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    मार्केट में आते ही छाई मलिहाबाद की 'दशहरी', पहले दिन ही हुई आम की रिकॉर्डतोड़ बिक्री

    Updated: Tue, 02 Jun 2026 06:52 AM (GMT+05:30)

    मलिहाबाद की मशहूर दशहरी आम ने बाजारों में दस्तक दे दी है, पहले ही दिन एक हजार टन से अधिक की बिक्री हुई। इसकी मिठास देश-विदेश तक पहुंच रही है, जिससे बा ...और पढ़ें

    मार्केट में आते ही छाई मलिहाबाद की दशहरी।

    मार्केट में आते ही छाई मलिहाबाद की दशहरी।

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    आशीष पांडेय, लखनऊ। दुनिया भर में अपने जायके और मिठास के लिए मशहूर दशहरी के शौकीनों का इंतजार पूरा हुआ। सोमवार को दशहरी ने बाजारों में दस्तक दी। दहशरी आई और छा गई। पहले ही दिन मंडी में एक हजार टन से अधिक का कारोबार हो गया।

    दशहरी के शौकीन लखनऊ में ही नहीं देश के दूसरे शहरों में भी है इसलिए मुंबई से लेकर हरियाणा, दिल्ली और पश्चिम बंगाल तक से कारोबारी उन तक मिठास पहुंचाने के लिए पहुंचे।

    पहले दिन जिस तरह से कारोबार हुआ उससे बागबान उत्साहित हैं। कारोबारियों का कहना है कि उम्मीद है कि स्वाद के साथ दशहरी इस बार मुनाफा भी लेकर लाएगी।

    देश ही नहीं दुनिया में कई देशों तक दशहरी का निर्यात किया जाता है। दशहरी केवल जायका ही नहीं मलिहाबाद व आसपास के पूरे इलाके की आर्थिकी की धुरी है जिससे हजारों परिवारों का जीवन यापन चलता है। मलिहाबाद आम मंडी में दशहरी आम की बिक्री शुरू हो गई।

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    हालांकि रविवार को हुई बारिश के कारण आम की आवक काफी सीमित रही इसके बावजूद बड़ी संख्या में कारोबारी खरीद के लिए पहुंचे। हालांकि शुरुआती कीमतों को लेकर बागवान संतुष्ट नहीं हैं। आढ़ती विमल काे उम्मीद है कि बारिश के बाद आम के रेट बढ़ने के आसार है।

    आढ़ती सुनील गुप्ता ने बताया बैगिंग वाले आम की बिक्री 60 रुपये से 80 रुपये प्रति किलो तक हुई। बैगिंग वाला आम साधारण आम की अपेक्षा महंगा बिकता है क्योंकि यह आम चमकदार और आकर्षक होता है।

    दशहरी क्यों है खास

    • करीब दो सौ वर्ष पहले दशहरी का स्वाद पहली बार चखने को मिला। काकोरी के दशहरी गांव में आम का पेड़ था जिसका स्वाद और मिठास सबसे अलग थी। इसी गांव के नाम पर इस आम का नाम 'दशहरी' पड़ा। काकोरी में आज भी वह दो पुराना पेड़ मौजूद है। इस पेड़ को सरकार ने ऐतिहासिक वृक्ष का दर्जा दिया है।
    • यह आम अपने विशिष्ट आकार और स्वाद के लिए भी खास पहचान रखता है। आकार में थोड़ा लंबा, पतला और हल्का मुड़ा हुआ होता है। पकने के बाद इसका छिलका हल्का पीला और सुनहरा हरा हो जाता है। इसका गूदा रसीला, मुलायम और रेशा रहित जो इसे दूसरे आम से खास बनाता है।
    • मलिहाबाद को दशहरी आम का सबसे बड़ा उत्पादक केंद्र माना जाता है। यहां की जलवायु और मिट्टी इस आम को विशेष स्वाद और सुगंध देती है। करीब डे़ढ़ सौ हेक्टेयर में आम की फलपटटी फैली हुई है।
    • स्वाद और सुगंध के कारण दशहरी की मांग देश खाड़ी देशों में भी खूब है। कुवैत और दुबई में तो दशहरी के काफी शौकीन हैं। इसके अलावा कनाडा, आस्ट्रेलिया और स्पेन तक दशहरी का निर्यात किया जाता है।

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