लखनऊ PGI ने कम लागत में जटिल प्रत्यारोपण कर रचा इतिहास, चिकित्सा क्षेत्र में हासिल की एक बड़ी उपलब्धि
एसजीपीजीआइएमएस, लखनऊ ने दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी एएलपीएस से पीड़ित एक बच्चे का पहला सफल हेप्लो-आइडेंटिकल हेमेटोपोएटिक स्टेम सेल ट्रांसप्लांट किया है। यह ...और पढ़ें

संजय गांधी परास्नातक आयुर्विज्ञान संस्थान। जागरण
HighLights
एसजीपीजीआइएमएस ने एएलपीएस बच्चे का सफल प्रत्यारोपण किया।
यह पहला हेप्लो-आइडेंटिकल स्टेम सेल ट्रांसप्लांट था।
दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी का स्थायी इलाज संभव हुआ।
जागरण संवाददाता, लखनऊ। संजय गांधी परास्नातक आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआइएमएस, लखनऊ) ने प्रत्यारोपण चिकित्सा क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। संस्थान में दुर्लभ अनुवांशिक बीमारी आटोइम्यून लिम्फोप्रोलिफेरेटिव सिंड्रोम (एएलपीएस) से पीड़ित बच्चे का पहला सफल हेप्लो-आइडेंटिकल हेमेटोपोएटिक स्टेम सेल ट्रांसप्लांट किया गया।
वृंदावन कालोनी के निवासी बच्चे को चार वर्ष की उम्र से बार-बार मुंह में दर्दनाक छाले, त्वचा पर खुजलीदार लाल चकत्ते, लिवर, स्प्लीन व लिम्फ नोड्स के बढ़ने की समस्या होने लगी थी। उसे एनीमिया भी हो गया, जिसे नियंत्रित करने के लिए स्टेरायड देना पड़ता था।
आठ वर्ष की आयु में पीजीआइ में जांच में पता चला कि वह दुर्लभ बीमारी एएलपीएस से ग्रसित है, जो एफएएस (एक प्रमुख प्रोटीन-कोडिंग) जीन में म्यूटेशन के कारण होती है। इस रोग में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली स्वयं के विरुद्ध काम करती है, जिससे खून की कोशिकाओं में कमी, बार-बार संक्रमण, रक्तस्राव के साथ अंग असामान्य बढ़ते हैं।
कई मामलों में आगे चलकर लिम्फोमा जैसे कैंसर का खतरा भी रहता है। अब तक इस बीमारी का मुख्य उपचार स्टेरायड था, जिसके गंभीर दुष्प्रभाव होते हैं। ऐसे में डाक्टरों ने हेमेटोपोएटिक स्टेम सेल ट्रांसप्लांट (बोन मैरो ट्रांसप्लांट) को स्थायी इलाज के रूप में चुना, हालांकि यह प्रक्रिया अत्यंत जटिल और जोखिमपूर्ण मानी जाती है।
खबरें और भी
यह भी पढ़ें- लखनऊ में महिला ने एसिड पीकर दी जान, पड़ोसी पर परेशान करने का आरोप
क्या होता है हेप्लो-आइडेंटिकल स्टेम सेल ट्रांसप्लांट
इसमें मरीज को खून बनाने वाली स्वस्थ स्टेम सेल ऐसे डोनर से दी जाती हैं, जिसका एचएलए मैच केवल 50 प्रतिशत (आधा) होता है। आमतौर पर यह डोनर माता-पिता या भाई-बहन होते हैं। इस प्रक्रिया में मरीज का खराब बोन मैरो हटाकर डोनर का स्वस्थ स्टेम सेल प्रत्यारोपित किया जाता है, जिससे शरीर में नई स्वस्थ रक्त कोशिकाएं बनने लगती हैं।