां आटो चालक नितिन राजपूत ने कहा कि ट्रेन लखनऊ जंक्शन से छूटने वाली है। वह ट्रेन की बोगी खुलवाकर भीतर बैठा देगा, इसके लिए तीन हजार रुपये लगेंगे।
रणवीर आटो में बैठ गए। मवैया आउटर पर पहुंचे तो वंदे भारत एक्सप्रेस लखनऊ जंक्शन से छूटने के बाद यहां खड़ी मिली। आटो चालक ने गेट खुलवाकर यात्री को बैठा दिया। सेंसरयुक्त गेट के बीच रास्ते खोले जाने पर यात्रियों ने सुरक्षा पर सवाल उठा दिया। इसकी शिकायत के बाद आरपीएफ लखनऊ जंक्शन प्रभारी अमित राय ने आटो चालक नितिन राजपूत और उसके एक और साथी को गिरफ्तार किया। साथ ही आटो भी जब्त हो गई है।
इन ट्रेनों के यात्री बनते हैं शिकार
लखनऊ जंक्शन से सुबह एसी डबल डेकर, देहरादून वंदे भारत एक्सप्रेस, तेजस एक्सप्रेस और दोपहर में शताब्दी एक्सप्रेस रवाना होती हैं। सुबह चार बजे से लखनऊ स्टेशन के प्लेटफार्म छह से सात के बीच आटो चालकों का गिरोह उन यात्रियों को तलाशता है जो गलती से लखनऊ जंक्शन की जगह लखनऊ स्टेशन पहुंच जाते हैं।
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ट्रेन को रुकवाकर उसमें बैठाने के लिए तीन से चार हजार रुपये की वसूली होती है। देहरादून वंदे भारत ही नहीं लखनऊ जंक्शन-काठगोदाम एक्सप्रेस सहित कई ट्रेनों के यात्री भी इसका शिकार होते हैं।
आउटर पर रुकती हैं ट्रेनें
लखनऊ जंक्शन से छूटने के बाद कई ट्रेनें मवैया आउटर पर लाइन बदलने के लिए प्वाइंट एक्सचेंज में देरी के चलते तीन से चार मिनट रुकती हैँ। इसका फायदा आटो चालक उठाते हैं।
