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स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026: ईवी को बढ़ावा, कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन और हरियाली से लखनऊ बना नंबर वन

Published: Mon, 07 Sep 2026 10:49 PM (IST)

लखनऊ ने स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में देश में शीर्ष स्थान प्राप्त किया है। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने, कचरे के ...और पढ़ें

यह तस्वीर एआई के द्वारा बनाई गई है।

यह तस्वीर एआई के द्वारा बनाई गई है।

HighLights

  1. इलेक्ट्रिक वाहनों से कूड़ा उठान, प्रदूषण नियंत्रण में सहायक।

  2. सड़कों से धूल हटाने को 97 इलेक्ट्रिक स्वीपिंग मशीनें।

  3. कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन, हरियाली बढ़ाने पर विशेष जोर।

जागरण संवाददाता, लखनऊ। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में लखनऊ के देश में शीर्ष स्थान हासिल करने के पीछे शहर में प्रदूषण नियंत्रण के लिए किए गए लगातार प्रयास और उनके प्रभावी क्रियान्वयन की अहम भूमिका रही। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने, कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन, सड़कों से धूल कम करने और हरियाली बढ़ाने की योजनाओं ने शहर की हवा को बेहतर बनाने में मदद की। नगर निगम की ओर से प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों को चिह्नित कर उनके नियंत्रण पर विशेष जोर दिया गया।

नगर निगम ने कूड़ा उठाने के लिए 1100 इलेक्ट्रिक वाहनों को अपने बेड़े में शामिल किया। इससे कूड़ा उठान के दौरान होने वाले धुएं और प्रदूषण को कम करने में मदद मिली। सड़कों पर जमा धूल को नियंत्रित करने के लिए 97 इलेक्ट्रिक मैकेनाइज्ड स्वीपिंग मशीनें लगाई गईं।

ये मशीनें प्रमुख मार्गों पर चलकर सड़क और उसके किनारे जमा धूल को साफ करती हैं। खराब सड़कों से उड़ने वाली धूल भी वायु प्रदूषण का बड़ा कारण थी। इसे नियंत्रित करने के लिए अभियान चलाकर 559.85 किलोमीटर सड़कों को पक्का किया गया।

कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में भी बड़े स्तर पर काम हुआ। हरदोई रोड पर लंबे समय से जमा 18 लाख मीट्रिक टन कूड़े के पहाड़ को खत्म किया गया। साथ ही शहर से प्रतिदिन निकलने वाले करीब 2000 मीट्रिक टन कूड़े के वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन की व्यवस्था की गई। इससे खुले में कूड़ा जलाने और उसके बिखराव से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिली।

शहर में हरित क्षेत्र बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। वर्टिकल गार्डन के साथ सड़कों और नदी किनारे हरित क्षेत्र विकसित किए गए। वन विभाग ने मियावाकी पद्धति से पौधरोपण किया। इसके अलावा फ्लाईओवर निर्माण और सड़कों के चौड़ीकरण से कई स्थानों पर जाम कम हुआ, जिससे वाहनों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिली।

सार्वजनिक परिवहन को भी प्रदूषण नियंत्रण की मुहिम से जोड़ा गया। शहर में 115 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन हो रहा है। महापौर सुषमा खर्कवाल ने कहा कि स्वच्छ हवा के लिए किए जा रहे प्रयास लगातार जारी रहेंगे। नगर आयुक्त गौरव कुमार के मुताबिक, कूड़ा प्रबंधन में ईवी की संख्या बढ़ाने, सड़क की धूल नियंत्रित करने, हरियाली बढ़ाने और इलेक्ट्रिक बसों के संचालन का सकारात्मक असर दिखाई दिया है।

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