मोहनलालगंज मतांतरण मामला: चंगाई सभा में स्टेरॉयड देकर ठीक करते थे दर्द, लोगों का करते थे ब्रेनवॉश
मोहनलालगंज में सक्रिय मतांतरण गिरोह के चौंकाने वाले तरीके सामने आए हैं, जिसमें सीधे-सादे ग्रामीणों को मनोवैज्ञानिक रूप से फंसाया जाता था। ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर
HighLights
मतांतरण गिरोह ग्रामीणों को मनोवैज्ञानिक तरीकों से फंसाता था।
चंगाई सभाओं में स्टेरायड देकर चमत्कार का दावा।
गरीबों को शिक्षा, इलाज का प्रलोभन देकर मतांतरण।
जागरण संवाददाता, लखनऊ। मोहनलालगंज क्षेत्र में सक्रिय मतांतरण गिरोह के तौर-तरीकों को लेकर चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच में सामने आया है कि ये मिशनरी ग्रामीण इलाकों के सीधे-साधे लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए मनोवैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल करते थे।
लोगों का ब्रेनवाश करने के लिए वे अक्सर छुआछूत की खबरें दिखाकर उन्हें सनातन धर्म छोड़ने को कहते थे। अयोध्या में सामने आए चढ़ावा चोरी प्रकरण की खबरें दिखाकर कहते थे कि भगवान के नाम पर पैसा देने से केवल चोरी होती है।
एक व्यक्ति ने बताया कि चंगाई सभा में घुटनों के दर्द तथा अन्य शाराीरिक व्याधियों से ग्रस्त लोग की पहचान कर उन्हें चंगाई सभा में लाया जाता था। आशंका है कि उनको पवित्र जल में दवा के नाम स्टेरॉयड दिया जाता था, जिससे मिलने वाले तात्कालिक लाभ को वे ईश्वरीय चमत्कार बताते थे।
हालांकि अब तक ऐसी किसी दवा की बरामदगी नहीं हुई है। गिरोह से जुड़े लोग गांवों में घूम-घूमकर परिवारों की निजी समस्याओं की थाह लेते थे। इसके बाद वे पीड़ित परिवारों को यह विश्वास दिलाते थे कि उनके घर में जो बार-बार दुर्घटनाएं हो रही हैं, बीमारियां आ रही हैं, वह सब उनके पारंपरिक देवी-देवताओं की नाराजगी या किसी अदृश्य बुरी शक्ति का असर है।
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इन समस्याओं के समाधान के नाम पर उन्हें विशेष प्रार्थना सभाओं में आने के लिए प्रेरित किया जाता था। बच्चों को अच्छी शिक्षा, मिशनरी अस्पतालों में छूट पर इलाज दिलाने का भी प्रलोभन दिया जाता था।
चमत्कार का झांसा और मानसिक शोषण
चंगाई सभाओं (प्रार्थना सभाओं) के दौरान ये लोग ढोंग रचकर यह दावा करते थे कि ईसाई प्रार्थना अपनाने से सभी प्रकार के कष्ट, बीमारियां और दुर्घटनाओं का खतरा हमेशा के लिए टल जाएगा। आर्थिक तंगी से जूझ रहे और डर के साये में जी रहे ग्रामीण आसानी से इनके झांसे में आ जाते थे।
धीरे-धीरे उन्हें मानसिक रूप से इस कदर जकड़ लिया जाता था कि वे अपनी पुरानी आस्था छोड़कर मतांतरण की ओर बढ़ने लगते थे। ग्रामीणों की शिकायतों और हिंदू संगठनों के कड़े विरोध के बाद पुलिस अब इस एंगल से भी गहराई से जांच कर रही है कि इन गिरोहों द्वारा डर फैलाने का यह प्रोपेगैंडा कितना पुराना और फैला हुआ है।