यूपी के कुकरैल में बनेगी देश की पहली 'नाइट सफारी', सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के बाद प्रोजेक्ट की अंतिम बाधा भी हुई दूर
लखनऊ में प्रस्तावित कुकरैल नाइट सफारी को सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी मिल गई है, जिससे इसके निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। यह भारत की पहली और दुनिया की ...और पढ़ें

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HighLights
सुप्रीम कोर्ट ने कुकरैल नाइट सफारी प्रोजेक्ट को मंजूरी दी।
यह भारत की पहली और विश्व की पांचवीं नाइट सफारी होगी।
₹1510 करोड़ की लागत से दो साल में होगा निर्माण।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। राजधानी लखनऊ में प्रस्तावित कुकरैल नाइट सफारी की अंतिम बाधा बुधवार को दूर हो गई। सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी है। अब बहुप्रतीक्षित नाइट सफारी का काम जल्द शुरू हो सकेगा। इसके निर्माण में न्यूनतम दो वर्ष लगेंगे। प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट की केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) की सिफारिशों के आधार पर ही इसे बनाएगी।
प्रदेश सरकार देश की पहली व विश्व की पांचवीं नाइट सफारी लखनऊ में बनवाने जा रही है। अभी सिंगापुर, थाइलैंड, चीन व इंडोनेशिया में नाइट सफारी हैं। चूंकि कुकरैल आरक्षित वन क्षेत्र होने से नाइट सफारी बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट की स्वीकृति अनिवार्य थी।
सुप्रीम कोर्ट से इजाजत मांगने के लिए सरकार ने किया था अंतरिम आवेदन
यही वजह है कि सरकार ने खुद पिछले वर्ष सुप्रीम कोर्ट से इजाजत मांगने के लिए अंतरिम आवेदन किया था। कोर्ट ने पर्यावरण प्रभाव की जांच सीईसी से कराने का निर्णय दिया था। सीईसी ने नाइट सफारी को सैद्धांतिक अनुमति तो दे दी है, लेकिन इसके साथ कड़ी पर्यावरणीय और प्रशासनिक शर्तें भी जोड़ी थी।
सरकार नाइट सफारी के लिए सीईसी की शर्तें मानने के लिए तैयार है।
यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट ने सीईसी की शर्तों के साथ इसे बनवाने की हरी झंडी दे दी है। नाइट सफारी को केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (सीजेडए) सहित अन्य स्वीकृतियां पहले ही मिल चुकी हैं।
एनजीटी में भी चल रहा मामला पहले ही सरकार के पक्ष में आ चुका था। गौरतलब है कि अगस्त 2022 में कैबिनेट ने इसे अपनी सैद्धांतिक सहमति दी थी। पिछले वर्ष फरवरी में व्यय वित्त समिति ने 1510 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट को स्वीकृति दी थी।
खबरें और भी
सरकार ने मानी सीईसी की यह शर्तें
- नाइट सफारी में प्रस्तावित एडवेंचर जोन नहीं बनेगा
- चार लेन सड़क के बजाय अब दो लेन बनेंगी सड़कें
- नवाब वाजिद अली शाह प्राणी उद्यान कुकरैल वन क्षेत्र में नहीं होगा स्थानांतरित
- पर्यावरणीय निगरानी के लिए एक विशेष निगरानी समिति होगी गठित
- यह समिति हर महीने निरीक्षण कर प्रत्येक तीन माह में राज्य सरकार, सीजेडए और सीईसी को सौंपेगी रिपोर्ट
- परियोजना में कम से कम पेड़ों का होगा कटान, नए पेड़ भी लगाए जाएंगे
- नाइट सफारी में तेज रोशनी और शोर-शराबे पर भी रहेगी रोक
- 'लो-इंटेंसिटी', 'एनिमल-फ्रेंडली लाइटिंग', नियंत्रित वाहनों की आवाजाही और सीमित समय में रखा जाए प्रवेश
- प्राकृतिक नालों, जलधाराओं और आर्द्रभूमि से किसी भी तरह की नहीं की जाएगी छेड़छाड़
नाइट सफारी में यह होगा खास
कुकरैल नाइट सफारी करीब 900 एकड़ क्षेत्रफल में 1510 करोड़ रुपये में तैयार होगी। इसे दो चरणाें में बनाया जाएगा। पहले चरण में 631 करोड़ रुपये से नाइट सफारी के काम होंगे। यहां करीब 71 प्रतिशत क्षेत्र में हरियाली रहेगी। सौर ऊर्जा का भी इस्तेमाल किया जाएगा। नाइट सफारी के निदेशक राम कुमार मानना है कि नाइट सफारी का निर्माण होने से लखनऊ अंतरराष्ट्रीय पर्यटन के मानचित्र पर आ जाएगा।
यह विदेशी पर्यटकों को भी आकर्षित करेगा। यहां कैफेटेरिया, 7डी थियेटर, आडिटोरियम, पार्किंग आदि की भी सुविधा रहेगी। नाइट सफारी में करीब साढ़े पांच किलोमीटर का ट्रामवे तथा 1.92 किलोमीटर का पाथवे विकसित किया जाएगा। यहां एशियाटिक लायन, घड़ियाल, बंगाल टाइगर, उड़न गिलहरी, तेंदुआ, हायना आदि मुख्य आकर्षण रहेंगे।