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    लखनऊ के आठ निजी स्कूलों पर पांच-पांच लाख रुपये जुर्माने की तैयारी, मनमानी फीस और ड्रेस खरीदारी का मामला

    Updated: Sun, 28 Jun 2026 03:10 PM (IST)

    लखनऊ के आठ निजी विद्यालयों पर मनमानी फीस वृद्धि और निर्धारित दुकानों से कॉपी-किताबें व यूनिफॉर्म खरीदने को बाध्य करने पर प्रशासन सख्त कार्रवाई की तैया ...और पढ़ें

    आठ निजी स्कूलों पर पांच-पांच लाख रुपये जुर्माने की तैयारी। AI जेनरेटेड फोटो

    आठ निजी स्कूलों पर पांच-पांच लाख रुपये जुर्माने की तैयारी। AI जेनरेटेड फोटो

    HighLights

    1. लखनऊ के आठ निजी स्कूलों पर कार्रवाई की तैयारी।

    2. मनमानी फीस वृद्धि और निर्धारित दुकानों से खरीदारी का आरोप।

    3. प्रत्येक स्कूल पर पांच लाख रुपये तक का जुर्माना संभव।

    जागरण संवाददाता, लखनऊ। राजधानी में मनमाने ढंग से फीस वृद्धि करने और अभिभावकों को निर्धारित दुकानों से कापी-किताबें एवं यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य करने वाले आठ निजी विद्यालयों पर प्रशासन सख्त कार्रवाई की तैयारी में है। जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद इन विद्यालयों पर पांच-पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

    जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) कार्यालय को इस संबंध में 29 अभिभावकों की शिकायतें प्राप्त हुई थीं। शिकायतों की जांच के दौरान आठ विद्यालय प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए। जिलाधिकारी के निर्देश पर तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक राकेश कुमार पांडेय ने संबंधित विद्यालयों के प्रबंधकों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा था।

    शिक्षा विभाग के अनुसार विद्यालय प्रबंधनों की ओर से दिए गए जवाब संतोषजनक नहीं पाए गए। अब अगले सप्ताह सभी संबंधित विद्यालयों को अंतिम सुनवाई के लिए बुलाया गया है। यदि इस दौरान भी विद्यालय अपने पक्ष में उचित स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं कर सके, तो उनके विरुद्ध उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम, 2018 के तहत पांच-पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।

    जिन विद्यालयों पर कार्रवाई की तैयारी है, उनमें ऐलन हाउस पब्लिक स्कूल (वृंदावन), केके माडर्न पब्लिक स्कूल, शीलवती आइडियल स्कूल, आश्रम एकेडमी (कृष्णा नगर), सेंट डोमनिक इंटर कॉलेज, सेठ एम.आर. जयपुरिया स्कूल (अयोध्या रोड), ब्राइटवे इंटर कॉलेज (जानकीपुरम) तथा केजे मॉडर्न पब्लिक स्कूल शामिल हैं।

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    जिला विद्यालय निरीक्षक देवेंद्र पांडेय ने बताया कि अंतिम सुनवाई में भी यदि विद्यालयों का पक्ष संतोषजनक नहीं पाया गया, तो नियमानुसार आर्थिक दंड की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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