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लखनऊ छावनी के पांच बाजारों की बदली पहचान, ब्रिटिशकालीन नाम हटाकर एकता, ऊदा देवी और मंगल पांडेय के नाम पर रखे

Updated: Wed, 26 Aug 2026 12:23 AM (IST)

लखनऊ छावनी परिषद ने अंग्रेजी शासनकाल के पांच बाजारों के नाम बदल दिए हैं। इन औपनिवेशिक नामों को हटाकर अब ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।

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HighLights

  1. छावनी परिषद ने पांच बाजारों के नाम बदले।

  2. अंग्रेजी शासनकाल के औपनिवेशिक नाम हटाए गए।

  3. नए नामकरण में एकता, मंगल पांडेय बाजार शामिल।

जागरण संवाददाता, लखनऊ। छावनी परिषद ने पांच बाजारों के नाम बदल दिए हैं। अंग्रेजी शासनकाल में रखे गए इन बाजारों के नाम के स्थान पर उनका नामकरण भी हो गया है। परिषद की गठित समिति की अनुशंसा के बाद छावनी परिषद ने पांच बाजारों के औपनिवेशिक नाम में बदलाव करने की सूचना जारी कर दी है।

छावनी में तोपखाना बाजार का नाम सरकारी दस्तावेज में आरए बाजार था। इसी तरह रजमन बाजार का नाम बीसी बाजार, बड़ी लालकुर्ती का नाम एलबीआइ बाजार, छोटी लालकुर्ती का नाम आरबीआइ बाजार और सदर बाजार की गोला बाजार का नाम केनेडी मार्केट था।

छावनी की बसावट करते समय ब्रिटिश सरकार ने धर्म, जातियों और काम के आधार पर आवासीय व बाजार क्षेत्र विकसित किए थे। ये नाम परतंत्रता की निशानी के रूप में याद किए जाते हैं। बाजार क्षेत्र के नामों को बदलने के लिए छावनी परिषद ने एक समिति का गठन किया था। 

नाम बदलने के साथ नए नाम रखने का प्रस्ताव इस समिति ने आमजन से प्राप्त किया। इन पर सहमति देने के बाद परिषद प्रशासन ने पुराने नाम को हटाकर उनकी जगह नए नाम को अपनाने की सूचना जारी कर दी।

कुछ ऐसे आबाद हुए थे छावनी के मुहल्ले

हजरतगंज की तरह बड़ी बाजार छावनी की मुख्य बाजार होती थी, जहां ब्रिटिश अफसर और उनका परिवार खरीदारी करता था। इसी तरह बनिया बाजार में किराना सहित रोजमर्रा जरूरत की वस्तुएं मिलती थीं। सौदागर मोहाल वह रिहायशी इलाका है, जिसे अंग्रेजों ने उनकी फौज के साथ काम करने वाले बड़े ठेकेदारों और व्यापारियों के लिए आबाद किया था।

बनिया मोहाल में दुकान चलाने वाले मध्यमवर्गीय व्यापारी रहते थे। मखनिया मोहाल में दूध, दही से जुड़ा काम करने वाले यदुवंशी परिवार रहते थे। लकड़ी मोहाल में ब्रिटिश फौज को लकड़ी की आपूर्ति करने वाली टाल और उस काम से जुड़े लोग रहते थे।

बड़ी लालकुर्ती में ब्रिटिश फौज के घोड़ों की मालिश की जाती थी। इनसे जुड़े लोग आजाद मोहाल में रहते थे। वाल्मीकि मोहाल में सफाई से जुड़े, बूचर मोहाल में स्लाटर हाउस में काम करने वाले कसाई वर्ग को बसाया गया था।

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पुराना नाम नया नाम
आरए बाजार एकता बाजार
बीसी बाजार ऊदा देवी बाजार
एलबीआइ बाजार मातादीन वाल्मीकि बाजार
आरबीआइ बाजार मंगल पांडेय बाजार
कैनेडी मार्केट अटल बिहारी वाजपेयी बाजार