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    बेमौसम बारिश से बागवानों की धड़कन बढ़ी, दशहरी आम की फसल को नुकसान की आशंका

    By Ashish Kumar Pandey Edited By: Dharmendra Pandey
    Updated: Fri, 20 Mar 2026 06:06 PM (GMT+05:30)

    Unseasonal Rain: बारिश के कारण बढ़ी नमी आम की फसल के लिए जहर के समान है। अगर धूप नहीं खिली तो 30 प्रतिशत तक फसल बर्बाद हो सकती है। ...और पढ़ें

    बारिश से भीग गया आम का बौर, अब रोगों की आशंका

    बारिश से भीग गया आम का बौर, अब रोगों की आशंका

    HighLights

    1. आम जैसी संवेदनशील फसल के लिए इस समय धूप बहुत जरूरी

    2. बागों में मित्र कीटों की कमी से परागण की प्रक्रिया प्रभावित

    3. बारिश के कारण बौरों के झड़ने और फंगस लगने का खतरा बढ़ा

    संवाद सूत्र, लखनऊ। राजधानी और पास के जिलों में शुक्रवार को बेमौसम बारिश काफी लोगों के लिए चिंता का सबब बन गई है। यह बारिश मलिहाबाद के बागवानों के लिए चिंताजनक है। आम जैसी संवेदनशील फसल के लिए इस समय धूप बहुत जरूरी है।

    मौसम के बदलते मिजाज ने बागवानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। बेमौसम हुई बारिश और बादलों से आम की फसल को भारी नुकसान पहुचा रही है। बागवान संजीत सिंह और रामगोपाल के अनुसार यदि अगले 24 घंटों में मौसम साफ नहीं हुआ और तेज धूप नहीं निकली तो नुकसान का उम्मीद से कहीं ज्यादा हो सकता है।

    इस वर्ष बागों में आम के बौर में फूल की सेटिंग पहले ही कम देखी जा रही थी। जानकारों का मानना है कि बागों में मित्र कीटों की कमी रही जिससे परागण की प्रक्रिया प्रभावित हुई। रही-सही कसर बेमौसम बारिश ने पूरी कर दी है। बारिश के कारण बौरों के झड़ने और उनमें फंगस लगने का खतरा बढ़ गया है।

    सीजन की शुरुआत में कीटों का प्रकोप कम होने के कारण बागवान इस बात से खुश थे कि उन्हें कीटनाशकों का छिड़काव कम करना पड़ रहा है। इससे लागत घटने की उम्मीद थी, लेकिन अचानक हुई बारिश ने इस खुशी को मायूसी में बदल दिया है।

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    बारिश के कारण बढ़ी नमी आम की फसल के लिए जहर के समान है। अगर धूप नहीं खिली तो 30 प्रतिशत तक फसल बर्बाद हो सकती है। बागवान सुभाष मिश्र ने बताया आम के बौर के लिए इस समय शुष्क मौसम और धूप की नितांत आवश्यकता है। अधिक नमी से दहिया,खर्रा रोग का प्रकोप बढ़ सकता है।

    बारिश से फूलों का रस धुल जाता है और कीट सक्रिय नहीं हो पाते। यदि 24 घंटे में आसमान साफ नहीं हुआ तो बागवानों को बड़े आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र के मुख्य उद्यान विशेषज्ञ कृष्ण मोहन चौधरी ने बताया मौसम के बदलाव से कीट-रोगों को बढ़ने का वातावरण मिल जाता है।

    इस समय के तापमान में आम फसल की पछेती किस्मों में बौर पर पाउडरी मिल्ड्यू, खर्रा या दहिया रोग की संभावना बढ़ सकती है। गुझिया कीट भी बढ़ने लगते हैं। इनके साथ ही बाग में भुनगा तथा रुजी कीट का प्रकोप भी देखन को मिल सकता है।

    आलू, टमाटर व सरसों की फसलों को नुकसान

    इटौंजा क्षेत्र में शुक्रवार को हुई बारिश से टमाटर, आलू, सरसों की फसलों को नुकसान है। किसानों ने बताया कि अचानक बारिश से कुछ फसलों को नुकसान है। सरसों की कटी फसल को बारिश से नुकसान होगा। टमाटर व आलू की फसलों के लिए बारिश का पानी हानिकारक है। यदि ज्यादा बारिश हुई तो गेहूं की फसल भी गिर जाएगी। उसको भी नुकसान होगा।