लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर तकरार: NHAI ने कहा 'नॉन-परफॉर्मर', PNC बोली- 'सिर्फ नोटिस मिला है'
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे मामले में पीएनसी इन्फ्राटेक और एनएचएआई आमने-सामने आ गए हैं। एनएचएआई ने पीएनसी को नॉन-परफॉर्मर घोषित करने का दावा किया, जबकि पी ...और पढ़ें

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे। जागरण
HighLights
एनएचएआई ने पीएनसी को नॉन-परफॉर्मर घोषित करने का दावा किया।
पीएनसी ने कहा, सिर्फ कारण बताओ नोटिस जारी हुई है।
एक्सप्रेसवे की मरम्मत पर तीन करोड़ से अधिक खर्च हुए।
जागरण संवाददाता, लखनऊ। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे मामले में पीएनसी इन्फ्राटेक लिमिटेड व भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) आमने सामने आ गए हैं। लखनऊ परिक्षेत्र के क्षेत्रीय अधिकारी गौतम विशाल की ओर से पांच अगस्त को प्रेसवार्ता में दावा किया गया था कि पीएनसी इन्फ्राटेक को नान परफार्मर की संस्तुति के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को भेजा गया है।
वहीं एएनआइ एजेंसी के अनुसार, पीएनसी इन्फ्राटेक लिमिटेड का तर्क है कि एनएचएआइ ने न डिबार किया है और न नान परफार्मर घोषित किया है। सिर्फ कारण बताओ नोटिस जारी की है और उस पर सब्सिडियरी कंपनी अवध एक्सप्रेसवे प्राइवेट लिमिटेड जवाब दे रही है।
सड़क की मरम्मत का जिम्मा चाहे छोटा हाे या बड़ा, उसे 15 साल तक एजेंसी कराती रहेगी। यह एनएचएआइ से अनुबंध में पहले से शामिल है। एनएचएआइ के मुताबिक, एक्सप्रेसवे पर सड़क धंसने के बाद से अब तक तीन करोड़ से अधिक की मरम्मत कार्य पर खर्च हो चुके हैं।
एनएचएआइ ने परफार्मेंस सिक्योरिटी का दो प्रतिशत जुर्माना लगाया है। एएनआइ एजेंसी के अनुसार, पीएनसी कंपनी ने बताया है कि एक्सप्रेसवे को हाइब्रिड एन्युइटी आधार पर छह-लेन (भविष्य में आठ-लेन) का निर्माण पहले ही पूरा हो गया था और सब्सिडियरी को प्रविजनल सर्टिफिकेट एक अक्टूबर 2025 और फाइनल सर्टिफिकेट दो फरवरी, 2026 को दिया जा चुका है।
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पीएनसी के मुताबिक, बारिश से लगभग 300 मीटर के कुछ हिस्से प्रभावित हुए थे, जो पूरे एक्सप्रेसवे की लंबाई का 0.5 प्रतिशत से भी कम है। वहीं एनएचएआइ ने छह स्थान बताए थे। कंपनी ने कहा कि उसने अपनी मेंटेनेंस की जिम्मेदारियों के तहत तुरंत मरम्मत और सुधार का काम शुरू कर दिया था। एनएचएआइ ने इसे स्वीकार भी किया है।
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एनएचएआइ ने कंसेशनियर को जो नोटिस दिए हैं, उनमें कई तरह की कार्रवाई की बात कही गई है, जैसे खास टेक्निकल स्टाफ (जैसे हेड आफ पेवमेंट/हाईवे) को तीन साल तक के लिए डिबार की प्रक्रिया शुरू करना और कंसेशनियर की ''''पेवमेंट कंडीशन इंडेक्स'''' रेटिंग को कम करना है। पीएनसी का तर्क है कि इन सभी बिंदुओं पर जवाब दिया जा रहा है।
एनएचएआइ ने स्वतंत्री एजेंसी यानी कंसेशनियर के प्रोजेक्ट मैनेजर विवेक गुप्ता को हटाया जा चुका है, इसकी पुष्टि पीएनसी ने भी की है। पीएनसी का दावा है कि वह नए प्रोजेक्ट्स की बोली में हिस्सा लेने के लिए योग्य बनी हुई है।