आईएएस की नौकरी से इस्तीफा देने वाले रिंकू सिंह के पिता सौदान सिंह राही बोले- हमारे पास बैंक बैलेंस नहीं, ईमान है
IAS Officer Resigned: 2009 में समाज कल्याण अधिकारी रहते हुए मुजफ्फरनगर में रिंकू ने सौ करोड़ के घोटाले का पर्दाफाश किया था। ...और पढ़ें

रिंकू सिंह राही के पिता सौदान सिंह राही
HighLights
घर दिखाया, जिसमें प्लास्टर नहीं और आय का साधन चक्की
रिंकू सिंह को 2009 में नौकरी के दौरान लगी थी गोली, तब इलाज में खर्च हो गया सब धन
रिंकू सिंह के पिता की राष्ट्रपति से अपील, सरकार बेटे को दे ईमानदारी का फल
डिजिटल डेस्क, लखनऊ। भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) से इस्तीफा देने वाले यूपी कैडर के 2022 बैच के अफसर रिंकू सिंह राही के पिता ने पुत्र को लेकर राष्ट्रपति से मार्मिक अपील की है। रिंकू सिंह राही के पिता सौदान सिंह राही ने बताया कि रिंकू ने हमेशा ईमानदारी चुनी और उन्हें काम नहीं दिया जा रहा था। सरकार बेटे को उसकी ईमानदारी का फल दे।
उनके पिता सौदान सिंह राही ने कहा कि रिंकू ने हमेशा ईमानदारी चुनी और उन्हें काम नहीं दिया जा रहा था। उसमें मेहनत और ईमानदारी से काम करने का जज्बा है। हमें उस पर गर्व है। वह जो निर्णय लेता है, वो देश हित में लेता है। सौदान सिंह ने अपनी व्यथा व्यक्त की और मीडिया से कहा कि मेरा मकान देख लीजिए। हमारी जो चक्की की मेहनत है, उसी का पलस्तर है। उसी का सब कुछ है।
सौदान सिंह ने कहा कि वर्ष 2009 में जब रिंकू सिंह की हत्या का प्रयास किया गया और उसको गोली लगी थी तो उसकी सारी जो नौकरी की कमाई थी, वो मुजफ्फरनगर आने-जाने में सब खत्म कर दी। 2009 में समाज कल्याण अधिकारी रहते हुए मुजफ्फरनगर में रिंकू ने सौ करोड़ के घोटाले का पर्दाफाश किया था।
इसके बाद उसकी हत्या का प्रयास किया गया और गोली लगने से उसकी एक आंख चली गई थी, लेकिन फिर भी उसने हिम्मत नहीं हारी। इसके बाद उसने आईएएस की परीक्षा पास की। उन्होंने कहा कि हमें उस पर गर्व है कि जो फैसले लेता है वह देशहित में ही लेता है।
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सौदान सिंह ने कहा कि हमारे पास कुछ नहीं है। हमारा बैंक बैलेंस देख लीजिए, लेकिन जो लोग मेहनती और ईमानदार होते हैं, उनके पास बैंक बैलेंस नहीं ईमान ही होता है। जो देशभक्त होते हैं, वो सही निर्णय लेंगे।
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लोक सेवा आयोग भी सही निर्णय लेगा और राष्ट्रपति की तरफ से भी सही निर्णय होगा। सरकार उसे ईमानदारी का फल दे। ईमानदारी को ठुकराया न जाए, नहीं तो देश में ईमानदार नहीं होंगे।
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