लखनऊ में मधुमक्खियों के झुंड का तांडव, दो दर्जन से अधिक लोग घायल; ग्रामीणों में दहशत
मलिहाबाद, लखनऊ के रहीमाबाद थाना क्षेत्र में मधुमक्खियों के हमलों से दहशत फैल गई है। खेतों में काम कर रहे किसानों और राहगीरों सहित दो दर्जन से अधिक लोग ...और पढ़ें

HighLights
मलिहाबाद में मधुमक्खियों के हमलों से दो दर्जन घायल।
खेतों में काम कर रहे किसानों और राहगीरों पर हमला।
ग्रामीणों ने आग और धुएं से जान बचाई, दहशत में।
जागरण संवाददाता, मलिहाबाद (लखनऊ)। रहीमाबाद थाना क्षेत्र के विभिन्न गांवों में मधुमक्खियों के हमले से हड़कंप मच गया है। खेत में काम कर रहे किसानों और राहगीरों पर अचानक हुए हमले में दर्जनों लोग घायल हो गए। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि लोगों को अपनी जान बचाने के लिए आग और धुएं का सहारा लेना पड़ा।
ग्राम पंचायत कैथुलिया के मजरा सभा खेड़ा की निवासी कलावती ने बताया कि वह अपने बच्चों दीपक, अंकिता, और तनू तथा देवर शिवकुमार व जेठ रघुनंदन के साथ खेत में गेहूं के बोझ बांध रही थीं। इसी दौरान अचानक मधुमक्खियों के एक बड़े झुंड ने उन पर धावा बोल दिया।
जान बचाने के लिए पूरा परिवार बलदेव खेड़ा गांव की ओर भागा जहां ग्रामीणों ने आनन-फानन में आग जलाकर धुआं किया तब कहीं जाकर मधुमक्खियां पीछे हटीं। घायलों का रहीमाबाद के एक निजी अस्पताल में उपचार चल रहा है।
दूसरी घटना गढ़ी जिंदौर के मजरा गदिया खेड़ा की है। ग्रामीणों के अनुसार वहां एक गूलर के पेड़ पर मधुमक्खियों का विशाल छत्ता लगा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि एक पक्षी अक्सर शहद के लालच में छत्ते पर चोंच मार देता है जिससे उत्तेजित होकर मधुमक्खियां रास्ते से गुजरने वाले हर व्यक्ति को निशाना बनाने लगती हैं।
पांच दिनों में करीब दो दर्जन लोग आए चपेट में
मधुमक्खियों के इस आतंक की चपेट में पिछले पांच दिनों में करीब दो दर्जन लोग आ चुके हैं। हालिया घटनाओं मे ऋतिक रामनगर निवासी को मधुमक्खियों ने दौड़ा लिया जिसके बाद वे चिल्लाते हुए कैलाश गदिया खेड़ा के पास पहुंचे। ऋतिक को बचाने के चक्कर में मधुमक्खियों ने कैलाश पर हमला कर दिया जिससे उनका चेहरा बुरी तरह सूज गया है
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।तिरगवा निवासी राह चलते शकील पर भी हमला हुआ। उन्होंने सूझबूझ दिखाते हुए अपनी चप्पल जलाई और धुएं के जरिए पीछा छुड़ाया।मधुमक्खियों के लगातार हो रहे हमलों के कारण ग्रामीणों में भारी दहशत है।
दोपहर के बाद किसानों ने उस ओर जाना बंद कर दिया है जिस तरफ पेड़ पर छत्ता लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उस छत्ते या पक्षी की समस्या का समाधान नहीं होता तब तक खेतों में काम करना जान जोखिम में डालने जैसा है।